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राकेश राठौड़ भले ही ईश्वर को प्यारे हो गए, परंतु वे आज भी एक आम सिपाही की यादों में जिंदा है। जिंदा हैयह बताने के लिये कि उनके साथ क्या हुआ, जो नही होना चाहिए था। जिंदा है हर उस सिपाही को सम्मान दिलाने के लिये जो सेवा के दौरान भी मृत्यु होने पर शहीद नही बन पाया। जिंदा है ,शहीद सिपाहियों  के परिवारों को उनका हक दिलाने के लिये।


असल मे हमारी आत्मा मृत हो गयी है। राकेश अपनी ड्यूटी से लौटते हुए दुर्घटना के शिकार हो गए,परंतु उपस्थित सोशल मीडिया के कारिंदे उनकी वीडियो बनाते रहे, न कोई पुलिस ,न कोई एम्बुलेंस ना अस्पताल , आखिर क्या सोचा उस सिपाही ने इस बीच…....

Rakesh rathore



"मैं राकेश राठौड़ हूँ। मैं उत्तरखंड पुलिस में 2001 का सिपाही हूँ। पहला सिपाही बैच था मेरा। कल सुबह सड़क हादसे में मैं मर गया। मैं सड़क पर तड़पता रहा और मेरा साथी सिपाही मेरी वीडियो बनाता रहा। शायद मैं दम ना तोड़ता अगर कोई बड़ा अधिकारी या कोई नेता-मंत्री होता। शायद, अगर कुत्ता-बिल्ली-गांय भी होता तो मेरी आवाज़ उठाने सैंकड़ो लोग सड़कों पर उतर आते। पर मेरा दुर्भाग्य देखिए कि मेरा सिपाही साथी ही जेब में हाथ डाल मेरी मदद को कतराता रहा। मैंने बहुत कोशिश की स्वयं उठने की पर शरीर जवाब दे गया, मैं वीडियो बनाने वालों से विनती करता रहा कि मुझे उठा लो पर कोई नही आया। मैं तड़पता रहा और अन्तः दम तोड़ गया। 

मेरी मौत की नुमाईश पूरी की गई। सर्वप्रथम Dehradun Police नामक पेज ने मेरी मौत के कुछ घण्टे बाद ही एक मार्मिक पोस्ट कर मेरी मौत को बेच दिया। बहुत सारे like-comment भी आये। अधिकांश लोगों ने ॐ, ॐ शांति, अत्यंत दुखद, RIP जैसे कमेंट लिखे। शीघ्र ही यह पोस्ट Uttarakhand Police के पेज पर तैर गयी। हज़ारो लोगों ने फ़ेसबुकिया आँसू बहाये और अन्तः मेरा शरीर पुलिस लाइन देहरादून में आ गया।

ज़िन्दा रहते तो इज़्ज़त ना के बराबर ही मिलती है सिपाहियों को तो सोचा मेरी मौत को सोशल मीडिया में बेचने वाले पुलिस अधिकारी शायद कुछ इज़्ज़त देने पुलिस लाइन आएंगे। शायद, कोई पुष्प गुच्छ चढ़ाएंगे, शायद दो मिनट का मौन रखेंगे। अगर मैं सेना में सिपाही होता और किसी सड़क हादसे में मर गया होता तो राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद मेरी लाश की सेल्फी को तरस रहे होते पर मैं तो उत्तराखंड पुलिस का सिपाही हूँ तो कोई नही आया।

मेरी लाश पुलिस लाइन देहरादून में पड़ी रही पर  DIG, SSP, SP या कोई भी अधिकारी मुझे देखने नही आया। आज माननीय मुख्यमंत्री का कार्यक्रम पुलिस लाइन में ही था, सभी अधिकारी एक माह से उसी तैयारी में थे। पर मेरी लाश पर शोक जताने का समय इन अधिकारियों को नही मिला होगा। मैं समझ सकता हूँ।

बहरहाल, विनती यह है कि मेरे परिवार को परेशान ना किया जाए और जो भी मुआवज़ा मुझे मौत के उपरांत मिलना था वो तत्काल मेरे परिवार को दे दिया जाए। 


 प्रार्थना है कि आज के बाद सोशल मीडिया में सिपाहियों को हीरो बनाना बन्द करो ,पुलिस अधिकारियों।

उपर्युक्त पोस्ट पुलिस के उन सिपाहियों के मन के उदगार है जो सच मे सेवा करते है।

 



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