ऋषिकेश :
उत्तम सिंह
वन सीमा से सटा छिददरवाला क्षेत्र में हाथियों का उत्पाद बढता जा रहा है। सोमवार देर रात्रि छिद्दरवाला के आशा प्लाट क्षेत्र में आए तीन हाथियों ने खेत में घुसकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया।
ग्रामीणों ने शोरगुल कर हाथियों को जंगल की तरफ खदेड़ा।
सोमवार रात्रि करीब 8:30 बजे तीन हाथी नवाबवाला गांव में घुस आया। हाथी ने रामचन्द्र पंवार, सरोप सिंह राणा, विजय बिष्ट, पूरण मल्ल, दिनेश पाल, आशा सिंह चौहान, हरिराम, रामकिशन लखेरू आदि के खेत में धान की फसल रौंद डाली।
हाथियों को देख कर लोग दहशतजदा हो गये। उन्होंने शोर मचा कर हाथियों को भगाने की कोशिश की। लेकिन वह काफी देर खेतों में डटे रहे। इसके बाद लोगों ने पटाखे छुड़ाये तो तब हाथी विचलित होकर जंगल की तरफ भागे। बता दें कि इन दिनों धान की फसल पकने लगी है। किसान मंढाई की तैयारी में जुटे हैं। वहीं खेतों में हाथी व अन्य जंगली जानवरों की घुसपैठ से काश्तकार चिंतित हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि छोटे काश्तकार पहले ही मौसम की मार झेल रहा है। आवारा मवेशी फसलों के दुश्मन बने हुए हैं। अब हाथी भी खेतों में उत्पात मचाने लगे हैं। यदि इनकी रोकथाम के कारगर उपाय न हुए तो वह फसल बर्बाद कर देंगे। वन विभाग को इसकी रोकथाम के स्थायी इंतजाम करने चाहिये ।
उत्तम सिंह
वन सीमा से सटा छिददरवाला क्षेत्र में हाथियों का उत्पाद बढता जा रहा है। सोमवार देर रात्रि छिद्दरवाला के आशा प्लाट क्षेत्र में आए तीन हाथियों ने खेत में घुसकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया।
ग्रामीणों ने शोरगुल कर हाथियों को जंगल की तरफ खदेड़ा।
सोमवार रात्रि करीब 8:30 बजे तीन हाथी नवाबवाला गांव में घुस आया। हाथी ने रामचन्द्र पंवार, सरोप सिंह राणा, विजय बिष्ट, पूरण मल्ल, दिनेश पाल, आशा सिंह चौहान, हरिराम, रामकिशन लखेरू आदि के खेत में धान की फसल रौंद डाली।
हाथियों को देख कर लोग दहशतजदा हो गये। उन्होंने शोर मचा कर हाथियों को भगाने की कोशिश की। लेकिन वह काफी देर खेतों में डटे रहे। इसके बाद लोगों ने पटाखे छुड़ाये तो तब हाथी विचलित होकर जंगल की तरफ भागे। बता दें कि इन दिनों धान की फसल पकने लगी है। किसान मंढाई की तैयारी में जुटे हैं। वहीं खेतों में हाथी व अन्य जंगली जानवरों की घुसपैठ से काश्तकार चिंतित हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि छोटे काश्तकार पहले ही मौसम की मार झेल रहा है। आवारा मवेशी फसलों के दुश्मन बने हुए हैं। अब हाथी भी खेतों में उत्पात मचाने लगे हैं। यदि इनकी रोकथाम के कारगर उपाय न हुए तो वह फसल बर्बाद कर देंगे। वन विभाग को इसकी रोकथाम के स्थायी इंतजाम करने चाहिये ।
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