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वित्त आयोग ने सराहा उत्तराखंड का वित्तीय प्रबंधन*

*वित्त आयोग की टीम ने निकायों, त्रिस्तरीय पंचायतों और राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से लिए सुझाव*



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 16वें वित्त आयोग की टीम, ने सोमवार को आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में नगर निकायों, त्रिस्तरीय पंयायतों और राजनैतिक दलों के साथ विचार विमर्श किया। 

देहरादून के एक स्थानीय होटल  में आयोजित इस बैठक में आयोग सदस्य श्रीमति एनी जॉर्ज मैथ्यू, श्री मनोज पांडा, श्री सौम्या कांतिघोष आयोग के सचिव श्री ऋत्विक पांडे, संयुक्त सचिव श्री केके मिश्रा, संयुक्त निदेशक सुश्री पी अमरूथावर्षिनी शामिल हुए। 



*01 - निकाय प्रमुखों ने उठाई स्वच्छता के लिए अतिरिक्त आवंटन की मांग*   


प्रथम सत्र में कुल आठ नगर निकाय प्रमुखों ने आयोग के सामने अपने प्रस्ताव रखे। निकाय प्रमुखों ने उत्तराखंड में तीर्थाटन और पयर्टन गतिविधियों को देखते हुए पार्किंग, साफ सफाई, सीवरेज जैसे मद में अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की मांग उठाई। मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल ने कहा कि पयर्टन और एजुकेशन हब के कारण देहरादून को अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा ने कहा कि सिडकुल होने के कारण रुद्रपुर में प्रतिदिन करीब पचास हजार फ्लोटिंग आबादी का आवागमन रहता है। प्रतिदिन निकलने वाले वाले ढाई लाख टन कूड़े के निस्तारण के लिए भी निगम को पर्याप्त सहायता चाहिए। अल्मोड़ा के मेयर अजय वर्मा ने अल्मोड़ा को हैरिटेज शहर के रूप में विकसित करने के लिए सहायता की मांग उठाई। हरिद़वार मेयर किरण जैसल ने तीर्थाटन को देखते हुए अतिरिक्त बजट की मांग उठाई। मसूरी पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने पार्किंग सुविधा विकसित करने और ग्रीन बोनस पर जोर दिया। पौड़ी नगर पालिका अध्यक्ष हिमानी नेगी ने सीवर लाइन की मांग उठाई। बागेश्वर नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण लागत ज्यादा आने से बजट बढ़ाने की मांग की। अगस्तमुनि नगर पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र पंचायत गोस्वामी ने पार्किंग सुविधा बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में सचिव श्री नितेश झा, नगर आयुक्त देहरादून श्रीमती नमामि बंसल शामिल हुईं।  


*02 - क्षेत्र के आधार पर मिले पंचायतों को फंड* 

त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने बजट आवंटन में क्षेत्रफल को मुख्य आधार बनाने की पैरवी की। जिला पंचायत देहरादून की प्रशासक मधु चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए बजट आवंटन बढ़ाया जाए। पिथौरागढ़ की जिला पंचायत प्रशासक दीपिका बोरा ने कहा कि पंचायतों को कई बार आपदा के चलते आकस्मिक कार्य भी कराने पड़ते हैं। इसके लिए बजट उपलब्ध कराया जाए। जयहरीखाल ब्लॉक के प्रशासक दीपक भंडारी ने कहा कि उनके ब्लॉक में कुछ ग्राम पंचायतों को सालाना साढ़े लाख लाख तक ही बजट मिल पाता है, जो बहुत कम है। इस मौके पर ब्लॉक प्रशासक देवाल डॉ. दर्शन सिंह दानू, द्वारीखाल महेंद्र सिंह राणा, ग्राम पंचायत प्रशासक झाझरा पिंकी देवी ने भी विचार व्यक्त किए। सचिव पंचायतीराज श्री चंद्रेश कुमार ने कहा कि राज्य की 89 प्रतिशत ग्राम पंचायतों की आबादी पांच सौ से कम है, जिन्हें सालाना पांच लाख रुपए से कम का वार्षिक अनुदान मिल पाता है, इसलिए वित्तीय आवंटन को बढ़ाए जाने की जरूरत है। इस मौके पर निदेशक पंचायतीराज श्रीमती निधि यादव भी उपस्थित हुईं। 


*03 – राजनैतिक दलों ने उठाई ग्रीन बोनस की मांग* 

तीसरे सत्र में भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई (एम), आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भाजपा से विधायक विनोद चमोली ने कहा कि उत्तराखंड ने सतत विकास लक्ष्य में शानदार प्रदर्शन किया है, प्रति व्यक्ति आय में भी उत्तराखंड का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से अधिक है। अब राज्य को पलायन रोकने के लिए टेलीमेडीसिन जैसे माध्यमों को विकसित किए जाने की जरूरत है। इसी तरह गांवों को बचाने के लिए महिला आधारित कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। विधायक चमोली ने कहा कि राज्य में कुछ गांव पलायन से खाली हो चुके हैं, इन गांवों तक सड़क पहुंचाने के लिए भी राज्य को अतिरिक्त संसाधन की जरूरत है। इसी तरह जल जीवन मिशन के तहत प्राकृतिक स्रोतों को बचाने के लिए अतिरिक्त बजट दिया जाए। उन्होंने राज्य को कार्बन क्रेडिट भी दिए जाने की मांग उठाई। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड में हिमालय अभी युवा अवस्था में है, इस कारण यहां प्राकृतिक आपदाएं होती रहती हैं। इसलिए आपदा से निपटने के लिए राज्य को अतिरिक्त संसाधन दिए जाएं। धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड देश के पर्यावरण संरक्षण में विशेष योगदान देता है, इसके लिए राज्य को प्रतिपूर्ति मिलनी चाहिए। साथ ही स्थानीय नदियों से पेयजल और सिंचाई सुविधा विकसित करने के लिए अतिरिक्त सहायता दी जाए। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव राजेंद पुरोहित ने राज्य में मनरेगा दरें बढ़ाने की मांग की। साथ ही आंगनबाड़ी, भोजनमाताओं को सशक्त बनाने की मांग की। आदमी आदमी पार्टी के उपाध्यक्ष विशाल चौधरी ने राज्य के लिए विशेष सहायता की मांग उठाई। बसपा के राज्य सचिव मदनलाल भी बैठक में शामिल हुए। इस मौके पर सचिव श्री दिलीप जावलकर, अपर सचिव डॉ विजय जोगदंडे, श्री हिमांशु खुराना उपस्थित रहे।  


*कहा-विकासशील राज्य में संतुलित राजकोषीय घाटा बुरी स्थिति नहीं*


*उत्तराखंड वित्तीय चुनौतियों को लेकर जागरूकः डा पनगढ़िया*


*आयोग ने कहा-आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है राज्य*


उत्तराखंड के दौरे पर आए 16 वें वित्त आयोग ने उत्तराखंड के वित्तीय प्रबंधन को सराहा है। आयोग के अध्यक्ष डा अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि किसी भी विकासशील राज्य में यदि संतुलित राजकोषीय घाटा है, तो यह बुरी स्थिति नहीं है। हां, यह घाटा ज्यादा ना होने पाए, इसका ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा-वित्तीय चुनौतियों को लेकर उत्तराखंड जागरूक है और सही तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। इसमें बढ़ोत्तरी की पूरी संभावना है।


सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में डा पनगढ़िया ने कहा कि उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय अच्छी है। यह राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसको और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि आज तक जितने आयोग बने हैं, उन्होंने हिमालयी राज्यों की विशिष्ट भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं की हैं। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच कर बंटवारे की व्यवस्था को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था और आवश्यकताओं के अनुरूप कर से प्राप्त आय केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित करने के लिए वित आयोग विधि और सूत्र निर्धारित करता है।


डा पनगढ़िया ने कहा कि केंद्र व राज्यों के बीच कर विभाजन के लिए आयोग ने जो सूत्र प्रस्तुत किया है, उसमें राजस्व हिस्सेदारी के निर्धारण के लिए पैमाने तय किए गए हैं। जनसांख्यिकी प्रदर्शन (कम प्रजनन दर के आधार पर ) को 12.5 प्रतिशत, आय के अंतर को 45 प्रतिशत,  जनसंख्या व क्षेत्रफल प्रत्येक के लिए 15 प्रतिशत, वन एवं पारिस्थितिकी के लिए दस प्रतिशत, कर एवं राजकोषीय प्रबंधन को 2.5 प्रतिशत रखा गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों और पंचायतों के विकास के लिए बजट आवंटन के दौरान पूरा ध्यान रखा जाता है। यह राज्यों पर भी निर्भर करता है कि वह अवमुक्त बजट के हिसाब से कैसे काम करते हैं।

 उत्तराखंड चार धाम यात्रा वर्ष 2025

• *आज सोमवार को भगवान मद्महेश्वर जी की चलविग्रह डोली श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से प्रथम पड़ाव राजकेश्वरी मंदिर रांसी हेतु प्रस्थान हुई।* 


• *21 मई को खुलेंगे द्वितीय केदार मद्महेश्वर जी के कपाट* 


• *बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने दी शुभकामनाएं* 


•  उखीमठ/ रूद्रप्रयाग:  19 मई

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 पंचकेदारों में प्रतिष्ठित द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर जी की चल विग्रह डोली  आज श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से श्री मद्महेश्वर धाम हेतु प्रस्थान हुई पूजा-अर्चना विधि-विधान से केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग ने    चलविग्रह डोली को श्री मद्महेश्वर हेतु प्रस्थान करवाया। इस अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया गया था तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु  तथा हक हककहूकधारी एवं तीर्थ पुरोहित मौजूद रहे।

*श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी )अध्यक्ष   हेमंत द्विवेदी ने श्री मद्महेश्वर जी की चल विग्रह डोली के धाम प्रस्थान होने के अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी है।* 


उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती एवं उपाध्यक्ष विजय कपरवाण ने श्री महेश्वर यात्रा शुरू होने पर प्रसन्नता जताई है।

बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि मद्महेश्वर यात्रा हेतु तैयारियां पूरी की जा चुकी है।




उल्लेखनीय है कि मंदिर के कपाट   इस यात्रा वर्ष  बुधवार 21 मई  पूर्वाह्न 11. 30 बजे शुभ मुहूर्त पर विधि- विधान से खुलेंगे ।श्री बदरीनाथ - केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा भगवान मद्महेश्वर जी के कपाट खुलने के अवसर हेतु तैयारियां की गयी है श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ को भब्यरूप से फूलो से सजाया गया है।



बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि बीते कल रविवार  18 मई को श्री मद्महेश्वर जी की चलविग्रह डोली श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ परिसर  में विराजमान हो गयी  

आज 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से प्रथम पड़ाव राकेश्वरी मंदिर रांसी प्रवास हेतु  प्रस्थान हुई है।  कल 20 मई द्वितीय पड़ाव गौंडार प्रवास रहेगा तथा   21  मई सुबह  को श्री मद्महेश्वर पहुंचेगी एवं इसी दिन बुधवार 21 मई को कर्क लग्न में पूर्वाह्न 11.30 बजे  द्वितीय केदार मद्महेश्वर जी के कपाट खुलेंगे।


आज भगवान मद्महेश्वर जी की डोली के श्री प्रथम पड़ाव रवाना होने के अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग सहित  बीकेटीसी पूर्व सदस्य शिवसिंह रावत,वरिष्ठ पुजारी शिवशंकर लिंग,  टी गंगाधर लिंग, श्री मद्महेश्वर के पुजारी शिवलिंग स्वामी, वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी,श्री ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी रमेश नेगी,  सामाजिक कार्यकर्ता देवानंद  गैरोला भंडार प्रभारी देवी प्रसाद तिवारी, पंच गौंडारी हक-हकूकधारी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित,देवरा प्रभारी  देवेंद्र पटवाल,डोली प्रभारी दीपक पंवार,विदेश शैव, प्रेम सिंह रावत, नवीन शैव, वीरेश्वर भट्ट आदि मौजूद रहे।

आज़ का राशिफल

*दिनांक:- 19/05/2025, सोमवार*

षष्ठी, कृष्ण पक्ष,

ज्येष्ठ 


rashifal today  19 may 2025


*💮🚩    विशेष जानकारी   🚩💮*


 *सर्वार्थ सिद्धि योग 19:29 तक 


*💮🚩💮   शुभ विचार   💮🚩💮*


दुतो न सञ्चरति खे न चलेच्च वार्ता ।

पुर्व न जल्पितमिदं न च सड्गमोऽस्ति ।

व्योम्नि स्थितं रविशाशग्रहणं प्रशस्तं

जानाति यो द्विजवरः सकथं न विद्वान् ।।

।। चा o नी o।।


   कोई संदेशवाहक आकाश में जा नहीं सकता और आकाश से कोई खबर आ नहीं सकती. वहा रहने वाले लोगो की आवाज सुनाई नहीं देती. और उनके साथ कोई संपर्क नहीं हो सकता. इसीलिए वह ब्राह्मण जो सूर्य और चन्द्र ग्रहण की भविष्य वाणी करता है, उसे विद्वान मानना चाहिए.


*🚩💮🚩  सुभाषितानि  🚩💮🚩*


गीता -: मोक्षसंन्यासयोग:- अo-18


नियतस्य तु सन्न्यासः कर्मणो नोपपद्यते ।,

मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ॥,


(निषिद्ध और काम्य कर्मों का तो स्वरूप से त्याग करना उचित ही है) परन्तु नियत कर्म का (इसी अध्याय के श्लोक 48 की टिप्पणी में इसका अर्थ देखना चाहिए।,) स्वरूप से त्याग करना उचित नहीं है।, इसलिए मोह के कारण उसका त्याग कर देना तामस त्याग कहा गया है॥,7॥,


*💮🚩   दैनिक राशिफल   🚩💮*


देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।

नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।

विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।

जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।


🐏मेष

कुबुद्धि हावी रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विवाद से दूर रहें। कुसंगति से बचें। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। निवेश शुभ रहेगा। भाग्य का साथ रहेगा। नौकरी में अनुकूलता रहेगी। प्रसन्नता रहेगी।


🐂वृष

यात्रा मनोरंजक रहेगी। किसी मांगलिक कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त होगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता प्राप्त करेगा। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड में सोच-समझकर हाथ डालें। जल्दबाजी न करें। समय अनुकूल है।


👫मिथुन

व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। समय का अपव्यय होगा। दूर से दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। विवाद से क्लेश होगा। काम में मन नहीं लगेगा। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी व्यक्ति विशेष से अनबन हो सकती है। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।


🦀कर्क

कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक कष्ट संभव है। परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कि नीचा देखना पड़े। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। पराक्रम व प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धनार्जन होगा।


🐅सिंह

शत्रु शांत रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। घर में प्रतिष्ठित अतिथियों का आगमन हो सकता है। व्यय होगा। जोखिम उठाने का साहस कर पाएंगे। आय बनी रहेगी। दुष्‍टजनों से दूर रहें। चिंता तथा तनाव रहेंगे।


🙍‍♀️कन्या

भाग्योन्नति के प्रयास सफल रहेंगे। रोजगार प्राप्ति सहज ही होगी। व्यावसायिक यात्रा से लाभ होगा। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। निवेशादि शुभ रहेंगे। कारोबार में वृद्धि के योग हैं। किसी बड़ी समस्या का हल प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें।


⚖️तुला

अप्रत्याशित खर्च सामने आएंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। पुराना रोग उभर सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी भी अपरिचित व्यक्ति पर अंधविश्वास न करें। चिंता तथा तनाव बने रहेंगे। अपेक्षित कार्यों में विलंब होगा। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। शत्रु शांत रहेंगे। ऐश्वर्य पर खर्च होगा।


🦂वृश्चिक

प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। शुभ समाचार मिल सकता है। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। चिंता रहेगी। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा लाभदायक रहेगी। मित्रों का सहयोग कर पाएंगे। मान-सम्मान मिलेगा। आय में वृद्धि होगी।


🏹धनु

आराम का समय मिलेगा। आशंका-कुशंका रहेगी। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कारोबारी नए अनुबंध हो सकते हैं, प्रयास करें। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। प्रमाद न करें।


🐊मकर

यात्रा मनोनुकूल लाभ देगी। राजभय रहेगा। जल्दबाजी व विवाद करने से बचें। थकान महसूस होगी। किसी के व्यवहार से स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है। कोर्ट व कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है। पूजा-पाठ में मन लगेगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। प्रसन्नता रहेगी।


🍯कुंभ

वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। शारीरिक शिथिलता रहेगी। काम में मन नहीं लगेगा। किसी अपने का व्यवहार प्रतिकूल रहेगा। पार्टनरों से मतभेद हो सकते हैं। नौकरी में अपेक्षानुरूप कार्य न होने से अधिकारी की नाराजी झेलना पड़ेगी।


🐟मीन

कष्ट, भय व चिंता का वातावरण बन सकता है। विवेक से कार्य करें। समस्या दूर होगी। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति मनोनुकूल बनेगी। किसी वरिष्ठ व्यक्ति का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। कारोबारी लाभ में वृद्धि होगी। नौकरी में शांति रहेगी। सहकर्मियों का साथ मिलेगा। धनार्जन होगा।


🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

🌺🌺🌺🌺🙏🌺🌺🌺🌺

*आचार्य  पवन  पाराशर (वृन्दावन)*

जीएसटी के कार्यान्वयन के महत्व को बताने के उद्देश्य से आयोजित की गई 


देहरादून :

central GST  had organised marathon

आगामी 1 जुलाई को जीएसटी की 8वीं वर्षगाँठ मनाई जाएगी और इसकी मुख्य थीम  “जीएसटी के 8 वर्ष : 

करों का सरलीकरण और नागरिकों का सशक्तीकरण” है। इस से पूर्व जागरूकता हेतु सीजीएसटी आयुक्तालय, देहरादून द्वारा फिट इंडिया कैम्पेन के समन्वय में रविवार को एक साइकिल मैराथन का आयोजन किया गया। यह साइकिल मैराथन फिटनेस और कार्यबल के बीच एकता की भावना और देश में जीएसटी के कार्यान्वयन के महत्व को बताने के उद्देश्य से की गई।


इस साइकिल मैराथान का शुभारंभ सुबह 6.30 बजे महाराणा प्रताप चौक से जीएसटी आयुक्तालय के प्रधान आयुक्त श्री शुभ चिंतन द्वारा झंडी दिखाकर किया गया और लगभग 5 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यह साइकिल मैराथन मालदेवता रोड पर पहुंचकर संपन्न हुई।


अपर आयुक्त श्री अरूण कुमार गुप्ता एवं श्री नितिन वापा,  संयुक्त आयुक्त श्री विवेकानंद मौर्य के नेतृत्व में सभी सीजीएसटी आयुक्तालय देहरादून तथा लेखा परीक्षा कार्यालय देहरादून के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा इस साइकिल मैराधन में उत्साहपूर्वक भाग लिया और आगामी  8 वें जीएसटी दिवस की थीम के संदेश - “जीएसटी के 8 वर्ष : करों का सरलीकरण और नागरिकों का सशक्तीकरण”  को मैराथन के माध्यम से जन -जन तक पहुंचाया।


इस साइकिल मैराधन के आयोजन में लेखा परीक्षा आयुक्तालय, देहरादून, सीजीएसटी मंडल कार्यालय, देहरादून तथा हरिद्वार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ -साथ उनके परिजनों तथा कुछ स्थानीय नागरिकों द्वारा भी भाग लिया गया और इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया गया।

 अस्तित्व आधारित संदेश यह है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।

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ये विचार 

सुश्री लक्ष्मी पुरी, संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव और संयुक्त राष्ट्र महिला की उप कार्यकारी निदेशक तथा भारत की पूर्व राजदूत के है , इसे पढ़कर आपको ओपेराशन सिंदूर की महत्ता का पता चल पाएगा---

सिंदूर सिद्धांत इसे आगे बढ़ाता है, आत्मविश्वास से भरे भारत ने इसका समर्थन किया है। 


देश अपने मूल हितों तथा अपने नागरिकों की संरक्षा और सुरक्षा के लिए स्वतंत्र व मजबूती से काम करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। 


भू-राजनीतिक रूप से, इस ऑपरेशन ने क्षेत्रीय उम्मीदों को फिर से स्थापित किया है। 

  

 ऑपरेशन सिंदूर: राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय सम्मान का संगम

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• सुश्री लक्ष्मी पुरी, संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव और संयुक्त राष्ट्र महिला की उप कार्यकारी निदेशक तथा भारत की पूर्व राजदूत ने  कहा कि

ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट किया है कि भारत वैधता नहीं चाहता है। देश न्याय चाहता है। भारतीय संयम को कभी भी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।        

पहलगाम में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवादी कृत्य के प्रति भारत की जवाबी प्रतिक्रिया - ऑपरेशन सिंदूर, जो अभी भी जारी है – आतंकवाद-रोधी और सैन्य सिद्धांत तथा रुख में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। अपने जोशीले भाषण में, जिसकी गूंज पूरे भारत और दुनिया के विभिन्न देशों की राजधानियों में सुनायी दी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा करते हुए कहा कि सीमा-पार आतंकवाद के किसी भी कृत्य के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई की एक नई सामान्य स्थिति स्थापित की गई है।

कोई भी देश, जो आतंकवादी अवसंरचना को पनाह देता है, उसे वित्तीय मदद देता है और उसका पोषण करता है, उसे अपने सैन्य बलों के साथ जोड़ता है और निर्दोष नागरिकों के खिलाफ क्रूर हमलों के लिए भारत को निशाना बनाता है, उसे त्वरित, दंडात्मक और प्रतिशोधी परिणामों का सामना करना पड़ेगा। सोची-समझी सैन्य कार्रवाई से न केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बीच में भी आतंकवादी नेटवर्क ध्वस्त हो जाएंगे, भले ही राज्य प्रायोजित आतंकवादी ठिकाने आधिकारिक सुरक्षा संरचनाओं के साथ कितने भी जुड़े हुए हों।

सिंदूर सिद्धांत, भारत की संप्रभुता और सभ्यतागत लोकाचार को बनाए रखने में निहित है। इसका उद्देश्य इसकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना, आंतरिक एकता, सद्भाव और शांति सुनिश्चित करना और 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए देश को त्वरित आर्थिक विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है। यह सीमा-पार आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता के रुख की पुष्टि करता है और भारत को अपने सुरक्षा हितों की रक्षा में निर्णायक रूप से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध करता है, जिसे पुनर्परिभाषित और विस्तृत किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है: भारत के खिलाफ़ किसी भी तरह की आतंकी कार्रवाई युद्ध मानी जायेगी - अब कोई संदेह की स्थिति नहीं है, किसी दूसरे तरीके से युद्ध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, आतंकवाद से होने वाले नुकसान के आगे हार नहीं मानी जाएगी। ऑपरेशन के बाद राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रधानमंत्री का संबोधन सफलता की पुष्टि से कहीं अधिक था। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर दिए गए इस संबोधन ने एक नई रणनीतिक व्यवस्था का अनावरण किया- दृढ़, गरिमापूर्ण और भारत के सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित।

इसने एक सरल लेकिन दृढ़ संदेश दिया: भारत शांति में विश्वास करता है, लेकिन शांति को शक्ति का समर्थन होना चाहिए। अपने मूल में, प्रधानमंत्री मोदी का सिंदूर सिद्धांत तीन अलग सिद्धांतों पर जोर देता है, जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पहला, भारत उन देशों के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा, जो आतंक को बढ़ावा देते हैं; जब बातचीत फिर से शुरू होगी, तो यह द्विपक्षीय होगी तथा इसमें केवल आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर चर्चा होगी। दूसरा, भारत आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों के साथ आर्थिक संबंधों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है तथा व्यापार और राष्ट्रीय सम्मान के बीच एक सुदृढ़ रेखा खींचता है। अंत में, भारत अब परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा- ऑपरेशन सिंदूर ने निर्णायक रूप से उन सभी भ्रमों को तोड़ दिया है कि परमाणु खतरे, आतंकी कृत्यों के ढाल बन सकते हैं।

"सिंदूर" नाम का चयन गहन सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता को रेखांकित करता है। विवाहित हिंदू महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला लाल सिंदूर - पीड़ित होने के रूपक के रूप में नहीं, बल्कि पवित्र कर्तव्य और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया। आतंकवादियों ने इस सम्मान को अपवित्र करने की कोशिश की; भारत ने पूरी ताकत के साथ जवाब दिया। व्यक्तिगत राजनीतिक हो गया, सांस्कृतिक रणनीतिक हो गया। चूंकि आतंकी हमला कश्मीर में हुआ था, जो भारत माता का भौगोलिक और प्रतीकात्मक सिर है, इसलिए ऑपरेशन सिंदूर भारत माता की रक्षा करने और उसे सलाम करने के लिए है। भारत की प्रतिक्रिया एक सैद्धांतिक विरासत का अनुसरण करती है।

कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर 1980 के दशक के इंदिरा सिद्धांत तक तथा 1998 में पोखरण-II परीक्षणों के जरिए वाजपेयीजी के साहसिक परमाणु दावे से लेकर —जिसने वैश्विक दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद भारत के आत्मरक्षा के संप्रभु अधिकार की पुष्टि की और विश्वसनीय न्यूनतम अवरोध की नीति स्थापित की—से लेकर उरी और बालाकोट में प्रदर्शित मोदी सिद्धांत तक, भारतीय शासन नीति ने लंबे समय से संकट के समय और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण मामलों में संप्रभु निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है।


आतंकवाद के लिए ढाल के रूप में परमाणु शक्ति का इस्तेमाल करने के आदी पाकिस्तान का सीधे सामना किया गया है। दंड से मुक्ति का भ्रम टूट गया है।

चीन, हालांकि औपचारिक रूप से तटस्थ है, उसे अपने सहयोगी की कमज़ोरी को समझना होगा। 

संयुक्त राज्य अमेरिका से लेकर रूस तक, वैश्विक शक्तियाँ भारत को बाहरी संकेत या समर्थन की प्रतीक्षा किए बिना कार्रवाई करते हुए देख रही हैं। अन्य पड़ोसियों को अब अपनी दुर्भावना और भारत विरोधी कार्रवाइयों के परिणामों का आकलन करना चाहिए।

पिछले 11 वर्षों में, भारत ने कई भौगोलिक क्षेत्रों में और प्रमुख शक्तियों के साथ द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी का एक सघन और मजबूत नेटवर्क सफलतापूर्वक निर्मित किया है। इसने बहुपक्षीय और लघुपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग व्यवस्थाओं में भाग लिया है और मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, प्रमुख शक्तियों और इन साझेदारियों से जुड़े भारत के कई रणनीतिक और रक्षा संबंध अग्नि परीक्षा से गुजरे।

पहलगाम के बाद, संतोषजनक बात यह थी कि हमारे भागीदारों द्वारा आतंकवादी हमलों की सार्वभौमिक निंदा की गयी। हालाँकि, ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में पाकिस्तान की तीव्र कार्रवाई के बाद, परमाणु-संपन्न पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ने के बारे में चिंताएँ व्यक्त की गईं। प्रतिक्रियाएँ इस बात से भी प्रभावित थीं कि इस सैन्य संघर्ष में उनके हथियार प्रणालियों ने कैसा प्रदर्शन किया या कि क्या प्रदर्शन करने में विफल रहे। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, हमें न केवल अपने रणनीतिक साझेदारों को सावधानी से चुनना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ये साझेदारियाँ सिंदूर सिद्धांत को शामिल करती हों।

 

इसका मतलब यह है कि उन्हें पाकिस्तान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उसके आतंकी ठिकानों को खत्म करना चाहिए और राज्य-नीति के रूप में आतंकवाद का परित्याग करना चाहिए। यदि हमें पाकिस्तानी आतंकवादी-सैन्य ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करना पड़ता है, तो उन्हें हमारे साथ एकजुटता दिखानी चाहिए। दुष्टों के लिए कोई शरणस्थली नहीं, कोई बचाव नहीं। महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत जिस आतंकी ढांचे को निशाना बना रहा है, वह न सिर्फ भारत और लोकतंत्र के लिए, बल्कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि और विकास के इंजन के रूप में देश की भूमिका के लिए भी खतरा है।

पाकिस्तान से आतंकवाद को वैश्विक स्तर पर निर्यात किया जाता है - यूरोप, यूके, संयुक्त राज्य अमेरिका और उससे आगे। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अधिकांश हिस्सा आंखें मूंद कर बैठा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी समूह पाकिस्तान में खुलेआम काम करते हैं। पाकिस्तान पहले भी आतंकवादी समूहों की शरणस्थली था और अब भी है। ऑपरेशन सिंदूर 1.0 के दौरान, पाकिस्तान के रक्षा और विदेश मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से इतना स्वीकार किया। भारत ने आतंक के इस असंख्य सिर वाले राक्षस के खिलाफ कार्रवाई करके वैश्विक सेवा की है।

यह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा के रूप में खड़ा है। दुनिया को कार्रवाई करने के लिए जागरूक होना चाहिए और आतंक के अपराधियों और इसके खिलाफ काम करने वालों के बीच नैतिक समानता स्थापित करना बंद करना चाहिए - चाहे उनके संकीर्ण, अल्पकालिक, दिखावटी विचार कुछ भी हों। सिंदूर सिद्धांत का आर्थिक आयाम भी महत्वपूर्ण है। "आतंकवाद के साथ कोई व्यापार नहीं" की स्पष्ट घोषणा करके, भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आर्थिक उपायों को क्रियान्वित किया है।

व्यापार और सिंधु जल संधि जैसी संधियों को निलंबित करने जैसे कदम आर्थिक संबंधों को राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के साथ मजबूती से संरेखित करने के भारत के संकल्प को रेखांकित करते हैं। 

ये उपाय एक स्पष्ट संदेश देते हैं:


 आतंक के खात्मे के बाद आर्थिक संबंध बनने चाहिए, न कि पहले।

अस्तित्व आधारित संदेश यह है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।

 नारी-शक्ति से जुड़ा एक शक्तिशाली आख्यान ऑपरेशन के संदेश को पुष्ट करता है और इसे सुर्खियों में लाता है: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका। 

ऑपरेशन के बाद दो महिला अधिकारियों ने प्रमुखता से सैन्य प्रेस वक्तव्यों का नेतृत्व किया, जो भारत के रक्षा परिदृश्य में महिलाओं के बढ़ते महत्व का प्रतीक है। 

"नारी शक्ति" (महिला सशक्तिकरण) के इस क्षण ने महिलाओं के प्रति भारत के सभ्यतागत सम्मान को मजबूत किया, रानी लक्ष्मीबाई से लेकर समकालीन महिला सैन्य अधिकारियों तक के ऐतिहासिक उदाहरणों की प्रतिध्वनि की, जिससे राष्ट्रीय गौरव को लैंगिक समावेश के साथ जोड़ा गया।

भारत की सैन्य ताकत घरेलू नवाचार की मदद से तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कुछ विदेशी प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया था, स्वदेशी मिसाइलों, ड्रोन और निगरानी उपकरणों की सफल तैनाती, रक्षा में आत्मनिर्भरता की परिचालन परिपक्वता को उजागर करती है। 

यह हमारे निर्यात जोर और मांग को बढ़ाता है। हमने भारत में आयातित और सह-निर्मित हथियार प्रणालियों के साथ-साथ पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली हथियार प्रणालियों का भी परीक्षण किया और इनसे हमारे द्वारा लिए गए सही निर्णयों की पुष्टि हुई। ऑपरेशन सिंदूर से यह स्पष्ट हो गया कि भारत वैधता नहीं चाहता - वह न्याय चाहता है।

भारतीय संयम को कभी भी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। सिंदूर सिद्धांत केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं है; यह सैद्धांतिक स्पष्टता का एक सक्रिय दावा है। 

भारत के नागरिकों के, विशेषकर महिलाओं के जीवन, गरिमा, भलाई और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी बिंदु पर राष्ट्रीय सुरक्षा का राष्ट्रीय सम्मान के साथ संगम होता है। यहीं पर प्राचीन मूल्य, आधुनिक ताकत के साथ मिलते हैं। और यहीं पर भारत खड़ा है- निडर, अडिग और एकजुट।  


- पूरा देश वीर जवानों के त्याग और बलिदान का सम्मान करता है  : श्री जेपी नड्डा


- ⁠देश की ओर से ऑपरेशन सिंदूर की सफलता हेतु सेना की उत्कृष्ट सेवा के लिए धन्यवाद देता हूं : केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा 

पिथौरागढ़ :

union minister JP nadda at pithoragarh


 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री भारत सरकार श्री जेपी नड्डा अपने आदि कैलाश ओम पर्वत भ्रमण के तहत आज रविवार को गुंजी हेलीपैड पहुंचें, जहां स्थानीय लोगों द्वारा रंग संस्कृति की पगड़ी पहनाकर पारंपरिक ढंग से उनका स्वागत किया गया।


 इसके पश्चात् केन्द्रीय मंत्री श्री जे0पी0 नड्डा आर्मी गेस्ट हाउस पहुंचें, जहां उन्होंने सेना, आई.टी.बी.पी तथा एस.एस.बी के जवानों से मुलाकात कर सीमा क्षेत्र की सुरक्षा हेतु तैनात हथियारों व उपकरणों की जानकारी ली। 


उन्होंने यहां तैनात भारतीय सेना, एसएसबी, आईटीबीपी के वीर जवानों से मुलाकात की। 


इसके बाद उन्होंने जवानों के साथ बातचीत की और दुर्गम परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करने के उनके अदम्य साहस और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूरा देश इन वीर जवानों के त्याग और बलिदान का सम्मान करता है और उनकी कर्तव्यनिष्ठा पर गर्व करता है। जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, आप सभी देश की सुरक्षा के प्रहरी हैं। आपकी वीरता और निष्ठा के कारण ही देशवासी सुरक्षित महसूस करते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से और पूरे देश की ओर से आपको ऑपरेशन सिंदूर की सफलता हेतु आपको आपकी उत्कृष्ट सेवा के लिए धन्यवाद देता हूं। उन्होंने जवानों को सरकार की ओर से हर संभव सहायता और समर्थन का आश्वासन दिया। श्री नड्डा ने इस दौरान नाबी गांव के लोगों को भी संबोधित किया।


जिलाधिकारीश्री विनोद गोस्वामी ने जनपद के विभिन्न विभागों से संबंधित वाइब्रेंट विलेज के अंतर्गत गतिमान योजनाओं एवं प्रस्तावित कार्यक्रमों की पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से   जानकारी दी। उन्होंने जनपद के सभी विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले वाइब्रेट विलेज की जानकारी देते हुए ,पर्यटन विभाग द्वारा जनपद में पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु चलाई जा रही योजनाओं एवं आदि कैलाश, ओम पर्वत यात्रा हेतु व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी। स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों की जानकारी , पीएमजीएसवाई धारचूला एवं मुनस्यारी द्वारा प्रस्तावित सड़क मार्गों स्थानीय उत्पादों से रोजगार की उपलब्धता के विषय में भी श्री नड्डा को जानकारी दी।


उन्होंने बताया कि आईटीबीपी और क्षेत्रीय पशुपालकों को सहयोग प्रदान करने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल राज्य सरकार एवं आईटीबीपी में मध्य शुरू की गयी है। इस योजना के अर्न्तगत पिथौरागढ़ जिले में आईटीबीपी को ताजा, उच्च गुणवत्ता वाली पोल्ट्री एवं MOH (goat meat or sheep meat) की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इस योजना में सहकारी समितियां और किसान उत्पादक संगठन आईटीबीपी को खाद्य पदार्थ की आपूर्ति में शामिल है। 


इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे0 पी0 नड्डा द्वारा पवित्र आदि कैलाश क्षेत्र के दर्शन कर आदि कैलाश एवं पार्वती कुंड के निकट विराजमान भगवान शिव के मंदिर में पहुंचकर पूर्ण विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की और देश वासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व की प्रशंसा करते हुए इसे अद्वितीय बताया।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश के पवित्र क्षेत्र के भ्रमण के पश्चात, इस क्षेत्र में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की आवाजाही में वृद्धि हुई है। इस बढ़ी हुई गतिविधि ने स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा ने इस क्षेत्र की आध्यात्मिक महत्ता को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने के साथ ही साहसिक और आध्यात्मिक पर्यटन के एक महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में इस क्षेत्र की पहचान को भी मजबूत किया है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले कुछ वर्षों में आदि कैलाश और इसके आसपास के क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों और भक्तों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है, इसके पश्चात् उन्होंने ज्योलिंगकांग स्थित त्रिशूल के समीप मंदिर के दर्शन किए एवं यहां सेना के जवानों के साथ वार्ता कर उनका हौसला बढ़ाया।


इस दौरान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री भारत सरकार अजय टम्टा, दुग्ध एवं पशुपालन मंत्री  सौरभ बहुगुणा, जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव, उपजिलाधिकारी धारचूला मंजीत सिंह, आर्मी, आईटीबीपी, एस एस बी के अधिकारियों सहित संबंधित विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

 16th pay commission team reached uttarakhand



*सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में होगी अहम बैठक* 


*त्रिस्तरीय पंचायत, नगर निकाय प्रतिनिधियों और राजनैतिक दलों के साथ भी होगी बैठक* 


16वें वित्त आयोग की टीम, आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में रविवार को देहरादून पहुंच गई है। सोमवार को मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में राज्य सरकार की ओर से आयोग के सामने अपना प्रस्ताव रखा जाएगा। टीम दोपहर बाद नगर निकाय, पंचायत प्रतिनिधियों और राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक करेगी।


आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व वाले इस दल में आयोग सदस्य श्रीमति एनी जॉर्ज मैथ्यू, श्री मनोज पांडा, श्री सौम्या कांतिघोष आयोग के सचिव श्री ऋत्विक पांडे, संयुक्त सचिव श्री केके मिश्रा, संयुक्त निदेशक सुश्री पी अमरूथावर्षिनी शामिल हैं। रविवार को ओल्ड मसूरी रोड स्थित होटल हयात रीजेंसी  

पहुंचने पर टीम का ढोल दमाऊ की थाप पर पारम्परिक तरीके से स्वागत किया गया। टीम सोमवार को विभिन्न स्तर पर राज्य के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से विचार विमर्श करेगी। 


इसी क्रम में आयोग की टीम सोमवार सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। जिसमें राज्य सरकार द्वारा अपनी तैयारियों को रखा जाएगा। 

इसके बाद आयोग की टीम मसूरी रोड स्थित होटल में नगर निकाय, त्रिस्तरीय पंचायतों के जनप्रतिनिधियों के साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक करेगी। 

इससे पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने भी अध्यक्ष वित्त आयोग और सदस्यों का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचने पर स्वागत किया।

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