नरेंद्र नगर;
वाचस्पति रयाल
श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की चौथी सांस्कृतिक संध्या उत्तराखंड गौरव से नवाजे गए लोक संस्कृति के फ्यूड्डल के जन्मदाता गायक कलाकार सारस्वत जे पंडित व गड़ गायक साहब सिंह रमोला के नाम रही।
फिल्मी व गढ़वाली लोकगीतों के जाने-माने गायक कलाकार सारस्वत जे पंडित ने दैणा होया खोली़ का गणेश से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए गढ़वाली लोक गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों की वाह- वाही लूटी। गढ़वाली लोक संस्कृति की विरासत बचाने को दृढ़ संकल्प लिए सारस्वत जे पंडित को लोक संस्कृति विरासत को अक्षु्ण बनाए रखने हेतु ध्वजवाहक के रूप में काम करने के लिए 2015 को सिंगापुर में तथा 2016 में उत्तराखंड गौरव से नवाजा गया, इसके बाद तो जे पंडित दुगने उत्साह के साथ अपने मिशन में जुट गए।
गढ़वाली लोक विरासत को जीवंत रखने की ठान चुके मूल रूप से देवप्रयाग के निवासी इस नौजवान कलाकार ने गढ़वाली लोकगीत"त्वैन चिट्ठी किलै नी भेजी" "फ्योंलडि़या त्वै देखीक औंदि या मन मा"धरती हमारा गढ़वाल की"फिल्मी गानों में "अा लगजा गले फिर ये हंसी रात हो ना हो"और "जो मैं ऐसा जानती"आदि गीतों को गाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
आशीष थापा, विशाल, रवि थापा, गौरव रतूड़ी ,अभिषेक, राहुल व अरविंद बिजल्वाण ने वाद्य यंत्रों पर अच्छी संगती दी।
वहीं गढ़वाली लोक गायक साहब सिंह रमोला और आकांक्षा रमोला एंड पार्टी ने नंदा राजजात वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए गढ़वाली लोकगीत "गेल्याणी तू सांसू करी मेवाड़ औण कू" "पाकी गैन ग्यों जौ कि सारी" "तितरा कि पांखी मेरी रोशना"तथा जौनसारी लोकगीत "फ्यूंली फुली"की लोक नृत्यों के साथ पेश प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक पांडाल में बांधे रखा।
कलाकार सूरज, शालिनी, मानसिंह, रवीना ,ज्योति, अखिलेश और सरगम रमोला ने जहां बेहतरीन कला का प्रदर्शन किया वहीं चंद्रपाल, गौरव मैठाणी व विकास चमोली ने वाद्य यंत्रों पर बेहतरीन संगति की।
कुलदीप कुंवर व दिगपाल रमोला दोनों ने अलग-अलग अपनी टीम के कार्यक्रमों का संचालन किया।
इस मौके पर मेला समिति के मुख्य संरक्षक व प्रदेश के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, मेला समिति के सचिव उप जिलाधिकारी लक्ष्मी राज चौहान, रेखा राणा, मुन्नी राणा, सरिता जोशी, पालिका के प्रीतम नेगी, राजपाल पुंडीर आदि गणमान्य व्यक्तियों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद उठाया।
.png)

एक टिप्पणी भेजें