सत्यवाणी परिवार की और हरेला पर्व की शुभकामनाएं--
लाग हरेला, लाग बग्वाई,
जी रए, जाग रए.
स्याव जस बुद्धि हैजो, सूर्ज जस तरान है जै
आकाश बराबर उच्च है जै,
धरती बराबर चकाव है जै
दूब जस फलिये
हिमाल में ह्यूं छन तक, गंग ज्यू में पानी छन तक
सिल पिसि भात खाये, जांठि टेकि झाड़ जाये!!
जी रए, जाग रए.
स्याव जस बुद्धि हैजो, सूर्ज जस तरान है जै
आकाश बराबर उच्च है जै,
धरती बराबर चकाव है जै
दूब जस फलिये
हिमाल में ह्यूं छन तक, गंग ज्यू में पानी छन तक
सिल पिसि भात खाये, जांठि टेकि झाड़ जाये!!
चंहु और हरियाली और जीवन मे उमंग -तरंग का नाम है हरेला पर्व। आप भी इसमें सहभागी बनिये, एयर हरियाली फैलाने में सहायक बनिये। वृक्षारोपण कीजिये।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हरेला पर्व हमारी लोक संस्कृति, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ जुडाव का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को महत्व देने की हमारी परम्परा रही है। प्रकृति के विभिन्न रूपों की हम पूजा करते है। हमारी इन परम्पराओं का वैज्ञानिक आधार भी है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हमारे लोकगीत तथा पर्व भी प्रकृति प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं तथा हमें जीवन कैसे जीना चाहिए इसका मार्गदर्शन भी करते है। मुख्यमंत्री ने कहा की हरेला हरियाली तथा ऋतुओं का पर्व है हमें प्रकृति संरक्षण व प्रेम की अपनी संस्कृति, तथा उत्सवों को मनाये जाने की परम्परा को बनाए रखना होगा।
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