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रायवाला;

रिपोर्ट अंजना गुप्ता और उत्तम सिंह

कहा जा रहा है कि आदमखोर गुलदार को वन कर्मियों ने मार गिराया, परंतु वन विभाग द्वारा इस बात की पुष्टि की गई है कि
  रायवाला में आतंक का पर्याय बने  नरभक्षी गुलदार कोई एक नही एक से अधिक हो सकतें है।
  उन्होंने बताया ,  जो गुलदार वन विभाग की टीम द्वारा मार   गिराया गया है, वह एक मादा गुलदार  जो शिकार करने में अक्षम थी  एक पैर  भी  खराब था।उसके नाखून घिसे हुए थे । और उसमे आदमखोर होने के सबूत मिले है। जानकारी के मुताबिक तडके करीब 3:30 बजे मोतीचूर रेज के समीप खाण्डगांव के पास के जगल मे गुलदार को  पार्क मे  तैनात टीम ने मार गिराया ।  बता दे ,आदमखोर गुलदार को मारने के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम पिछले 2 महीनों से शिकारियों के साथ मोतीचूर रेंज में डेरा डाले हुई थी।

 बताया जा रहा है कि क्षेत्र में आदमखोर गुलदार पिछले चार  साल में 21 लोगों को अपना निवाला बना चुके है।
 राजा जी पार्क के निदेशक श्री सनातन सोनकर ने बताया कि नेपाल फार्म, प्रतीतनगर, खंडगांव से लेकर सत्यनारायण मंदिर तक, 10 वर्ग किमी के (10लगभ्ग 100 हेक्टेयर ) के क्षेत्र में आदमखोर गुुलदार सक्रिय है। राजाजी पार्क र्मोतीचूर रेंज से सटे क्षेत्र रायवाला, प्रतीत नगर, छिद्दरवाला, हरिपुर कला और रायवाला डांडी में  सक्रिय आदमखोर गुलदारों की संख्या  लगभग  13  है. जिनमे से 05 को पकड़ा जा चुका है,03  को   
ट्रेंकुलाइज करने के बाद चिड़ियापुर रेंज में छोड़ा गया है  और 02 गुलदार में डीएनए मैच हुआ है. इनके अतिरिक्त कैमरा ट्रैपिंग में 08 गुलदार और है,जिन पर आदमखोर होने का शक है। इनमे  नर और मादा दोनों गुलदार है।  भोजन के लिए ये उपरोक्त क्षेत्र में भ्रमण करते है और टुकड़ों में बटें हुए जंगल भी इनके क्षेत्र है।
 ऐसी स्थिति में मानव द्वारा जंगल में बनाये गए आशियाने इनके सॉफ्ट टारगेट होते है. कुछ अक्षम गुलदार भी है, और कुछ वृद्ध भी जो अपना  शिकार प्राप्त करने के लिए अधिक संघर्ष नहीं कर पाते , उनकी सहायता अन्य गुलदार करते है. वे मानव शिकार कर  उन्हें भोजन मुहैया कराते है ,जिस कारण वे भी आदमखोर हो गए है।
 उन्होंने बताया वन विभाग ने जंगल में लगाए गए सभी कैमरों पर नज़र रखे हुए है। कुछ स्थानों पर जहाँ सम्भव है फेंसिंग भी की गयी है. परन्तु , जंगल के फ़्रैगमेन्ट्स में होने के कारण  गुलदारों को जल्दी ट्रैप करना सम्भव नहीं हो पाता।

पार्क निदेशेक का मानना है कि जंगल मे मानव का अत्यधिक हस्तक्षेप और अतिक्रमण  जंगली जीवों और मानव के मध्य संघर्ष का कारण है। गुलदारों को बहुत जल्दी पकड़ लेना नितांत मुश्किल है, परंतु असम्भव नही। तब तक क्षेत्रीय लोगों के सहयोग की अपेक्षा आवश्यक है।


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