रुद्रप्रयाग;
भूपेंद्र भण्डारी
ग्यारह हजार फिट की उंचाई पर स्थित करोडों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक भगवान केदारनाथ का धाम इन दिनों बर्फानी बना हुआ है। पूरी केदारपुरी ने बर्फ की सफेद चादर ओढ ली है और पारा माइनस 6 डिग्री से माइनस 10 डिग्री तक पहुंच चुका है। पानी बर्फ में बदल चुका है और हाड कंपा देने वाली ठन्ड पड रही है। यहां चल रहे आपदा पुर्ननिर्माण के कार्य भी बर्फवारी के चलते बन्द हो गये हैं तो पीने का पानी भी बर्फ को गलाकर उपयोग में लाया जा रहा है। पानी के नल पूरी तरह से जम गये है। धाम में बुद्ववार को सुबह ताजी बर्फवारी हुई जिसके चलते निचली घाटियों में भी शीत लहर चल रही है। यही नहीं द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ में भी बर्फवारी के चलते दोनों धाम सफेद चादर से ढके हुए हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से यहां पूरे वर्ष भर पुर्ननिर्माण कार्य चलते रहते हैं और यहां शीतकाल में भी मानवीय हलचलें होती रहती हैं पूर्व में यहां पर छह माह तक कोई भी नहीं जाता था मगर अब यहां पर पुलिस के साथ ही विभिन्न विभागों के कर्मचारी व मजदूर रहते हैं ऐसे में प्रशासन ने भी यहां मजदूरों के लिए यहां पूरी व्यवस्थाएं की हैं जिससे कोई दिक्कतें ना हो सकें।
भूपेंद्र भण्डारी
ग्यारह हजार फिट की उंचाई पर स्थित करोडों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक भगवान केदारनाथ का धाम इन दिनों बर्फानी बना हुआ है। पूरी केदारपुरी ने बर्फ की सफेद चादर ओढ ली है और पारा माइनस 6 डिग्री से माइनस 10 डिग्री तक पहुंच चुका है। पानी बर्फ में बदल चुका है और हाड कंपा देने वाली ठन्ड पड रही है। यहां चल रहे आपदा पुर्ननिर्माण के कार्य भी बर्फवारी के चलते बन्द हो गये हैं तो पीने का पानी भी बर्फ को गलाकर उपयोग में लाया जा रहा है। पानी के नल पूरी तरह से जम गये है। धाम में बुद्ववार को सुबह ताजी बर्फवारी हुई जिसके चलते निचली घाटियों में भी शीत लहर चल रही है। यही नहीं द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ में भी बर्फवारी के चलते दोनों धाम सफेद चादर से ढके हुए हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से यहां पूरे वर्ष भर पुर्ननिर्माण कार्य चलते रहते हैं और यहां शीतकाल में भी मानवीय हलचलें होती रहती हैं पूर्व में यहां पर छह माह तक कोई भी नहीं जाता था मगर अब यहां पर पुलिस के साथ ही विभिन्न विभागों के कर्मचारी व मजदूर रहते हैं ऐसे में प्रशासन ने भी यहां मजदूरों के लिए यहां पूरी व्यवस्थाएं की हैं जिससे कोई दिक्कतें ना हो सकें।
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