ऐसा ही उदाहरण पुष्कर के तीर्थ स्थल का है, जो राजस्थान में स्थित है. विश्व में ब्रह्मा जी के एकमात्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध पुष्कर राज और पुष्कर घाटी समेत नाग की पहाड़ियां पौराणिक भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म का जीता जागता स्मारक है.
इसी पुष्कर घाटी में नाग की पहाड़ियों से लेकर सुरंग भी बनाए जाने के लिए पी डब्लू डी द्वारासर्वेक्षण शुरू किया गया था, जो बाद में यह कहकर स्थगित कर दिया गया कि सुरंग की उपयोगिता नहीं है , इसलिए सुरंग के कार्य को वहीं रोक दिया गया। वैसे भी सुरंग को नाग पहाड़ को काट कर बनाया जाएगा। पुष्कर तीर्थ के ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्य में नाग पहाड़ का खास महत्व है। यदि नाग पहाड़ को चीर कर सुरंग बनाई गई तो यह हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं के विपरित होगा। अदालत से आग्रह किया गया कि सुरंग के सर्वे के कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। वाद में यह भी बताया गया कि प्राधिरकण की जिस बैठक में सर्वे का निर्णय लिया गया उसका कोरम भी पूरा नहीं था। यहां तक कि पुष्कर नगर पालिका के अध्यक्ष प्राधिकरण के आयुक्त, वरिष्ठ नगर नियोजक भी उपस्थित नहीं थे। प्राधिकरण अपनी आवासीय काॅलोनियों में पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। एक ओर सुरंग का सर्वे करवाया जा रहा है तो दूसरी पुष्कर घाटी में ही महाराणा प्रताप स्मारक और सांझी छत का निर्माण कर दिया गया है। यदि सुरंग बनाई जाती है तो यह दोनों स्थान प्रभावित होंगे।
पुनः सर्वे के लिए जो पुष्कर घाटी में सुरंग बनाने के लिए अजमेर विकास प्राधिकरण ने सर्वेक्षण किये जाने की शुरुआत की उसे रोकने के लिए अदालत में वाद दायर किया गया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या- 5 सीमा अग्रवाल ने 11 जुलाई को प्राधिकरण के अध्यक्ष, आयुक्त आदि को नोटिस जारी कर 17 जुलाई को तलब किया है।
इसी पुष्कर घाटी में नाग की पहाड़ियों से लेकर सुरंग भी बनाए जाने के लिए पी डब्लू डी द्वारासर्वेक्षण शुरू किया गया था, जो बाद में यह कहकर स्थगित कर दिया गया कि सुरंग की उपयोगिता नहीं है , इसलिए सुरंग के कार्य को वहीं रोक दिया गया। वैसे भी सुरंग को नाग पहाड़ को काट कर बनाया जाएगा। पुष्कर तीर्थ के ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्य में नाग पहाड़ का खास महत्व है। यदि नाग पहाड़ को चीर कर सुरंग बनाई गई तो यह हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं के विपरित होगा। अदालत से आग्रह किया गया कि सुरंग के सर्वे के कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। वाद में यह भी बताया गया कि प्राधिरकण की जिस बैठक में सर्वे का निर्णय लिया गया उसका कोरम भी पूरा नहीं था। यहां तक कि पुष्कर नगर पालिका के अध्यक्ष प्राधिकरण के आयुक्त, वरिष्ठ नगर नियोजक भी उपस्थित नहीं थे। प्राधिकरण अपनी आवासीय काॅलोनियों में पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। एक ओर सुरंग का सर्वे करवाया जा रहा है तो दूसरी पुष्कर घाटी में ही महाराणा प्रताप स्मारक और सांझी छत का निर्माण कर दिया गया है। यदि सुरंग बनाई जाती है तो यह दोनों स्थान प्रभावित होंगे।
पुनः सर्वे के लिए जो पुष्कर घाटी में सुरंग बनाने के लिए अजमेर विकास प्राधिकरण ने सर्वेक्षण किये जाने की शुरुआत की उसे रोकने के लिए अदालत में वाद दायर किया गया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या- 5 सीमा अग्रवाल ने 11 जुलाई को प्राधिकरण के अध्यक्ष, आयुक्त आदि को नोटिस जारी कर 17 जुलाई को तलब किया है।
श्याम सुंदर तापड़िया और केके शर्मा ने अपने वकील विवेक पाराशर के माध्यम से प्रस्तुत वाद में कहा है कि प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है जिसमें 168 करोड की सुरंग का निर्माण करवाया जा सके। प्राधिकरण के बैंक खाते में मात्र 10 करोड़ रुपए जमा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन बांटने के लिए भी पर्याप्त राशि नहीं है। ऐसे में सुरंग के सर्वे पर दो करोड़ रुपए खर्च किया जाना उचित नहीं है। अदालत को बताया गया कि पूर्व में सुरंग के सर्वे के लिए ई-टेंडर किए गए उसमें किसी भी कंपनी ने आवेदन नहीं किया। बाद में प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा ने अपने स्तर पर चार चुनिंदा कंपनियों को पत्र लिखा। इनमें से दो कंपनियों का चयन करने के बाद एक कंपनी को सर्वे के लिए चयनित किया गया। प्राधिकरण सर्वे पर दो करोड़ रुपए की राशि खर्च करने जा रहा है। जबकि पूर्व में पीडब्ल्यूडी ने सुरंग का सर्वे किया हुआ है ।
ऐसे में यह सवाल लाज़मी है कि भारत के प्रधानमंत्री देश के पुरातात्विक स्थानों के संरक्षण की बात कह रहे है दूसरी और राजे सरकार में पुष्कर राज की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह दिखाई पड़ रहे है.
साभार एस.पी.मित्तल
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