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ऋषिकेश;


 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के सीटीवीएस व न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक 39 वर्षीय महिला की छाती से लेकर स्पाइनल कार्ड तक फैले ट्यूमर का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर 1100 ग्राम वजन का ट्यूमर निकाल लिया।

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि उत्तराखंड में राजकीय व निजी अस्पतालों में चेस्ट व कॉर्डियो थॉरेसिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसी के मद्देनजर रोगियों की सुविधा के लिए एम्स संस्थान में फेफड़े व छाती से जुड़े रोगों की सर्जरी संबंधी बेसिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने बताया कि इसके अलावा संस्थान के स्तर पर फेफड़ों से जुड़े अन्य रोगों के उपचार के लिए एडवांस सेंटर स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी गई है, जिसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर को प्रोजेक्ट भेजा गया है।

एम्स के चेस्ट एंड कॉर्डियो थॉरेसिक सर्जन डा.अंशुमन दरबारी ने बताया कि हल्द्वानी निवासी महिला कुछ समय पूर्व बुखार के साथ ही सांस लेने की तकलीफ हुई,वह पहले एक निजी अस्पताल और फिर हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए गई। छाती में बड़े साइज का ट्यूमर होने से चिकित्सकों ने वहां ऑपरेशन से इनकार कर दिया।

 इसके बाद महिला एम्स पहुंची, संस्थान में सिटी स्केन,एमआरआई परीक्षण व बायोप्सी से महिला की छाती में न्यूरो फाइब्रोमा टाइप का 15×15 सेंटीमीटर बड़े साइज का ट्यूमर निकला, उन्होंने बताया कि इस डमबैल ट्यूमर जिसका एक बड़ा हिस्सा छाती में और कुछ भाग स्पाइनल कॉर्ड में फैला हुआ था। इसके बाद महिला की छाती का ऑपरेशन किया गया,जबकि न्यूरो सर्जन डा.रजनीश अरोड़ा ने स्पाइन का ऑपरेशन किया। डा.अंशुमन ने बताया कि इस तरह के ट्यूमर के ऑपरेशन में और अधिक विलंब होता तो छाती से नीचे के हिस्से में पक्षाघात लकवा मारने का खतरा था, साथ ही ट्यूमर के लगातार बढ़ते साइज से महिला की जान भी जा सकती थी। उन्होंने बताया कि अब महिला पूरी तरह से स्वस्थ है, उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। एम्स में इस ऑपरेशन पर 15 हजार खर्च आया है,जबकि निजी चिकित्सालय में इस ऑपरेशन पर 2 से 3 लाख का खर्च आता है।

एम्स में इस ऑपरेशन पर डा.दरबारी ने बताया कि एम्स निदेशक प्रो.रवि कांत ने राज्य में चेस्ट सर्जरी की सुविधा को बढ़ावा दिया है, जिसके चलते संस्थान में कार्डियो थोरेसिक सर्जरी क्लिनिक शुरू हो पाई है, जिससे रोगियों को लाभ मिल रहा है।

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