Halloween party ideas 2015

रुद्रप्रयाग:
भूपेंद्र भंडारी  


जिले  में सरकारें और उसका तंत्र किस प्रकार जनता के पैंसों को बर्बाद कर रही हैं इसके अनकों उदाहरण यहां मौजूद हैं लेकिन बार-बार ये लापरवाहियां उजागर होने के बाद भी सरकारी महकमा सबक लेने को तैयार नहीं है। जबकि इन घोर लापरवाहियों के प्रति जनप्रतिनिधि भी उदासीन बैठे हैं। ऐसे में विकास कार्यों को ग्रहण लगा हुआ है और जनता के पैंसों की जमकर बंदरबांट की जा रही है। एक ऐसा ही विकास का घिनौना नमूना ,आज फिर से आपको दिखा रहे हैं, जो  सरकारों की अनीति और गैर जिम्मेदाराना रवैया को उजागर कर रहा है।

राज्य बनने के बाद से भले ही सरकारें पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के ढोल क्यों ना पीट रही हो और कागजों में सरकारों की कई महत्वकांक्षी योजनाएं परवाना भी क्यों न चढ़ रही हो? किन्तु जमीन पर, ये योजनाएं कैसे दम तोड़ रही हैं? इसका अंदाजा उत्तर भारत के एक मात्र सिद्धपीठ कार्तिक स्वामी मंदिर के आधार शिविर कनकचैंरी में पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाये जा रहे ,गढ़वाल मंडल विकास निगम के अधर में लटके गेस्ट हाउस से लगाया जा सकता है।
कार्तिक स्वामी मंदिर समिति के अध्यक्ष,सत्रुघ्न नेगी   ने बताया कि यहां पर सरकार और उसके तंत्र की घोर लापरवाही के कारण पिछले ढाई वर्षों से गढ़वाल मंडल विकास निगम ने गेस्ट हाउस का निर्माण कार्य अधर में छोड़ा हुआ है जबकि निर्माण कार्य 70 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। पौने दो करोड़ की लागत की सामग्री यहां खुले आसमान के नीचे बर्बाद हो चुकी है। गेस्ट हाउस के लिए मंगाई  गई लाखों रूपयों के प्लाईबोर्ड पहले बरसात और अब पाले में खराब हो चुके हैं। जबकिं लोहों के एंगल जंक खा रहे हैं। वहीं आधा से ज्यादा सामग्री चोर भी उड़ा ले गये हैं। लेकिन इसकी सुध लेने को न तो कार्यदायी संस्था तैयार है और न ही प्रशासन।



 आपको बता दे कि गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा पिछले ढाई साल पूर्व कनचैंरी में यात्रियों के ठहरने के लिए आवास गृह का निर्माण कार्य आरम्भ किया था। लेकिन जिस जमीन पर यह निर्माण कार्य किया गया वह जमीन वन विभाग से हस्तातरित नहीं हो पाई थी। ऐसे में वन विभाग ने डेढ़ वर्ष पूर्व इस निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। बड़ी बात यह है कि इस भवन पर जीएमवीएन ने 70 प्रतिशत कार्य कर दिया है।स्थानीय प्रदीप राणा और   एस एन भट्ट का कहना है कि  वन भूमि हस्तांतरण न होने के कारण एक वर्ष पहले जीएमवीएन इस गेस्ट हाउस को तिलवाड़ा में स्थानांतरित करने जा रहा था, तब कार्तिक स्वामी मंदिर समिति और पोखठा के ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध किया था

 जिससे यह स्थानांतरित  नहीं हो पाया। लेकिन दुर्भाग्य ये कि इसका निर्माण भी इससे आगे नहीं बढ़ पाया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर यह वन विभाग की जमीन थी तो आखिर पहले वन भूमि हस्तांतरण क्यों नहीं किया गया ।  सरकारें विकास के कितने ही गुब्बारे क्यों न फुलायें लेकिन ये गुब्बारे जमीन पर उतरने से पहले ही फूट जाते हें।

 इसकी बानगी आप इस रिपोर्ट में देख चुके हैं। लेकिन बड़ा और गम्भीर सवाल ये है कि पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने के लिए यहां के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को विकसित करने दम भरने वाली सरकारें जनता का पैंसा का दुरूप्रयोग आखिर कब तक करती रहेंगी?
वहीं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और केन्द्रीय मंत्री उमा भारती भी जगह -जगह जाकर कार्तिक स्वामी धाम को पर्यटन और तीर्थाटन से जोड़ने के ढ़िढौरे तो खूब पीटते हैं मगर सरकारी कारिंदे ही उनकी मंशा पर पलीता लगा रहे हैं पर अफसोस! मंत्री जी भी अपने सिस्टम के आगे नतमस्तक नजर आ रहे हैं।

एक टिप्पणी भेजें

www.satyawani.com @ All rights reserved

www.satyawani.com @All rights reserved
Blogger द्वारा संचालित.