नई दिल्ली ;
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को सरकार के नियंत्रण में नहीं लाया जाएगा। यूपीए-2 के शासनकाल में जून 2010 में पेट्रोल जबकि एनडीए सरकार में अक्तूबर 2014 में डीजल की कीमतें नियंत्रण मुक्त करने का फैसला लिया गया था। साथ ही तय हुआ कि तेल विपणन कंपनियां हर 15 दिन में दोनों ईंधनों की कीमतें तय करेंगी।
अक्तूबर, 2014 से पहले इनकी कीमत सरकार तय करती थी। इसके बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 16 जून, 2017 को रोजाना कीमतें तय करने की व्यवस्था शुरू कर दी। केंद्र ने बृहस्पतिवार को दोनों ईंधनों की कीमतों में 2.50 रुपये प्रति लीटर कटौती की।
इसके बाद भाजपा शासित कई राज्यों ने आम लोगों को राहत देते हुए कीमतों में कटौती की। शुक्रवार को एक दिन की राहत के बाद शनिवार को फिर पेट्रोल के दाम में 18 पैसे, जबकि डीजल में 29 पैसे का इजाफा कर दिया गया।
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