‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ ने दी कराहती सांसों को संजीवनी की सौगात
संसार भर में भारत की मानवतावादी नीतियों का डंका एक बार फिर बज उठा। श्रीलंका के बाढ पीडितों तथा अफगानिस्तान के मरीजों हेतु भारत ने खाद्यान्न और चिकित्सीय सामग्री सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की सहायता समय रहते पहुंचाकर लोगों का दिल जीत लिया है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की मानवीय सिद्धान्त पर विश्वास करने वाले भारत ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ को हमेशा ही अंगीकार किया जबकि अनेक देश निहित स्वार्थों के लिए जीवित जीवनियों को आतंकवाद की भेंट चढाने के षडयंत्र को ही अपना धर्म मानते हैं। अतीत में अनेक देशों से मिले कटुअनुभवों को भुलाकर वहां की कराहती मानवता की सहायता करने में देश निरंतर अग्रणीय रहा है। भारत की मानवीय सहयोग की मानसिकता के चन्द उदाहरण ही उसके देवत्व को स्थापित करने के लिए पर्याप्त है। कलुषित मानसिकता वाले तुर्किये का नाम इन उदाहरणों में सबसे ऊपर आता है। एहसान फरामोश तुर्किये ने पाकिस्तान के साथ जुगलबंदी करके ‘आपरेशन सिंदूर’ के दौरान शत्रुता की भूमिका का खुलकर निर्वहन किया था जबकि भारत ने प्रथम विश्व युद्ध से निर्मित समस्याओं से लेकर सन् 2023 में आयी प्राकृतिक आपदाओं तक में उसका भरपूर सहयोग किया था। सन् 1914 से लेकर 1918 तक चले प्रथम विश्व युद्ध के दौरान आटोमन साम्राज्य, जिसे वर्तमान में तुर्किये कहा जाता है, ब्रिटिश तथा उसकी सहयोगी सेनाओं से लड रहा था, तब भारत ने आटोमन साम्राज्य के समर्थन में ‘खिलाफत आन्दोलन’ चलाया था। उस समय आर्थिक मदद के अलावा भारतीय मेडिकल मिशन ने चिकित्सीय उपकरणों, दवाओं सहित इलाज हेतु चिकित्सकों का एक दल भेजा था जिसका नेतृत्व डा. एम.ए. अंसारी ने किया था। उस समय भारत स्वयं गुलामी की बेडियों मे जकडा था परन्तु स्वयं की परवाह न करते हुए तुर्कों की सहायता की थी। अगस्त 1999 में तुर्किये के मारमारा क्षेत्र में 7.6 तीव्रता का भूकंप आया जिसमें 17 हजार से अधिक लोगों की मौतें और लाखों लोग बेघर हो गये थे। तब भी भारत ने भारी मात्रा में राहत सामग्री, चिकित्सीय सहायता भेजी थी। साल 2020-2021 के दौरान कराहते तुर्किये को भारत ने जरूरी दवाइयां, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासिटामोल सहित ऑक्सीजन सिलेंडर, वैंटिलेटर, और मास्क आदि मेडिकल सामग्री मुहैया कराई थी। 'वैक्सीन मैत्री' के तहत भी तुर्किये को कोविशील्ड वैक्सीन की खेपें भेजी थी जबकि भारत स्वयं इस महामारी से जूझ रहा था। फरवरी 2023 में तुर्किये और सीरिया में 7.8 तीव्रता का भयानक भूकंप आया। इस आपदा में 50 हजार से अधिक अधिक मौतें हुईं, लाखों लोग बेघर हुए और भारी तबाही हुई। उस दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन दोस्त’ चलाया और राहत कार्यों के लिए 150 विशेषज्ञों के तीन दल भेजे थे जिसमें चिकित्सक, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल तथा सहयोग पार्टियां भेजीं थी। भारत के खोजी कुत्तों, बचाव उपकरणों खोजी विशेषज्ञों ने मलबे में फंसे अनगिनत लोगों की जान बचाई थी। भारतीय सेना ने 30 बेड का एक फील्ड हॉस्पिटल बनाकर अपनी 99 सदस्यीय मेडिकल टीम के द्वारा प्रभावितों को इलाज किया। तब देश से सैकडों टन राहत सामग्री एवं चिकित्सीय सामान लेकर भारतीय वायुसेना के C-17 और C-130 विमानों ने तुर्की की उडान भरी थी। उस समय वहां की जनता और सरकार ने भारतीय सहायता की प्रशंसा में जमकर कसीदे पढे थे परन्तु दोगली नीतियों का सिरमौर बनकर उसने भी भारत की पीठ में छुरा भौंकने की कोशिशें की। इसी तरह रोहिंग्याओं की समस्या के जनक म्यांमार के सागाइंग, मांडले, मैगवे, शान, पी ताव और बागो में विगत 28 मार्च 2025 को तीव्र भूकंप आया था। वहां सहायता पहुंचाने वालों में सबसे ऊपर भारत का नाम अंकित है जिसने ‘आपरेशन ब्रहमा’ तहत भूकंप प्रभावितों हेतु भारतीय वायुसेना के शक्तिशाली सी-17 विमानों द्वारा हवाई मार्ग से, भारतीय नौसेना के आईएनएस करमुक, लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी, आईएनएस सतपुड़ा, आईएनएस सावित्री, आईएनएस घड़ियाल जहाजों से समुद्री मार्ग से 900 टन से अधिक राहत सामग्री तत्काल पहुंचाई थी। भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड की ‘एयरबोर्न एंजेल्स’ विशिष्ट टीम, इंडियन आर्मी फील्ड हॉस्पिटल यूनिट के 118 सदस्यों की सेवाओं वाला 200 बिस्तर युक्त अतिआधुनिक फील्ड अस्पताल, आपदा प्रबंधन में महारत रखने वाले खोजी एवं सहायता दल पहुंचाये थे जिनकी सेवाओं ने पीडितों को तत्काल राहत पहुंचाई थी। इसी तरह से अब अफगानिस्तान तथा श्रीलंका में भी भारतीय वायुसेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान भरकर राहत सामग्री लेकर देवदूत की तरह पहुंच गये। वहां के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान खेलने लगी। अफगानिस्तान को 73 टन चिकित्सीय सामान भेजा है जिसमें जीवन रक्षक दवाएं, वैक्सीन, एंटी-वायरल दवाएं, सर्जिकल उपकरण, अस्पतालों के लिए जरूरी दवाइयां और अन्य चिकित्सा सामग्री शामिल है। उल्लेखनीय है कि इसी समय पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है जिससे दौनों देशों के मध्य तनाव चरम सीमा पर पहुंचता जा रहा है। आतंकी हमलों पर आरोपों-प्रत्यारोपों का बाजार गर्म है। पाकिस्तान अपनी चरमपंथी नीतियों के तहत कट्टरता की आड में आतंक को संरक्षण देने के लिए समूचे संसार में जाना जाता है। भारत की मानवीय सहायता को लेकर पाक सरकार के उत्तरदायी लोग विकृत बयानों द्वारा परिभाषित कर रहे हैं। दूसरी ओर अफगानिस्तान के नागरिकों की आभार भरी टिप्पणियों के अलावा वहां के विदेश मंत्रालय ने इस सहायता को अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया। इसी तरह अक्टूबर 2025 में भी भारत ने अफगानिस्तान को अतिआधुनिक उपकरणों से युक्त 20 एम्बुलेंस, भारी मात्रा में चिकित्सीय उपकरण देने के साथ-साथ छह नई स्वास्थ्य परियोजनाओं की घोषणा थी। वही दूसरी ओर श्रीलंका में हफ्तों से हो रही भारी बारिश और बाढ़ से एक बडा भूभाग प्रभावित हो रहा है जिससे हजारों लोगों के सामने जीवन की आधारभूत सुविधाओं का टोटा पडा है। भूस्खलन, बाढ और निरंतर हो रही बरसात से कई क्षेत्रों में घर डूब गए, सड़कें टूट गईं और प्रभावित क्षेत्रों के वासिन्दे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इस प्राकृतिक आपदा में भारत ने तुरंत अपनी वायुसेना के सी-130जे विमान से 15 टन से अधिक राहत वहां के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केन्द्र को सौंपी जिसमें टेंट, तारपोलीन शीट्स, कंबल, हाईजीन किट, पानी शुद्ध करने की गोलियां, सोलर लैंप और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल हैं। श्रीलंका में बारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। डेढ़ लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। भारत की दरियादिली और मानवतावादी विचारधारा ने हमेशा ही कराहती सांसों को संजीवनी की सौगात भेंट की जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। वह दिन दूर नहीं जब इस तरह के सकारात्मक कृत्यों से भारत एक बार फिर विश्वगुरु के सिंहासन पर आसीत होगा। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।
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