ऋषिकेश;
प्रसिद्ध पंजाबी गायक श्री गुरदास मान और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मनजीत मान पंहुचे परमार्थ निकेतन उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट की आशीर्वाद लिया।
स्वामी जी महाराज ने उन्हे संगीत और स्वच्छता चले साथ-साथ का संदेश दिया और कहा कि संगीत सीधे लोगों के हृदय की गहराईयों तक पहुंचता है। संगीत के माध्यम से दिया गया संदेश अत्यंत प्रभावी हो सकता है। संगीत कोई विधा नहीं बल्कि जीवन है। भक्तिकाल में मीरा, सूरदास, रैदास, रसखान, कबीर, गुरूनानक और अनेक संत शिरोमणि कवियों ने अपने संगीत के माध्यम से न जाने कितनों का जीवन बदल दिया और आज भी उनका संगीत प्रेरणा का स्रोत है। संगीत, केवल स्वर और लय का व्यवस्थित रूप नहीं है बल्कि यह तो मनुष्य के जीवन को, हृदय को सुव्यवस्थित करने का एक उत्तम मार्ग है।
स्वामी जी ने कहा कि ईश्वर ने संगीत जैसी विलक्षण कला कुछ ही विशेष प्रतिभासम्पन्न लोगों को भेंट की है। इस ईश्वर प्रदत सौगात के माध्यम से हम प्रकृति, पर्यावरण और नदियों के संगीत को बनाये रखने के लिये भी योगदान प्रदान करें। उन्होने कहा कि गुरदास मान सचमुच पंजाब ही नहीं देश का मान है, युवा दिलों की धड़कन हैं।
श्री गुरदास मान ने रोटी, जोगिया, बूट पालिस, दिल दा मामला जैसे अनेक प्रसिद्ध संगीत एलबम दिये हैं स्वामी जी ने उन्हे प्ररित किया की वे प्रकृति के संगीत को; स्वच्छता के संगीत को; समरसता और सद्भाव के संगीत को; गंगा के संगीत को और देश की अन्य नदियों के संगीत को बनाये रखने के लिये भी एलबम निकाले। श्री मान ने इसे सहर्ष स्वीकार करते हुये कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज मेरे प्रेरणास्रोेत हैं, मैं यहां से उनका आशीर्वाद और नई प्रेरणा लेकर जा रहा हूँ।
श्री गुरदास मान और श्रीमती मनजीत मान ने परमार्थ निकेतन का भ्रमण, माँ गंगा का पूजन और परमार्थ निकेतन में होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने श्री गुरदास मान और श्रीमती मनजीत मान को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
.png)
एक टिप्पणी भेजें