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गतवर्ष की गई थी अब तक के सबसे वजनदार बोन ट्यूमर की सफलतम सर्जरी

मरीज के पैर की जांघ से 35 किलोग्राम भार का ट्यूमर हटाकर दिया था जीवनदान

 

AIIMS Rishikesh Guiness world record

एम्स, ऋषिकेश के चिकित्सकों ने दुनियाभर के चिकित्सकीय इतिहास में अब तक के सबसे वजनदार बोन ट्यूमर की सफलतम सर्जरी कर विश्व पटल पर देश एवं एम्स संस्थान का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि के लिए संस्थान की चिकित्सकीय टीम का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। विभिन्न विभागों के चिकित्सकीय दल ने उक्त सर्जरी को गतवर्ष जून-2025 में सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। 

इस ऐतहासिक उपलब्धि पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे इतिहास गढ़ने की संज्ञा दी और कहा कि एम्स संस्थान मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। 


गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश में 9 जून 2025 को संस्थान के वरिष्ठ शल्य चिकित्सकों की टीम द्वारा यह जटिल सर्जरी की गई थी, जिसमें एक 27 वर्षीय व्यक्ति के बाएं पैर की जांघ से लगभग 35 किलोग्राम के भारी ट्यूमर को सर्जरी की मदद से हटाने में सफलता हासिल की गई थी। इस जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम देने वाले ऋषिकेश एम्स संस्थान के चिकित्सकों की इस टीम में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहित धींगरा, सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अंशुमान दरबारी एवं बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुवरी वाथुल्या प्रमुखरूप से शामिल रहीं।

संस्थान की ओर से इस सबसे अधिक वजनी ट्यूमर की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिए जाने के बाद चिकित्सकीय दल की इस उपलब्धि से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस प्रकाशन को अवगत कराया गया था। जिसके बाद इंग्लैंड, लंदन से प्रकाशित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस, (जो कि विश्वभर में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के उपलब्धिपूर्ण कार्यों के संग्रह व उसके प्रकाशन से दुनिया को अवगत कराने वाली महत्पूर्ण बुक है,) की ओर से इस जानकारी का संज्ञान लिया गया और अपने स्तर से परीक्षण किया गया।

बताया गया है कि, परीक्षण में उक्त जानकारी सही पाए जाने पर एम्स,ऋषिकेश में अब तक के सबसे अधिक वजनदार बोन ट्यूमर की जटिलतम सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली चिकित्सकीय टीम की उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्णय लिया गया। 

इसके लिए एम्स, ऋषिकेश की चिकित्सकीय टीम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रशस्तिपत्र से नवाजा गया है।

उल्लेखनीय है कि 35 किलोग्राम के सबसे अधिक वजनी बोन ट्यूमर की सफल शल्य चिकित्सा 9 जून- 2025 को एम्स ऋषिकेश में की गई थी, जबकि इससे पूर्व भारत के ही चिकित्सकों के एक दल ने वर्ष 2002 में उस वक्त के सबसे अधिक वजनी 16.5 किलोग्राम के ट्यूमर की सर्जरी की थी।

पहले बैच का प्रवेश परिणाम जारी, 30 छात्राओं का चयन


देहरादून/लोहाघाट::

first women sports college of India, uttarakhand rekha arya sports min8ster


 उत्तराखंड के चम्पावत जिले के लोहाघाट में स्थापित देश के पहले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज ने अपने ऐतिहासिक सफर की शुरुआत कर दी है, जहां प्रथम सत्र के लिए आयोजित चयन परीक्षा का परिणाम जारी होने के साथ ही देश-प्रदेश की 30 प्रतिभावान बालिकाओं का चयन किया गया है।


 इस बड़ी उपलब्धि पर प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चयनित छात्राओं और उनके अभिभावकों को दिल की गहराइयों से बधाई और आशीर्वाद दिया है। चयन परिणाम जारी होने के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने एक बयान जारी कर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा कि आज वह एक कैबिनेट मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि देवभूमि की हर उस बेटी की मां और बहन के रूप में अत्यंत भावुक और गौरव से भरी हुई हैं। 


खेल मंत्री ने कहा कि खेल के मैदान में अपनी चमक बिखेरने की चाह रखने वाली हमारी बेटियों के लिए जो सपना उन्होंने देखा था, आज वह धरातल पर उतरकर साकार हो रहा है। उन्होंने इस शुरुआत को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह महज एक छोटा सा कदम नहीं है, बल्कि खेल की दुनिया में हमारी 'आधी आबादी' के सुनहरे भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक छलांग है।



खेल मंत्री ने आगे कहा कि यह पूरे भारत का पहला ऐसा समर्पित महिला स्पोर्ट्स कॉलेज है, जो सिर्फ और सिर्फ हमारी बेटियों के खेल कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाने का काम करेगा। उत्तराखंड के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में खेल के प्रति रुचि रखने वाली प्रतिभावान बालिकाओं को अब अपनी परिस्थितियों और प्रतिभा से कोई समझौता नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब एक ही छत के नीचे मिलेगी। 


उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि इस कॉलेज से तराश कर निकलने वाली बेटियां आने वाले समय में ओलंपिक, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराकर देश व प्रदेश का मान बढ़ाएंगी। पहले बैच में चयनित इन 30 बेटियों की मेहनत और लगन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेगी। 


खेल मंत्री ने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि यह तो बस शुरुआत है, हमारी बेटियां अब रुकेंगी नहीं, थकेंगी नहीं... वे दौड़ेंगी, खेलेंगी और पूरी दुनिया पर छा जाएंगी।

 देहरादून:

MDDA rajpur road


नक्शा स्वीकृत कराए बिना चल रहा था निर्माण, हुई कार्रवाई


 राजधानी के सबसे पॉश और वीआईपी क्षेत्र राजपुर रोड स्थित जाखन में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन निर्माणाधीन डुप्लेक्स भवनों को सील कर दिया जाखन स्थित थापा निवास वाली गली में कपिल कपूर द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति के तीन डुप्लेक्स भवनों का निर्माण कराया जा रहा था। विभाग को लगातार मिल रही शिकायतों और निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद इस निर्माण को चिन्हित किया गया था। नियमानुसार किसी भी आवासीय या व्यावसायिक भवन के निर्माण से पूर्व प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है, लेकिन संबंधित निर्माणकर्ता ऐसा करने में विफल रहा।


*बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं रुका निर्माण*


प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि निर्माणकर्ता को कई बार नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने और निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे। क्षेत्रीय अधिकारियों एवं अभियंताओं द्वारा मौके पर निरीक्षण कर निर्माण कार्य बंद कराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन निर्देशों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया। इसके बाद एमडीडीए ने सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया। एमडीडीए के संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के निर्देश पर अवर अभियंता सचिन तोमर, अवर अभियंता उमेश वर्मा एवं क्षेत्रीय सुपरवाइजर के नेतृत्व में विशेष टीम मौके पर पहुंची। टीम ने निर्माणाधीन तीनों डुप्लेक्स परिसरों को आधिकारिक रूप से सील कर दिया। साथ ही मौके पर मौजूद श्रमिकों को बाहर निकालकर निर्माण कार्य पूरी तरह बंद करा दिया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सील से किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ  कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा शहर के नियोजित विकास में बाधा बनने वाले किसी भी निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा।


*अवैध निर्माण पर नहीं होगी कोई रियायत : बंशीधर तिवारी*


एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून, क्षेत्रों में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित निर्माणकर्ता को पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन नियमों का पालन नहीं किया गया। शहर के नियोजित विकास से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा और बिना मानचित्र स्वीकृति के किए जा रहे निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, नियमों का उल्लंघन करने पर भवन सील या ध्वस्त किया जाएगा।


*अवैध निर्माणों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही:- मोहन सिंह बर्निया*


एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जाखन में की गई कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद अवैध निर्माण जारी रखना गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में देहरादून के अन्य क्षेत्रों में भी बिना मानचित्र स्वीकृति के चल रहे निर्माणों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।


*श्री बदरीनाथ धाम चढ़ावा प्रकरण की जांच के आदेश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई : बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी* 

 *तथ्यों की पुष्टि से पहले भ्रामक आरोपों से बचें : मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़* 


श्री बदरीनाथ धाम/ देहरादून: 




श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी)  अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि सोशल मीडिया में श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे एवं दान में कथित हेराफेरी के संबंध में जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें मंदिर समिति ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच के लिए जांच समिति गठित करने के आदेश दे दिए गए हैं। तथा स्पष्टीकरण तलब किया गया है।जांच पूर्ण होने के उपरांत यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


 *बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि सोशियल मीडिया में जिस कर्मचारी को उनका "निजी सचिव" बताया जा रहा है, वह उनका कोई निजी सचिव नहीं है। संबंधित कर्मचारी श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का नियमित  सरकारी कर्मचारी है तथा वैयक्तिक सहायक के रूप में पूर्व में भी मंदिर समिति के तीन  अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। इसलिए सोशल मीडिया में उसके संबंध में प्रसारित किये जा रहे आरोप सही पाये जाते है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी* 


इधर, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर से संबंधित जो प्रकरण गत 2 जुलाई शाम  से सोशियल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें प्राप्त कथित शिकायत के आधार पर बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की आज जांच करायी  गयी है। उपलब्ध फुटेज में अपेक्षित स्पष्टता नहीं है, फिर भी विषय की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मामले से बीकेटीसी अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है।


मुख्य कार्याधिकारी ने बताया कि अध्यक्ष के निर्देशों के अनुपालन में संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। साथ ही मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति गठित किए जाने संबंधी आख्या अध्यक्ष को प्रेषित की जा रही है। 

समिति गठित होने के बाद वह सभी तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों एवं संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई प्रतिकूल तथ्य या अनियमितता संज्ञान में आती है तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप दोषियों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।


मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि यह प्रकरण उत्तराखंड के विश्वविख्यात एवं करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री बदरीनाथ धाम से जुड़ा हुआ है। इसलिए जब तक किसी भी आरोप की विधिवत जांच के माध्यम से पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार के अपुष्ट अथवा भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए। सभी से अपेक्षा है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संयम बरतें, ताकि पवित्र धाम की गरिमा एवं छवि पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

 *नियुक्ति पत्र जनसेवा का संकल्प और सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास का प्रतीक : मुख्यमंत्री


appointment letter to  UkPSC selecteed ccaandidates


 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 में चयनित 182 अभ्यर्थियों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में वैयक्तिक सहायक के पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल सरकारी सेवा में प्रवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, अपेक्षाओं और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था तथा 71 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिनमें से केवल 182 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा, कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पद का अर्थ शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यालय में सम्मान, विश्वास और समयबद्ध समाधान का अनुभव होना चाहिए।


मुख्यमंत्री  ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की है। आज 187 और युवाओं के इस अभियान से जुड़ने के साथ राज्य सरकार की युवा हितैषी प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक युवा को उसकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को राज्य से बाहर जाने के लिए विवश न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी, दोनों को उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस संकल्प को साकार करने में नवचयनित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने का दायित्व अधिकारियों और कर्मचारियों का होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने वाले प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर संविधान, कानून और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।


इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, श्री रामसिंह कैड़ा, विधायक श्रीमती सविता कपूर, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति कोटिया,  प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री दिलीप जावलकर, श्री रविनाथ रमन, श्री चंद्रेश कुमार, श्री बृजेश कुमार संत, श्री विनय शंकर पांडेय, श्री एस.एन. पाण्डेय, डीजी होमगार्ड डॉ. पी. वी. के प्रसाद, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री अभिनव कुमार, एडीजी श्री डॉ. वी. मुरुगेशन, अपर सचिव श्री नवनीत पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

देहरादून, 

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मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों और मानचित्र स्वीकृति के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार को व्यापक कार्रवाई की। प्राधिकरण की टीम ने ऋषिकेश क्षेत्र में बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे एक बड़े निर्माण को सील किया, जबकि देहरादून के राजपुर, जाखन, पुरकुल, डीआईटी मालसी समेत विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर नियमों के उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी दी। यह कार्रवाई उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर की गई। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि विकास क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाये। 


*ऋषिकेश में बिना स्वीकृति बन रही इमारत सील*

एमडीडीए के अभियान के दौरान ऋषिकेश क्षेत्र में निर्मल ब्लॉक-बी, निकट द गंगाज में भवन स्वामी जखमोलो द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति के किए जा रहे बड़े अवैध निर्माण पर कार्रवाई की गई। प्राधिकरण की टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान पाया गया कि निर्माण कार्य प्राधिकरण की अनुमति के बिना किया जा रहा था। नियमों के स्पष्ट उल्लंघन को देखते हुए एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को सील कर दिया। सीलिंग की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार संपन्न कराई गई ताकि भविष्य में किसी प्रकार का अवैध निर्माण आगे न बढ़ सके। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौजूद रहा। 


*राजपुर, जाखन, पुरकुल और मालसी क्षेत्रों में चला निरीक्षण अभियान*

एमडीडीए ने केवल सीलिंग तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि देहरादून के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में भी विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर संयुक्त सचिव गौरव चटवाल ने राजपुर, जाखन, पुरकुल, डीआईटी मालसी तथा आसपास के क्षेत्रों में निर्माणाधीन भवनों का स्थलीय निरीक्षण किया निरीक्षण के दौरान विभिन्न निर्माण स्थलों पर जाकर स्वीकृत मानचित्रों और वास्तविक निर्माण कार्यों का मिलान किया गया। कई स्थानों पर निर्माणकर्ताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, जबकि स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण कार्य पाए जाने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए। संयुक्त सचिव गौरव चटवाल ने कहा जिन निर्माणों के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है अथवा स्वीकृत नक्शे से हटकर निर्माण किया जा रहा है, उनके विरुद्ध उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे अभियान में क्षेत्रीय अवर अभियंता सचिन तोमर, सिद्धार्थ सेमवाल, विदिता कुमारी व पवन भट्ट तथा सुपरवाइजर के साथ संबंधित अन्य कर्मचारीशामिल रहे। 


*अवैध निर्माणों पर लगातार जारी रहेगा अभियान*

प्राधिकरण का उद्देश्य सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करना तथा नागरिकों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण गतिविधियों को नियमानुसार संचालित करना है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों, बिना स्वीकृति के भवन निर्माण और मानचित्र के विपरीत किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। 


*निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक स्वीकृतियां आवश्य ले- बंशीधर तिवारी* 

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि लगातार निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान चलाकर ऐसे निर्माणों की पहचान की जा रही है जो बिना मानचित्र स्वीकृति अथवा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में की गई सीलिंग कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि सभी भवन स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को नियमों का पालन करना चाहिए तथा निर्माण शुरू करने से पहले आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। 



*निर्माण गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है- मोहन सिंह बर्निया* 

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने देहरादून के नागरिकों से अपील की कि भवन निर्माण से पूर्व सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही निर्माण कार्य कराएं। इससे अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकेगा तथा क्षेत्र का नियोजित विकास सुनिश्चित होगा।

देहरादून:

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राज्य में आपदा के समय स्थानीय स्तर पर त्वरित एवं प्रभावी राहत कार्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से SDRF वाहिनी मुख्यालय, जॉलीग्रांट में हरिद्वार जनपद के 54 आपदा मित्रों के लिए आयोजित 12 दिवसीय आपदा प्रबंधन के मूलभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण 22 जून 2026 से प्रारम्भ हुआ था।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसमें मूलभूत आपदा प्रबंधन, मेडिकल फर्स्ट रेस्पांडर, फ्लड रेस्क्यू, सर्च एंड रेस्क्यू, CBRN (Chemical, Biological, Radiological & Nuclear) तथा CSSR (Collapsed Structure Search & Rescue) सहित विभिन्न आपदा परिस्थितियों में प्रभावी कार्यवाही की तकनीकों का प्रशिक्षण शामिल रहा।


समापन समारोह के अवसर पर सेनानायक SDRF श्री अर्पण यदुवंशी ने कहा कि "आपदा के समय सबसे पहले स्थानीय नागरिक ही सहायता के लिए आगे आते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित आपदा मित्र किसी भी आपदा की प्रारम्भिक अवस्था में अमूल्य भूमिका निभाते हैं। यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण एवं मानवीय संवेदनाओं को भी सुदृढ़ करता है। आशा है कि सभी प्रशिक्षित आपदा मित्र अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर प्रभावी राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान देंगे।"

प्रशिक्षण के समापन पर सभी प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर शुभकामनाएँ दी गईं तथा भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया गया।

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