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ऋषिकेश; 

सड़क परिवहन और राजमार्ग, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गड़करी और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने 
नीदरलैंड से आये जल प्रतिनिधिमंडल से भेंट वार्ता की। इस विशेष वार्ता में नीदरलैण्ड से आयी ,जल विशेषज्ञ ब्रिजित वैन बरेन, इनर सेंस की संस्थापक और मैरियन, प्रबन्ध निदेशक पीस प्लेज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती भी उपस्थित रही।
नीदरलैंड से आयी ब्रिजित वैन बरेन, इनर सेंस की संस्थापक और मैरियन, प्रबन्ध निदेशक पीस प्लेज ,जो विश्व स्तर पर जल संरक्षण, ऊर्जा, हेल्थ केयर, विश्व शान्ति के लिये कार्य कर रहे है। 
साथ ही अपने पूरे दल के साथ जल विशेषज्ञ ब्रिजित वैन बरेन, जल विशेषज्ञ मैरियन और इनके दल के सदस्य 12 वर्षो से जल की गुणवत्ता को बचाने के लिये कार्य कर रहे है। 
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने अपनी नीदरलैण्ड यात्रा के दौरान इस जल विशेषज्ञों के दल से मुलाकात कर जल की गुणवत्ता को बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विशद चर्चा की थी तथा पूरे दल को भारत आने का निमंत्रण दिया था। उसी कड़ी में यह दल भारत आया हुआ है। 

ब्रिजित वैन बरेन के दल की प्रथम बैठक परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती के साथ सम्पन्न हुयी। प्रयाग कुम्भ के विषय में दूसरी बैठक संसदीय कार्य, नगर विकास, शहरी समग्र विकास तथा नगरीय रोजगार मंत्री उत्तरप्रदेश सरकार, श्री सुरेश खन्ना के साथ सम्पन्न हुयी तथा आज एक महत्वपूर्ण बैठक श्री नितिन गड़करी के साथ सम्पन्न हुयी।

नीदरलैण्ड से आये दल ने अपनी तकनीक के विषय में बताया की जल के अणु एच-2 ओ अनन्त की संख्या में दूसरे एच-2 ओ अणु के साथ जुड़े होते है उन्होने जल के सबसे छोटी संरचना पर पडने वाले वाले प्रभाव, तथा जल के अणु का फल, सब्जियों, मृदा, प्राणी और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन अपनी मशीनों के माध्यम से किया। साथ ही स्वच्छ जल और प्रदूषित जल पर पराबैंगनी किरणों का प्रभाव का भी विशद अध्ययन किया। 
उन्होने वर्षो तक विकिरणों के प्रभाव का अध्ययन कर मशीनों का निर्माण किया जो की जल की गुणवत्ता को बनाये रखने हेतु कारगर है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि जल की गुणवत्ता में कमी का सम्बंध स्वास्थ्य से है। जल प्रदूषित होगा तो स्वास्थ्य भी प्रदूषित होगा, अनेक बीमारियां घेर लेती है और अरबो रूपये स्वास्थ्य समस्याओं के लिये खर्च करना पड़ता है। 

 उन्होंने मेले में एक ’जल संसद’ का आयोजन किया जायेगा जिसमें अनेक देशों के जल विशेषज्ञ सहभाग करेगे। जल की समस्या एक वैश्विक समस्या है ।इसलिये जल संगम पर जल संकट की समस्याओं पर किया जायेगा विचार।
स्वामी जी ने बताया कि अब जन क्रान्ति जल क्रान्ति बने इस पर कार्य करना होगा। साथ ही देश की सड़क व्यवस्था पर भी चर्चा हुई स्वामी जी ने कहा कि सड़के सुधरेगी तो संसाधन जुटेगे, यात्रा में समय कम लगेगा, डीजल और पेट्रोल को बचाया जा सकता है जिससे पर्यावरण का संरक्षण होगा। हमारे यहां चार धाम आॅल वेदर रोड़ तो बन रही है। अब आॅल पीओपल  रोड भी बने।
जिससे दिल्ली से कम से कम समय में हरिद्वार पहुंचा जा सके और उससे आगे चार धाम की यात्रा पर नरेन्द्र मोदी की 

 और महत्वपूर्ण योजना के अन्तर्गत श्री गड़करी से चर्चा हुयी।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि कुम्भ के दौरान हम संगम के तट पर स्टीमर के मध्य जल संगम और जल संरक्षण का संदेश देने वाला प्रतीक बनाये जिससे भारत सहित विश्व से आने वाले श्रद्धालुओं को जल के प्रति जागरूक किया जा सके। 

अब समय आ गया है कि पूरे विश्व के लिये एक ’’वाॅटर चार्टर’’ ;जल घोषणा पत्र तैयार किया जाये और इसमें भारत की अग्रणी भूमिका हो। भारत की पहल के साथ वाॅटर चार्टर को यूनाईटेड नेशन के मंच पर इसे रखा जाये तथा भारत के प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत यह घोषणा पत्र पूरे विश्व के लिये एक नवोदित पहल होगी। स्वामी जी महाराज ने वाॅटर चार्टर की प्रतिलिपि  नितिन गड़करी को भेंट करते हुये इसे आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती  ने कहा जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है। जिस वेग से जल प्रदूषित हो रहा है; जल की गुणवत्ता में कमी आ रही है इससे वैश्विक स्तर पर जल संकट की समस्यायें उत्पन्न हो सकती है।
 वर्तमान में भी प्रदूषित जल के कारण अनेक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अतः अब भी समय है जीवन से पहले जल के विषय में चिंतन करने का तभी हम जल की समस्या का समाधान कर सकते है।
इस अवसर पर  परमार्थ निकेतन से सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, नीदरलैण्ड से आये जल वैज्ञानिक टाल्फ, आचार्य दीपक शर्मा, कई अन्य जल अधिकारियों ने सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने नितिन गड़करी को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

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