देहरादून 31 जुलाईः
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेतागणों के प्रतिनिधिमण्डल ने प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह एवं चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत के नेतृत्व मे मुख्य निर्वाचन अधिकारी से उनके कार्यालय में मुलाकात कर राज्य में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया की खामियों के सम्बन्ध में ज्ञापन प्रेषित किया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ0 वीवीआरसी पुरूषोत्तम को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के प्रथम चरण की त्रुटियों एवं द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई हेतु अपनाई जा रही अव्यावहारिक एवं पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया के संबंध में कांग्रेस पार्टी की आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रथम चरण की प्रक्रिया के दौरान अनेक गंभीर त्रुटियां एवं अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रथम चरण में सामने आई इन कमियों एवं त्रुटियों का समुचित परीक्षण एवं निराकरण किए बिना द्वितीय चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना न केवल मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करेगा, बल्कि संपूर्ण पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगा।
कांग्रेस पार्टी राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत दावों एवं आपत्तियों की सुनवाई के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा अपनाई जा रही व्यवस्था के निम्न बिन्दुओं पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज करती है।ः-
1. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की द्वितीय चरण की प्रक्रिया के अंतर्गत प्राप्त आपत्तियों एवं दावों की सुनवाई के लिए निर्वाचन विभाग द्वारा अनेक स्थानों पर एक ही समय में दो अलग-अलग मतदान केन्द्रों पर एक ही सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ)/निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ड्यूटी निर्धारित की गई है जो कि तर्क संगत प्रतीत नहीं होती है।
3. यदि निर्धारित समय पर अधिकारी किसी एक मतदान केन्द्र पर उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो संबंधित मतदाताओं के दावे एवं आपत्तियों के निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण का अधिकार प्रभावित होगा। इससे निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
4. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के अंतर्गत की गई मैपिंग में भी अनेक तर्कहीन एवं गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर मतदान क्षेत्रों, मतदान केन्द्रों एवं मतदाताओं की मैपिंग इस प्रकार की गई है, जो तार्किकता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है। उदाहरण स्वरूप विधानसभा क्षेत्र चकराता के मतदान केन्द्र 42-फनार में विसंगत मतदाताओं की कुल संख्या 19 दर्शाई गई है जबकि अपमैप की संख्या 398 अर्थात कुल 415 विसंगतियां दर्शाई गई हैं, इसी प्रकार मतदान केन्द्र 110-खबऊ में विसंगत मतदाताओं की कुल संख्या 2 दर्शाई गई है जबकि अपमैप की संख्या 371 अर्थात कुल 373 विसंगतियां दर्शाई गई हैं, जो कि तर्क संगत प्रतीत नहीं होता है।
5. उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण मतदान केन्द्रों पर स्थानीय एवं स्थायी निवासियों के नामों पर बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार की आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। यह अत्यंत आश्चर्यजनक एवं तर्कहीन है, क्योंकि इन दूरस्थ पर्वतीय गांवों में बाहरी व्यक्तियों के निवास अथवा मतदाता के रूप में शामिल होने की संभावना लगभग नगण्य है। अधिकांश ग्रामीण परिवार पीढ़ियों से अपने मूल गांवों में निवासरत हैं तथा उनकी पहचान एवं निवास की स्थिति स्थानीय प्रशासन एवं ग्राम समुदाय के लिए सर्वविदित है।
ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय मतदाताओं के नामों पर बिना ठोस एवं प्रथमदृष्टया प्रमाण के आपत्तियां दर्ज किया जाना न केवल मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाला है, बल्कि एसआईआर की प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस प्रकार की निराधार आपत्तियों के कारण ग्रामीण मतदाताओं को बार-बार सुनवाई के लिए उपस्थित होना पड़ रहा है, जिससे उन्हें समय, धन एवं श्रम की अनावश्यक हानि उठानी पड़ रही है।
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