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-वार्ड व ओपीडी से सीधे लैबारेटरी में जांच के लिए पहुंच जाएगा सैंपल

-कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा देने की प्रतिबद्धता दोहराई

डोईवाला:
 स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वामी राम नगर स्थित एसआरएचयू- हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट ने एक ओर महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने हॉस्पिटल में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानक व अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित न्यूमैटिक ट्यूब सिस्टम सेवा व दवाई के लिए कल्पतरू सेंटर का उद्घाटन किया। न्यूमैटिक ट्यूब के जरिये एक से तीन मिनट के भीतर ही जांच सैंपल लैब में पहुंच जाएगा।

शुक्रवार को कुलपति डॉ.विजय धस्माना ने हिमालयन हॉस्पिटल में न्यूमैटिक ट्यूब सिस्टम का उद्घाटन किया। इस मौके पर डॉ. धस्माना ने मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। देश के चुनिंदा हायर सेंटर हॉस्पिटलों में से हिमालयन हॉस्पिटल में अब न्यूमैटिक ट्यूब सिस्टम की सुविधा मौजूद है। मरीजों की लैब से संबंधित रिपोर्ट में मिलने में समय और त्रुटि की संभावना कम हो जाएगी। इसी के साथ मरीजो की सुविधा को देखते हुए दवाई के लिए कल्पतरू के नए स्टोर का भी उद्घाटन किया। हॉस्पिटल में करीब 300 बेड के नए अत्याधुनिक ओपीडी भवन का निर्माण कार्य भी जारी है। अगले चरण में कैंसर रिसर्च इंस्टिट्यूट में न्यूमैटिक सुविधा शुरू की जाएगी। हिमालयन सेंट्रल डायग्नोस्टिक एंड रिसर्च लैबरोट्ररी के विभागाध्यक्ष डॉ. डीएस गौड़ व डॉ.विकास श्रीवास्तव ने बताया कि बताया कि हॉस्पिटल के सभी हिस्सों को इस सुविधा से जोड़ दिया गया है। सैंपल कलेक्शन के लिए हॉस्पिटल में करीब 13 स्टेशन बनाए गए हैं। दो से तीन वार्ड को प्रत्येक स्टेशन जोड़ा गया है। करीब 300 टेस्ट के सफल परीक्षण के बाद इस हाईटेक सेवा को शुरू किया गया। इस दौरान प्रतिकुलपति डॉ.विजेंद्र चौहान, चिकित्सा अधीक्षक डॉ.वाईएस बिष्ट, डॉ.डीसी धस्माना, डॉ.संजॉय दास, डॉ. डीएस गौड़, डॉ.विकास श्रीवास्तव, डॉ.अनुराधा कुसुम, अमरेंद्र कुमार, उनियाल, राजपाल रावत, रोशन नौगाईं आदि मौजूद रहे।
क्या है न्यूमैटिक ट्यूब सिस्टम:
अस्पताल में भर्ती मरीजों के खून, पेशाब, या अन्य तरह के सैंपल को जांच के लिए पहले एक तरह के रिजेंट में सुरक्षित रखकर उसे पैरामेडिकल स्टॉफ या लैब तकनीशियन की मदद से लैब तक पहुंचाया जाता था। ट्यूब व्यवस्था में एक तरह के मोटे पाइप के जरिए सैंपल रखा जाता है, जिसकी फीटिंग इमरजेंसी से होते हुए वार्ड तक होती है। बारकोडिंग कर मरीज के सैंपल को ट्यूब में रखा जाता है।

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