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संस्थान में मंगलवार (आज) से होंगे विभिन्न कार्यक्रम 

- आम लोगों को किडनी रोगों के प्रति जागरूक करना है उद्देश्य 

9 मार्च 2026



विश्व किडनी डे पर इस बार एम्स जन जागरूकता की लंबी श्रृंखला शुरू करने जा रहा है। श्रृंखला के पहले दिन कल मंगलवार को संस्थान में पब्लिक अवरनेस प्रोग्राम आयोजित होगा। कार्यक्रम में किडनी संबन्धित रोगों और उनसे बचाव पर विस्तृत जानकारी दी जायेगी। 


विश्व में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार भारत में आबादी के 17 प्रतिशत से अधिक लोगों में क्रोनिक किडनी डिसीज के लक्षण दिखायी देते हैं। इनमें से 33 प्रतिशत मामले क्रोनिक किडनी डिसीज़ के और 30-40 प्रतिशत मामले डायबिटिक किडनी डिसीज़ के हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आम लोगों को किडनी रोगों की जानकारी देने और उनमें किडनी रोगों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश में कल मंगलवार से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं। इस बारे में जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत ने बताया कि मंगलवार को आयोजित किए जा रहे किडनी रोग जनजागरूकता कार्यक्रम में किडनी रोग के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में लाभकारी जानकारी दी जायेगी। साथ ही क्रोनिक किडनी डिसीज के बारे में भी बताया जायेगा। प्रो. रविकांत ने बताया इस कार्यक्रम में किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके रोगी भी अपने अनुभव साझा करेंगे। अगले दिन बुद्धवार को संस्थान में किडनी रोग विषय पर ही सीएमई आयोजित की गयी है। जबकि बृहस्पतिवार को अस्पताल में नेफ्रो ओपीडी एरिया में जन जागरूकता का विशेष कार्यक्रम होगा। 


इंसेट- 

डायबिटिक किडनी डिसीज को समझना जरूरी

ऋषिकेश। डायबिटिक किडनी डिसीज़ किडनी फेलियर के मुख्य कारणों में से एक है। यह एक गंभीर कॉम्प्लिकेशन है जिसमें लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर किडनी के नाजुक फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और इस कारण किडनी पूरी तरह फेल हो सकती है। एम्स में नेफ्रो व जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत ने बताया कि शुरूआती चरण में इस बीमारी के कोई विशेष लक्षण नहीं होते हैं लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ने लगती है लक्षण पहिचान मे आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख लक्षणों में पैरों, टखनों या हाथों में सूजन, झागदार पेशाब आना या पेशाब कम आना, सांस लेने में दिक्कत और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर शामिल हैं। प्रो. रविकांत ने बताया कि अनियंत्रित ब्लड शुगर और हाई ब्लड प्रैशर सहित धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और किडनी की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री इसके कारणों में शामिल हैं। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह परमानेंट डैमेज (एंड-स्टेज किडनी डिसीज) का कारण बन सकता है जिसके लिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। बचाव के बारे में उन्होंने बताया कि ब्लड शुगर मैनेज करके रखना, ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना और नियमित स्तर पर ब्लड शुगर की जांच करवाते रहना चाहिए। बताया कि आइबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन जैसी पेन रिलीवर का ज्यादा इस्तेमाल कतई नहीं करना चाहिए।

जन औषधि दवाओं की उत्कृष्ट बिक्री पर एम्स को मिला पुरस्कार 

- केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने किया कार्यकारी निदेशक को सम्मानित


प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत जन औषधि केन्द्र के माध्यम से दवाओं की बिक्री पर उत्कृष्ट योगदान हेतु एम्स ऋषिकेश को पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा बीते रोज दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान दिया गया। 


नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 8वें जन औषधि दिवस सम्मान समारोह कार्यक्रम के दौरान, विभिन्न राज्यों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जनऔषधि केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों को इस योजना के माध्यम से किफायती स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने हेतु सम्मानित किया गया। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने विजेताओं को यह पुरस्कार देकर उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जनऔषधि योजना के लाभार्थियों से बातचीत की। इस दौरान लाभार्थियों ने उन्हें बताया कि कैसे सस्ती जेनेरिक दवाओं ने स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद की है। 


एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस दौरान जेनेरिक दवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के बारे में संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दवाएं सस्ती होने के कारण कई लोगों को भ्रम है कि यह दवाएं ज्यादा प्रभावी नहीं होती हैं। जबकि ऐसा नहीं है और यह केवल भ्रांति है। देशभर में 18 हजार से अधिक जन औषधि केन्द्रों से लोगों को इन दवाओं से बहुत फायदा हुआ है। प्रो. मीनू ने इन दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता के लिए डिजिटल नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने बताया कि किस तरह एम्स ऋषिकेश ड्रोन मेडिकल सेवा के माध्यम से उत्तराखण्ड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक इन दवाओं को पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दवाएं न केवल सस्ती और गुणवत्ता परक हैं अपितु आम परिवारों के लिए भी सुलभ और किफायती हैं। 


कार्यक्रम में बताया गया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और योजना का उद्देश्य जनऔषधि केंद्रों के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क के माध्यम से किफायती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के जन औषधि केन्द्र के प्रभारी फार्मोकाॅलिजस्ट प्रो. पुनीत धमीजा भी मौजूद रहे।


फोटो सलंग्न-

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