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*प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन जन का सपना हो रहा साकार*

CM pay tribute to martyred-jawan-, listwn man ki baat


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को गाँधी पार्क, देहरादून में पूर्व सैनिकों, शहीद सैनिकों के परिजनों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के 136वें संस्करण को सुना। 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम, देश के नागरिकों के जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला कार्यक्रम बन चुका है। यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों को प्रेरित करने के साथ ही देश के विकास और जनभागीदारी से जुड़े विषयों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बना है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में डीआरडीओ की उपलब्धियों, रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता, रक्षा उत्पादों के निर्यात, जल संरक्षण, हस्तशिल्पों के संवर्धन तथा वोकल फॉर लोकल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संदेश आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूत करने वाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज भारत हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन जन का सपना साकार हो रहा है। 

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्री मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी श्री सुभाष बड़थ्वाल, सचिव श्री युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सभरवाल (से.नि.) एवं अन्य लोग मौजूद रहे।


*मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी*

*परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगी - मुख्यमंत्री*

*कारगिल के अमर शहीदों का त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे : मुख्यमंत्री*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को गांधी पार्क, देहरादून स्थित शहीद स्मारक पर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए उनके अद्वितीय त्याग, शौर्य और राष्ट्रसेवा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों के लिए अनुग्रह राशि डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ की जाएगी । 


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक  ऊंचाई पर अत्यंत विषम परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता, अटूट मनोबल और सर्वोच्च बलिदान का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया तथा विश्व के समक्ष भारत की सैन्य शक्ति और दृढ़ संकल्प का परिचय कराया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा, वीरता पदक विजेताओं की समृद्ध विरासत तथा यहां के युवाओं का राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की सुरक्षा नीति अधिक सशक्त, निर्णायक और आत्मविश्वास से परिपूर्ण हुई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत संरचना का तीव्र विकास तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए गए प्रयास नए भारत की शक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक तथा सैनिक कल्याण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णयों से देश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों का सम्मान बढ़ा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। इसके साथ ही सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करना, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु सहायता,   वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा तथा सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को संपत्ति क्रय पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी अनेक जनकल्याणकारी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। पूर्व सैनिकों की शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के जिला अदालतों में भूमि धोखाधड़ी के जो मामले पेंडिंग हैं, उनके शीघ्र निस्तारण के प्रयास किये जाएंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के 'पांचवें धाम' के रूप में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से निर्मित यह सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रेरणा-स्थल बनेगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी ठोस कदम उठा रही है। सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए देश का पहला 'अग्निवीर रोजगार सेल' गठित किया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग तथा अन्य राज्य सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता देने, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि कारगिल के अमर शहीदों के त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेकर विकसित भारत तथा विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।


सैनिक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं शहीद परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने वीरता पुरस्कार विजेताओं की सम्मान राशि में वृद्धि की है तथा अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।


इस अवसर पर  राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्री मुन्ना सिंह चौहान,  दायित्वधारी श्री सुभाष बड़थ्वाल, सचिव  सैनिक कल्याण श्री युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि), जिला अधिकारी डॉ .आशीष चौहान, एसएसपी श्री प्रमेंद्र डोभाल, , पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिजन उपस्थित थे।

*मुख्यमंत्री ने मुख्य सेवक सदन में लेखकों एवं साहित्यकारों से किया  संवाद*


*उत्तराखंड के विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक परिवर्तन में साहित्यकारों की भूमिका पर हुई  चर्चा*


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन,  देहरादून में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों एवं साहित्यकारों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनके साहित्यिक योगदान और वर्तमान लेखन पर विस्तार से चर्चा की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्यकार समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक चेतना के संवर्धन में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सशक्त साहित्यिक वातावरण तैयार करने तथा साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड महर्षि वेदव्यास सहित अनेक ऋषि-मुनियों की तपोभूमि एवं कर्मभूमि रही है। इस पावन भूमि ने ऐसे साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति विकसित करने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के पुराने, बिखरे एवं अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और प्रकाशन का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से दो साहित्य ग्राम स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। साहित्यकारों के सम्मान एवं प्रोत्साहन के लिए वर्ष 2022 में 'उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान' तथा वर्ष 2025 में 'दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान' प्रारम्भ किए गए हैं।


*रुद्रप्रयाग के '1000 पुस्तक दान अभियान' को मुख्यमंत्री का सहयोग*


 हरेला पर्व के अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा संचालित '1000 पुस्तक दान अभियान' को मुख्यमंत्री ने  अपना सहयोग प्रदान किया। उन्होंने 'लेखकों से संवाद' कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की।


गौरतलब है कि रुद्रप्रयाग में "एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य" थीम पर सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए पुस्तक संग्रह अभियान संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकें समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच का आधार होती हैं। उनका यह योगदान पुस्तक दान की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं में अध्ययन की आदत को भी प्रोत्साहित करेगा।


इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह,पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अनिल रतूड़ी, सचिव श्री रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल श्री ललित मोहन रयाल, साहित्यकार प्रो .सुधा रानी पांडे, श्री आलोक लाल, श्री बुद्धिनाथ मिश्रा, श्री प्रेम कुमार साहिल, श्री शिव मोहन सिंह, श्री राम मोहन सिंह, सुश्री नेहा नेगी, श्री कुलभूषण केन, श्री अनमोल जैन, श्रीमती रूपा सोनी, श्री अमर खरबंदा, श्री शीशपाल गुसाईं, श्री रमाकांत, श्री दिवेश जोशी, श्रीमती प्रभा पंत, श्रीमती रूबी गुप्ता, श्री रणधीर कुमार अरोड़ा सहित अनेक  साहित्यकार एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

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