भूपेंद्र भंड़ारी:
शहर के गन्दे नालों को टेप करने में रुद्रप्रयाग जनपद अभी तक अन्य जिलों के मुकाबले फिसड्डी चल रहा है। शहर के 8 नालों को टेप कर 6 सीवर टैंकों में डाला जाना था ।
मगर अभी तक एक भी नाला टेप नहीं हो पाया है। कार्य की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने सीवर टैंकों का स्वयं निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और शीघ्र टैंकों का निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये।
रुद्रप्रयाग के विभिन्न कस्बों के गन्दे नाले सीधे अलकनंदा में गिरते हैं जिसके लिए नमामि गंगे योजना के तहत 6 टैंक प्रस्तावित हैं ।
मगर अभी तक महज तीन टैंकों पर ही निर्माण कार्य चल रहा है वो भी धीमी गति से। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के बाद बताया कि तीन टैंकों का निमार्णकार्य करीब ढेड माह में पूरा हो जायेगा और अन्य तीन टैंकों के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा समय मांगा गया है। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था को कडे निर्देश दिये गये हैं शीघ्र ही अन्य टैंकों का भी निर्माण कार्य पूर्ण किया जायेगा ।
मगर अभी तक एक भी नाला टेप नहीं हो पाया है। कार्य की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने सीवर टैंकों का स्वयं निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और शीघ्र टैंकों का निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये।
रुद्रप्रयाग के विभिन्न कस्बों के गन्दे नाले सीधे अलकनंदा में गिरते हैं जिसके लिए नमामि गंगे योजना के तहत 6 टैंक प्रस्तावित हैं ।
मगर अभी तक महज तीन टैंकों पर ही निर्माण कार्य चल रहा है वो भी धीमी गति से। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के बाद बताया कि तीन टैंकों का निमार्णकार्य करीब ढेड माह में पूरा हो जायेगा और अन्य तीन टैंकों के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा समय मांगा गया है। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था को कडे निर्देश दिये गये हैं शीघ्र ही अन्य टैंकों का भी निर्माण कार्य पूर्ण किया जायेगा ।
साथ ही मंदाकिनी के किनारे बसे तिलवाडा, चन्द्रापुरी व गुप्तकाशी शहर के गंदे नालों को टेप करने के लिए डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है और स्वीकृति मिलने के तुरंत बाद यहां पर भी निर्माण कार्य पूरा कर लिया जायेगा। वहीं रुद्रप्रयाग शहर में अभी तक भी सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लांट तैयार नहीं हो पाया है। जिसके चलते कई स्थानों पर सीवरेज का दूषित पानी सीधे नदियों में गिर रहा है। वहीं अब सिंचाई विभाग द्वारा प्लांट के निर्माण को लेकर डीपीआर भेजी जा चुकी है और स्वीकृति के बाद शहर के सीवरेज का ट्रीटमेंट
हो पायेगा।
पुनाड गदेरे में चला स्वछता अभियान--
स्वच्छ भारत अभियान के तहत सरकारें चाहे कितने भी कार्यक्रम आयोजित कर ले मगर अभियान का लोकव्यापीकरण नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते अधिकारी कर्मचारियों को ही अभियान की सफलता के लिए गंदे नालों में स्वयं उतरना पड रहा है । साथ ही कुन्तलों गंदगी को साफ करना पड रहा है बडी बात यह है कि इन सब कार्यक्रमों में जनता महज तमाशबीन ही बनी रहती है।
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