नई टिहरी/बौराड़ी :
जहाँ राज्य एवं केन्द्र सरकार ने समस्त महिलाओं खासतौर से नौकरीपेशा महिलाओं के प्रसव और बच्चे की देखभाल हेतु छुटियों का प्रावधान किया है, वहीँ एक चिकित्साधिकारी अपने पद का दुरूपयोग कर कर्मचारी को प्रसव के नज़दीक आने पर भी छुटियाँ नही दे रहे है.
मामला जिला चिकित्सालय बौराड़ी का है, जहाँ महिला N.H.M. के अंतर्गत संविदा पर 3 साल से कार्य कर रही है.उक्त महिला को उच्च अधिकारी ने अनफिट करार देते हुए प्रसव हेतु छुट्टी देने को इंकार कर दिया है.
आलम तो ये है की निदेशक एन आर एच ऍम और उच्च शिक्षा मंत्री के द्वारा आदेश दिए जाने पर भी अधिकारी को कोई असर नहीं है. एक महिला को मातृत्व अवकाश के लिए भी सिफारिश लगानी पड़ रही है, कितने शर्म की बात है की उत्तराखण्ड जैसे देवभूमि प्रदेश में महिलाओं के और अजन्मे बच्चे के अधिकार का हनन हो रहा है. महिला प्रसव की तारीख नज़दीक आने पर अत्यंत डरी हुई भी है, की आखिर क्या करे?
जहाँ राज्य एवं केन्द्र सरकार ने समस्त महिलाओं खासतौर से नौकरीपेशा महिलाओं के प्रसव और बच्चे की देखभाल हेतु छुटियों का प्रावधान किया है, वहीँ एक चिकित्साधिकारी अपने पद का दुरूपयोग कर कर्मचारी को प्रसव के नज़दीक आने पर भी छुटियाँ नही दे रहे है.
मामला जिला चिकित्सालय बौराड़ी का है, जहाँ महिला N.H.M. के अंतर्गत संविदा पर 3 साल से कार्य कर रही है.उक्त महिला को उच्च अधिकारी ने अनफिट करार देते हुए प्रसव हेतु छुट्टी देने को इंकार कर दिया है.
आलम तो ये है की निदेशक एन आर एच ऍम और उच्च शिक्षा मंत्री के द्वारा आदेश दिए जाने पर भी अधिकारी को कोई असर नहीं है. एक महिला को मातृत्व अवकाश के लिए भी सिफारिश लगानी पड़ रही है, कितने शर्म की बात है की उत्तराखण्ड जैसे देवभूमि प्रदेश में महिलाओं के और अजन्मे बच्चे के अधिकार का हनन हो रहा है. महिला प्रसव की तारीख नज़दीक आने पर अत्यंत डरी हुई भी है, की आखिर क्या करे?
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