उत्तम सिंह मन्द्रवाल
ऋषिकेश :
प्रदेश मे जहा निजी विघालय की मनमानी आये दिन मीडिया मे सुर्खियां बटोरती है | जहा अब निजी विघालयो के कारनामे सामने आये है | जहा डोईवाला ब्लाक के नामी निजी स्कूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। गरीब बच्चों का दाखिला तो छोड़िए, वह अन्य नियम-कायदों को भी धता बता रहे हैं। इस बार तो इन स्कूलों ने विभागीय आदेश को ठेंगा दिखाते हुए आरटीई पोर्टल पर अपना पंजीकरण ही नहीं किया। डोईवाला ब्लाक में ऐसे स्कूलों की संख्या एक-दो नहीं बल्कि पूरे 76 है।
हालांकि विभाग ने इन स्कूलों से स्पस्टीकरण तलब किया है, मगर इसमें भी कई स्कूल झोल करने से बाज नहीं आ रहे।उन्होंने आरटीई पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी बताकर इसका ठीकरा शिक्षा विभाग के सिर पर ही फोड़ दिया है।जबकि हकीकत यह है कि स्कूलों ने समय रहते पंजीकरण कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जानकारो ने कहा कि निजी स्कूल मनमानी पर उतरे हुए हैं। इन स्कूलों ने जानबूझकर पोर्टल पर अपना पंजीकरण नहीं कराया है, ताकि गरीब बच्चों को एडमिशन न देना पड़े। ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निजी स्कूलों को आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण कर अपने स्कूल की सबसे छोटी कक्षा की 25 प्रतिशत सीट आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित रखनी होती है। मान्यता प्रमाण पत्र में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख होता है। इन बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान रखा गया। जिसका पालन न करने वाले विद्यालय की मान्यता समाप्त की जा सकती है।
स्कूलों का आरटीई पंजीकरण से कन्नी काटने का एक बड़ा कारण खुद शिक्षा विभाग भी है, क्योंकि विभाग नाफरमानी करने वाले स्कूलों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय चेतावनी देकर ही इतिश्री कर देता है। वहीं
आरटीई का उल्लंघन करने वाले ज्यादातर नामी स्कूल हैं। इन पर कार्रवाई सिर्फ इसलिए नहीं की जाती, क्योंकि वह रसूखदार और ऊंची पहुंच वाले लोग हैं।
शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आरटीई पोर्टल पर दिनांक 15 मार्च तक शत प्रतिशत पंजीकरण या अपडेशन किया जाना था। इसके बाद अभिभावक अपने बच्चे के एडमिशन के लिए 24 मार्च से दो अप्रैल तक आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आरटीई के तहत प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन में अपने वार्ड अथवा नजदीकी तीन निजी विद्यालयों के नाम भरने होते हैं, मगर जब पोर्टल पर विद्यालयों के नाम ही नहीं दिख रहे हैं तो फिर अभिभावक अपने बच्चों का पंजीकरण कहां और कैसे कर सकते हैं।
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