जानिए गोवर्द्धन पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त, मान्यताएं और अन्नकूट का महत्व
इस दिन भगवान कृष्ण ने देव राज इन्द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी. इस बार गोवर्द्धन पूजा 8 नवंबर को है.
: दीपावली के अगले दिन गोवर्द्धन पूजा की जाती है. इस दिन भगवान कृष्ण , गोवर्द्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है. यही नहीं इस दिन 56 या 108 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्ण को उनका भोग लगाया जाता है. इन पकवानों को 'अन्नकूट' कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने देव राज इन्द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी. इस बार गोवर्द्धन पूजा 8 नवंबर को है.
गोवर्द्धन पूजा का महत्व
गोवर्द्धन पूजा के दिन गाय-बैलों की पूजा की जाती है. इस पर्व को 'अन्नकूट' के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सभी मौसमी सब्जियों को मिलाकर अन्नकूट तैयार किया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है. फिर पूरे कुटुंब के लोग साथ में बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं. मान्यता है कि अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी उम्र और आरोग्य की प्राप्ति होती है. यही नहीं ऐसा भी कहा जाता है कि इस पर्व के प्रभाव से दरिद्रता का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो साल भर दुख उसे घेरे रहते हैं. इसलिए सभी को चाहिए कि वे भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय अन्नकूट उत्सव को प्रसन्न मन से मनाएं. इस दिन भगवान कृष्ण को नाना प्रकार के पकवान और पके हुए चावल पर्वताकार में अर्पित किए जाते हैं. इसे छप्पन भोग की संज्ञा भी दी गई है. इसी दिन शाम को दैत्यराज बलि के पूजन का भी विधान है.
गोवर्द्धन पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 31 मिनट से
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 07 मिनट तक
.
गोवर्द्धन पूजा का प्रात: काल मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से 08 बजकर 52 मिनट तक.
गोवर्द्धन पूजा का सांयकालीन मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 41 मिनट तक. अब पर्वत पर रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें.
- अब हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए कहें:
गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव: ।अगर आपके घर में गायें हैं तो उन्हें स्नान कराकर उनका श्रृंगार करें. फिर उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें. आप चाहें तो अपने आसपास की गायों की भी पूजा कर सकते हैं. अगर गाय नहीं है तो फिर उनका चित्र बनाकर भी पूजा की जा सकती है.
- अब गायों को नैवेद्य अर्पित करें इस मंत्र का उच्चारण करें
लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु।
आचार्य देवेन्द्र प्रसाद भट्ट (देव जी भट्ट) निवास पाली बागी निकट बागेश्वर महादेव मन्दिर भोगपूर रानीपोखरी देहरादून उत्तराखंड
इस दिन भगवान कृष्ण ने देव राज इन्द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी. इस बार गोवर्द्धन पूजा 8 नवंबर को है.
: दीपावली के अगले दिन गोवर्द्धन पूजा की जाती है. इस दिन भगवान कृष्ण , गोवर्द्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है. यही नहीं इस दिन 56 या 108 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्ण को उनका भोग लगाया जाता है. इन पकवानों को 'अन्नकूट' कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने देव राज इन्द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी. इस बार गोवर्द्धन पूजा 8 नवंबर को है.
गोवर्द्धन पूजा का महत्व
गोवर्द्धन पूजा के दिन गाय-बैलों की पूजा की जाती है. इस पर्व को 'अन्नकूट' के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सभी मौसमी सब्जियों को मिलाकर अन्नकूट तैयार किया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है. फिर पूरे कुटुंब के लोग साथ में बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं. मान्यता है कि अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी उम्र और आरोग्य की प्राप्ति होती है. यही नहीं ऐसा भी कहा जाता है कि इस पर्व के प्रभाव से दरिद्रता का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि अगर इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो साल भर दुख उसे घेरे रहते हैं. इसलिए सभी को चाहिए कि वे भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय अन्नकूट उत्सव को प्रसन्न मन से मनाएं. इस दिन भगवान कृष्ण को नाना प्रकार के पकवान और पके हुए चावल पर्वताकार में अर्पित किए जाते हैं. इसे छप्पन भोग की संज्ञा भी दी गई है. इसी दिन शाम को दैत्यराज बलि के पूजन का भी विधान है.
गोवर्द्धन पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 31 मिनट से
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2018 को रात 09 बजकर 07 मिनट तक
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गोवर्द्धन पूजा का प्रात: काल मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से 08 बजकर 52 मिनट तक.
गोवर्द्धन पूजा का सांयकालीन मुहूर्त: 08 नवंबर 2018 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 41 मिनट तक. अब पर्वत पर रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें.
- अब हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए कहें:
गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव: ।अगर आपके घर में गायें हैं तो उन्हें स्नान कराकर उनका श्रृंगार करें. फिर उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें. आप चाहें तो अपने आसपास की गायों की भी पूजा कर सकते हैं. अगर गाय नहीं है तो फिर उनका चित्र बनाकर भी पूजा की जा सकती है.
- अब गायों को नैवेद्य अर्पित करें इस मंत्र का उच्चारण करें
लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु।
आचार्य देवेन्द्र प्रसाद भट्ट (देव जी भट्ट) निवास पाली बागी निकट बागेश्वर महादेव मन्दिर भोगपूर रानीपोखरी देहरादून उत्तराखंड
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