ऋषिकेश ;
उत्तम सिंह
हरिपुर कला क्षेत्र में जंगली हाथी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा।कल रात्रि एक हाथी जंगल से निकलकर मोतीचूर स्कूल के पास ग्राम प्रधान सतेंद्र धमंदा के घर से नीचे हरिपुर कलां मार्ग पर शिक्षक गोविंद सिंह बिष्ट के घर के सामने शांति कुंज की चारदीवारी को तोड़ आबादी क्षेत्र में फसलों को तहस नहस करते हुये निकल गया।हाथी की चिंगाड सुन कर लोग भयभीत हो गये।हाथी के उत्पात मचाने से ग्रामीणों की नींद खुल गई।घरों से बाहर निकले ग्रामीण अपने सामने विशालकाय हाथी को देखकर घर में दुबक गए।क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने बताया कि शीत कालीन मौसम में शाम को अंधेरा जल्दी होने के कारण आए दिन हाथी कि आमद से क्षेत्र में दहसत का माहौल बना रहता है। शाम एवं रात के समय नौकरी से घर लौटने वालो के साथ ही ट्यूशन पढ़ने जाने वाले स्कूली बच्चे भी आने जाने में घबराते है।क्योकि हाथी के हमले का खौफ उन पर हमेशा बना रहता है। डॉ नेगी ने बताया कि ग्रामीण फसलों के नुकसान से ज्यादा चिंतित तो अपनी जान बचाने के लिए रहते है।हाथी की आमद रोकने के लिए पार्क प्रशासन से लगातार गुहार लगाई जाती रही है। यहां तक की क्षेत्र में सौर ऊर्जा तारबाड़ लगाने की मांग भी उठाते आ रहे है।लेकिन आज तक कोई स्थाई समाधान नहीं हो पाया। उन्होने वन क्षेत्राधिकारी मोतीचूर रेज से हाथी से सुरक्षा के लिए क्षेत्र में गश्त बढाये जाने की मांग उठाई।
उत्तम सिंह
हरिपुर कला क्षेत्र में जंगली हाथी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा।कल रात्रि एक हाथी जंगल से निकलकर मोतीचूर स्कूल के पास ग्राम प्रधान सतेंद्र धमंदा के घर से नीचे हरिपुर कलां मार्ग पर शिक्षक गोविंद सिंह बिष्ट के घर के सामने शांति कुंज की चारदीवारी को तोड़ आबादी क्षेत्र में फसलों को तहस नहस करते हुये निकल गया।हाथी की चिंगाड सुन कर लोग भयभीत हो गये।हाथी के उत्पात मचाने से ग्रामीणों की नींद खुल गई।घरों से बाहर निकले ग्रामीण अपने सामने विशालकाय हाथी को देखकर घर में दुबक गए।क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं गढ़वाल महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने बताया कि शीत कालीन मौसम में शाम को अंधेरा जल्दी होने के कारण आए दिन हाथी कि आमद से क्षेत्र में दहसत का माहौल बना रहता है। शाम एवं रात के समय नौकरी से घर लौटने वालो के साथ ही ट्यूशन पढ़ने जाने वाले स्कूली बच्चे भी आने जाने में घबराते है।क्योकि हाथी के हमले का खौफ उन पर हमेशा बना रहता है। डॉ नेगी ने बताया कि ग्रामीण फसलों के नुकसान से ज्यादा चिंतित तो अपनी जान बचाने के लिए रहते है।हाथी की आमद रोकने के लिए पार्क प्रशासन से लगातार गुहार लगाई जाती रही है। यहां तक की क्षेत्र में सौर ऊर्जा तारबाड़ लगाने की मांग भी उठाते आ रहे है।लेकिन आज तक कोई स्थाई समाधान नहीं हो पाया। उन्होने वन क्षेत्राधिकारी मोतीचूर रेज से हाथी से सुरक्षा के लिए क्षेत्र में गश्त बढाये जाने की मांग उठाई।
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