नरेंद्र नगर;
वाचस्पति रयाल
श्री रामलीला कमेटी नरेंद्र नगर के तत्वावधान में यहां स्थित पालिका के रामलीला मैदान में प्रभु राम की 61वीं लीला की मंचन का शुभारंभ पालिका के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार व लीला कमेटी के अध्यक्ष सूरत सिंह थपलियाल ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। पंडित हितेश जोशी द्वारा पूजा अर्चना के बाद प्रभु राम की लीला का मंचन नारद मोह लीला से प्रारंभ हुई।
जब भगवान विष्णु की तपस्या में लीन नारद का ध्यान भंग करने में कामदेव असफल रहे तो नारद को अभिमान हो गया, नारद के अहंकार को चूर करने के लिए भगवान विष्णु ने माया नगरी का निर्माण किया और वहां के राजा शील निधि की पुत्री विश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारद की मुख मुद्रा वानर की बनाकर उसका घमंड चूर करने वाला दृश्य दर्शकों को खूब भाया।
इसके बाद कैलाश पर्वत पर शिव -पार्वती संवाद का दृश्य बड़ा रोचक रहा, अभिमानी रावण एक हाथ से कैलाश पर्वत को उठाने की ताकत लगा रहा है जिससे कैलाश हिल रहा है, किंतु शिवजी रावण के हाथ को कैलाश के नीचे दबा देते हैं जिससे रावण त्राहि- त्राहि करता है और भगवान शिव उसका घमंड चूर कर देते हैं। इसके बाद के दृश्य में राजा दशरथ के घर भगवान राम की जन्म की लीला का मंचन का दृश्य बड़ा ही मार्मिक ढंग से कलाकारों ने प्रस्तुत किया।
लीला के दृश्य की मंचन में रावण की भूमिका में धूम सिंह नेगी, नारद की भूमिका में द्वारिका प्रसाद जोशी, विष्णु की भूमिका में हितेश जोशी, कौशल्या की भूमिका में हिमांशु रयाल, सुमित्रा की भूमिका में शुभम पुंडीर, कैकई की भूमिका में अरविंद सेमल्टी, दशरथ की भूमिका में शैलेंद्र नौटियाल, ब्रह्मा की भूमिका में पवनकुमार ड्यूंडी, सुनैना की भूमिका में समीर पुंडीर तथा लक्ष्मी की भूमिका में महेश आदि कलाकार थे। हारमोनियम पर राकेश बहुगुणा तथा तबला पर विद्यासागर गौड की भूमिका प्रशंसनीय रही। मंच संचालन शिक्षक महेश गुसांई व पूर्व प्रधानाचार्य ऋतुराज सिंह नेगी ने किया।
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