लालतप्पड़ -
दून–हरिद्वार हाईवे पर लालतप्पड़ औद्योगिक क्षेत्र इन दिनों नियमों की नहीं, बल्कि लापरवाही की मिसाल बना हुआ है। सड़क किनारे अवैध पार्किंग का ऐसा नजारा है मानो हाईवे नहीं, किसी निजी कंपनी का पार्किंग यार्ड हो।
फुटपाथ गायब, आधा हाईवे कब्जे में
लालतप्पड़ चौक से लेकर फनवैली के पास तक सैकड़ों ट्रक और मालवाहक वाहन आड़े-तिरछे खड़े हैं। फुटपाथ तो पहले ही गायब हो चुके हैं, अब आधा हाईवे भी पार्किंग के हवाले है। राहगीर जान जोखिम में डालकर सड़क के बीच से निकलने को मजबूर हैं।
कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के वाहन हों या माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों के ट्रक सबका ठिकाना हाईवे ही है। लोडिंग अनलोडिंग के दौरान जाम लगना आम बात हो गई है। सवाल यह है कि जब कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं तो पार्किंग की जिम्मेदारी सड़क पर क्यों डाली जा रही है?
पूर्व में इसी लापरवाही के चलते दुर्घटना हो चुकी है। लेकिन पुलिस, परिवहन विभाग और हाईवे प्राधिकरण की सक्रियता कागजों तक सीमित नजर आती है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
जिम्मेदारी किसकी?
जब हाईवे खुलेआम ‘ओपन पार्किंग जोन’ में बदल जाए, जब हर दिन जाम और दुर्घटना का खतरा मंडराए, तब यह कहना गलत नहीं होगा कि सिस्टम ने आंखें मूंद ली हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो किसी दिन बड़ा हादसा होना तय है और तब जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू होगी। सवाल वही है क्या कार्रवाई हादसे के बाद ही होगी?
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