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- गंभीर हालत में एअरलिफ्ट कर भेजी गयी थी हन्सी, एम्स ने किया इलाज

- ट्राॅमा और ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की टीम ने की सर्जरी 


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गंभीर रूप से घायल भिकियासैण की हन्सी को जब एअरलिफट कर एम्स भेजा गया था तो चिकित्सकों के सामने न केवल उसका जीवन बचाने की चुनौती थी बल्कि चूड़ी के कांच के टुकड़े आंख मे घुस जाने के कारण उसकी आंखों की रोशनी बचाना भी इलाज की प्राथमिकता में शामिल था। ऐसे में एम्स के चिकित्सकों ने टीम वर्क से काम करते हुए यह चुनौती स्वीकारी और अलग-अलग चरणों में सर्जरी करने के बाद हंन्सी के चेहरे की मुस्कान लौटा दी। इलाज के बाद अब वह स्वस्थ है और उसे एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है। 


30 दिसम्बर को अल्मोड़ा के भिकियासैण इलाके में एक बस दुर्घनाग्रस्त होकर गहरी खाई में जा गिरी थी। इस दर्दनाक हादसे में 7 यात्री मौके पर ही हताहत हो गए थे जबकि गंभीर रूप से घायल हंन्सी सती को उसी दिन एयरलिफ्ट कर एम्स पंहुचाया गया था। हन्सी सती पत्नी राकेश चन्द्र निवासी सिंगोली, अल्मोड़ा को जब एम्स भेजा गया तो उस दौरान न केवल उसके सिर, कंधे, पीठ और कूल्हे में गंभीर चोटें लगी थीं बल्कि डाॅक्टरों ने पाया कि दुर्घटना के दौरान हाथ की चूड़ी के कुछ टुकड़े भी उसकी आंखों में घुस गए हैं जिस वजह से वो आंख भी नहीं खोल पा रही थी। 


ऐसे में हन्सी का इलाज दो चरणों में किया गया। पहले चरण में ट्राॅमा सर्जन डाॅ. रूबी कटारिया की टीम द्वारा ट्राॅमा सर्जरी की गयी और दूसरे चरण में ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के डाॅक्टरों ने हन्सी के आंख के भीतर से चूड़ी के टुकड़े को निकालने हेतु सर्जरी की। यह सर्जरी दंत चिकित्सा विभाग के सर्जन डाॅ. प्रेम कुमार राठौर व उनकी टीम द्वारा की गयी। ट्राॅमा सर्जरी और आंखों के भीतर जा पंहुचे चूड़ी के टुकड़ों को निकाल लिए जाने के बाद हंसी अब स्वस्थ है और उसे हाल ही में एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया है। चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने इसे एक उपलब्धि बताया और सर्जरी टीम की सराहना की है। दंत चिकित्सा विभाग के हेड प्रो. आशी चुग के मार्गदर्शन में संपन्न हुई इस सर्जरी टीम में डाॅ. प्रेम कुमार राठौड़ के अलावा डॉ. आकांक्षा व्यास, डाॅ. नाजिश खान, डाॅ. रोहित लाल, डाॅ. अर्पणा महाजन और डाॅ. सिमरन शाह आदि शामिल रहे। 


इंसेट-

दंत चिकित्सा विभाग के अंतर्गत संचालित ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के सर्जन डाॅ. प्रेम कुमार राठौड़ ने बताया कि बस के नीचे खाई में गिरते समय दुर्घटना के दौरान चूड़ी के टुकड़े घायल की बांयी आंख की ऑर्बिट में घुस गए थे। इनमें से एक टुकड़ा 2.5 सेमी साईज का टुकड़ा था जो आँख के गोले (ग्लोब) व हड्डी के मध्य फंसा था। समय पर सर्जरी न होने से आँख की रोशनी भी जा सकती थी। उन्होंने बताया कि यह सर्जरी ट्रांस-कंजक्टाइवल तकनीक से 6 जनवरी को की गयी है। बतादें कि इस तकनीक में चीरा आँख के अंदर से लगाया जाता है और इससे आंख के आसपास की त्वचा पर कोई निशान भी नहीं पड़ता है। ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन ऑर्बिटल वॉल सर्जरी के विशेषज्ञ चिकित्सक होते हैं। ट्रांस-कंजक्टाइवल पद्धति द्वारा की जाने वाली सर्जरी इन्हीं विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा की जाती है। 


’’ ट्राॅमा सर्जन सहित ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के चिकित्सकों द्वारा किया गया यह कार्य सराहनीय है। एम्स ऋषिकेश में उच्च स्तरीय तकनीक आधारित आर्बिटल वाॅल सर्जरी सहित चेहरे के विभिन्न अंगों की सर्जरी की भी सुविधा उपलब्ध है। प्रत्येक रोगी का जीवन बचाना हमारी प्राथमिकता है। प्रयास है कि स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा करते हुए हम प्रत्येक गंभीर रोगी को बेहतर इलाज उपलब्ध करवा सकें। 

---------- प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश।

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