दीपावली के पर्व में छोटी दीपावली का अत्यंत महत्व है। आज के ही दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर के बंधन से 16100रानियों मुक्त कर नरकासुर का वध किया था,जिस ख़ुशी में दीप जलाए गये थे। साथ ही आज प्रभु श्रीराम के प्रिय भक्त हनुमान जी की जयंती भी है।हनुमान जी की पूजा करनेवाले भक्त अगले दिन अर्थात बड़ी दीपावली के दिन प्रातः काल ही हनुमान जी की पूजा -आराधना के साथ ही दिन आरम्भ करते है,और हनुमान जी की अखण्ड जोत प्रज्वल्लित करते है। खीर, हलवा और पूड़ी आदि से भोग लगाकर , उनकी पूजा अर्चना करने से अमावस्या जनित पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। और श्री राम और सीता माता का आशीर्वाद जीवन पर्यंत बना रहता है।
कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाते हैं। दीपदान करने का दिन है।यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है।शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यौहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज।
कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाते हैं। दीपदान करने का दिन है।यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है।शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यौहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज।
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