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ऋषिकेश :
उत्तम सिंह

जर्जर  भवनों में पढ़नेवाले बच्चों पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उत्तराखण्ड  सरकार शिक्षा पर हर वर्ष लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रही है परन्तु इसके बावजूद बच्चों के शैक्षिक स्तर में न तो सुधार हो पा रहा है और न ही बच्चों के लिए स्कूलों में सुरक्षित छत मुहैया हो पा रही है। 
ऐसा ही  मामला  ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत साहबनगर मे  स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हालत मे  है। बरसात से छत और कमरों से पानी टपक रहा। जर्जर भवन में बच्चों का बैठना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की ओर से करीब छह माह पहले सूचना विभाग को दिए जाने के बाद भी अब तक इसकी सुध नहीं ली गई है। 
तब  ग्राम प्रधान ध्यान असवाल ने जर्जर भवन पर पढ रहे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुये सामुदायिक भवन मे स्थानांतरित करवा दिया है ।
करीब 20 साल पुराने इस स्कूल की पूरी बिल्डिंग जर्जर हो गई है। अब बरसात के दिनों में स्थिति और भी ज्यादा खराब है। छतों से पानी टपक रहा है। कई बार तो अधिक बारिश होने पर बच्चों को स्कूल से छुट्टी देनी पड़ जाती है। कमरों में जलभराव से बच्चों के बैठने की जगह नहीं बची।
दीवार और छत से पानी टपकने से टाट-पट्टी, बेंच, टेबल, ब्लैक बोर्ड और बच्चों के खेलने का सामान, आलमारी वगैरह खराब हो गए हैं। छत से प्लास्टर झड़ कर बच्चों के ऊपर गिर जाता है। इससे कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है। कमरों में पानी आने से सीलन और बदबू पैदा हो गई है। ऐसे में बच्चों के बीमार होने का खतरा भी बन रहा है। इस विद्यालय में इस वक्त 31 बच्चे पंजीकृत हैं जिनमें अधिकांश अनुसूचित जाति और जनजाति के हैं।
प्रधानाध्यापक सुदेश मैठानी ने बताया कि स्कूल भवन की जर्जर हालत की सूचना उच्च अधिकारियों को दी जा चुकी है। ग्राम प्रधान साहबनगर  ध्यान सिंह असवाल ने कहा है कि स्कूल की बिल्डिंग बच्चों के बैठने लायक नहीं है। जर्जर भवन से कभी भी हादसा हो सकता है।  अधिकारियों का इस समस्या से अवगत कराया गया है लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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