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 हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत श्री भोले जी महाराज एवं माताश्री मंगला जी किया हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के संशोधित नाम का अनावरण


पौड़ी जनपद के पोखड़ा ब्लॉक के धैड़गांव में संचालित हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के संशोधित नाम का बुधवार को हंस फाउंडेशन के प्रेरणास्रोत श्री भोले जी महाराज,माताश्री मंगला जी,विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर शिव कुमार गुप्ता ने  महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के रूप में किया।





इस मौके पर माताश्री मंगला जी ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों को अभिनंदन करते हुए महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रोफेसर शिव कुमार गुप्ता को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड के इस सुदुर पर्वतीय क्षेत्र में स्थापित महाराज अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय ‘शिक्षार्थ आइए सेवार्थ जाइए’ की परिकल्पना को साकार कर रहा है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि आज पहाड़ के इन दूरस्थ क्षेत्रों में जिस तरह से निरंतर गांव-खेत-खलिहान खाली होते जा रहे है,आज जरूरत हैं कि इन गांवों-खेत-खलिहानों को बचाया जा सके,निरंतर हो रहे पलायन को रोकने के लिए प्रयास किए जाए और यह सब तभी होगा। जब हम सब मिलकर पहाड़ पर स्वरोजगार और रोजगार के अलग-अलग साधन उपलब्ध कराएंगे।

माताश्री मंगला जी कहा कि आज हम यहां आकर बहुत प्रसन्न हैं। यह भूमि श्री भोले जी महाराज जी की जन्म भूमि हैं। इस भूमि में शिक्षा के फलक पर इतनी बड़ी सेवा हो रही है। इसके लिए हम शिव कुमार गुप्ता जी को बधाई देते हैं कि आपने पहाड़ के इस दूरस्थ क्षेत्र में 2017 में शिक्षा का जो वृक्ष लगाया था। उस वृक्ष की छाया में आज असंख्य बच्चे अपने जीवन की नयी यात्रा के लिए शिक्षित हो रहे है और अपने सपनों की परिकल्पना को साकार कर रहे है।

माता मंगला जी ने कहा कि स्वास्थ्य-शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्याल को कभी भी सेवाओं की आवश्यकता होगी तो,हंस फाउंडेशन हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा। माताश्री मंगला जी ने कहा कि यह बहुत ही खुशी के बात हैं कि इस विश्वविद्यालय में स्नातक,स्नातकोत्तर,पीएडी,होटल मैनेजमेंट,कंप्यूटर,कृषि,फर्मेसी, पैरामेडिक और फैशन डिज़ाइन,खेल-कूद जैसे पाठ्यक्रम एक छत्त के नीचे पढ़ाए जा रहे है। निश्चित तौर आधुनिक शिक्षा पद्धति के इस दौर में इस तरह के विषय रोजगार प्रदान करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 

उन्होंने कहा कि हमार उद्देश्य हैं कि पहाड़ के आखिर पटल तक शिक्षा की अलख जगे और इस अलख से हमारे बच्चों का भविष्य संवरे। मुझे आपको बताते हुए खुशी हो रही हैं कि हम हंस फाउंडेशन के माध्यम से स्वास्थ्य-शिक्षा के क्षेत्र में देश के 28 राज्यों में निरंतर सेवाएं दे रहे है। उत्तराखंड में हमारी जो सेवाएं चल रही है। उनके बारे में आप जानते ही होंगे। उन्होंने कहा कि हम शिक्षा के क्षेत्र में राज्य में निरंतर सेवाएं प्रदान कर रहे है। हंस फाउंडेशन ‘सरस्वती विद्या मंदिर’ और ‘सरस्वती शिशु मंदिर स्कूलों’ के साथ-साथ देश के दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों तक बच्चे स्कूल पहुंच सकें। इसके लिए इन स्कूलों को निरंतर स्कूली बच्चों के स्कूल आवगमन के लिए स्कूल बसें प्रदान की जा रही है। 

माता मंगला जी ने कहा कि फाउंडेशन उन बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सहयोग प्रदान कर रही है। जो किसी भी दिक्कत के चलते अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते है। इन बच्चों में इंजिनियर,मेडिकल और तमाम दूसरे कोर्सों कर रहे पढ़ाई पूरी हो। 

इस मौके पर माताश्री मंगला जी महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के छात्रा-छात्राओं को आशीष देते हुए कहा कि आपको शिक्षा के क्षेत्र में कभी भी किसी भी तरह की मदद की आवश्यकता हो तो,आपकी शिक्षा की यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए हंस फाउंडेशन हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा।

इस अवसर महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रोफेसर शिव कुमार गुप्ता ने माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले महाराज एवं कार्यक्रम में उपस्थित तमाम अतिथिगणों,ग्रामीणों और छात्रा-छात्राओं का अभिवादन करते हुए कहां कि आज हमारे विश्वविद्याल की परिकल्पना साकार हो गई है। हमारे लिए यह बहुत ही गौरव का क्षण हैं कि माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज का आशीष आज हमारे विश्वविद्याल को मिला है। 

प्रोफेसर शिव कुमार गुप्ता ने कहा कि हमारे विश्वविद्याल के बच्चों को और हमें हंस फाउंडेशन का सहयोग निरंतर मिल रहा है। इसके लिए हम माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज का कोटि-कोटि आभार व्यक्त करते है।

कार्यक्रम में उपस्थिति पोखड़ा महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह रावत ने इस मौके पर कहा कि माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी के सानिद्य में देश के साथ-साथ उत्तराखंड में स्वास्थ्य-शिक्षा,दिव्यंगता,रोजगार,पलायन,पेयजल, कृषक कल्याण,समाज कल्याण,महिला सशक्तिकरण,ग्रामीण विकास,बाल विकास व ऊर्जा आदि क्षेत्रों में जो सेवाएं प्रदान की जा रही है। इससे यकीनन राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की आबादी के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार आया है।

श्री रावत ने कहा की कोरोना संक्रमण के क्षेत्र में हंस फाउंडेशन की इस क्षेत्र के दूरगामी गांवों तक जिस तरह से सेवाएं पहुंचाई गई। उसे आप सभी ने देगा है। फाउंडेशन ने गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं,जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री और वह तमाम दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाई। जिसका सुखद परिणाम रहा कि इस क्षेत्र में कोरोना महामारी से जल्द से जल्द मुक्ति मिली। इन सेवाओं के लिए मैं पूरे क्षेत्र की जनता की तरफ से पूज्य माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज का आभार व्यक्त करता हूं।

इस मौके पर माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी ने उत्तराखंड के मशहूर संगीतकार अनिल बिष्ट के गीत अपणी बोली भाषा (दूध बोली) तै सत सत नमन का लोकार्पण भी किया।

कार्यक्रम में महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर एन.के.सिन्हा,कुल सचिव प्रोफेसर पी.के.डे,एसडीएम सतपुली सन्दीप कुमार और सतपुली थाना प्रभारी लाखन सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। कार्यक्रम का मंच संचालन गणेश खुगशाल गणी ने किया।

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