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  ऋषिकेश : 

उत्तम सिंह



उत्तराखंड राज्य को बने 21  साल हो चुके है । लेकिन आज भी उत्तराखंड मे  स्वास्थ्य सेवाएं बदाल हालत मे है । जहां एक 14 दिन के  नवजात शिशु को समय ईलाज ना मिलने से  मौत हो गयी है । कहने को उत्तराखंड मे एक से बढकर एक बडे अस्पताल है ।लेकिन  जहां बच्चे के साथ रेफर- रेफर खेल चलता  रहा ।. हम बात कर है ।भानियावाला विस्थापित  निवासी विनोद असवाल जिनके बेटे का जन्म 28  फरवरी को हिमालय अस्पताल ,जौलीग्रांट मे हुआ था। जन्म के समय माँ और बच्चा दोनो स्वस्थ थे । जब पाँच दिन के बाद बच्चे की तबीयत खराब होने  लगी ,तो तुरन्त हिमालयन अस्पताल ,जौलीग्रांट मे भर्ती करवाया । 

वहां पर बच्चे को वैनटीलेटर में रखा गया और डॉक्टर द्वारा बताया गया की बच्चे को पीलिया और निमोनिया हो गया है । जिसमें  उसका इलाज शुरू किया गया।  इलाज के दौरान बीच में बताया गया कि बच्चा अब ठीक ठाक है ।  12 मार्च 2022 को डॉक्टर द्वारा कहा गया की बच्चे के दिल में दिक्कत है । उसके दिल की बनावट सही नही है उसके दिल को ऑक्सीजन नही मिल रही है।  डॉक्टर ने तुरंत रात को कहा कि इस बच्चे का ऑपरेशन होगा । इसका ईलाज यह नहीं हो सकता । इसको एम्स  या PGI चंडीगढ़ ले जाओ।  वहीं पर इसका इलाज होगा, फिर रात्रि  मे  ही बच्चे को लेकर PGI चंडीगढ़ ले गये । लेकिन  वहां पर भी वेनटीलेटर नही मिला, और वहां के डॉक्टर ने ये कहा की इसका अभी आप्रेशन नहीं होगा, अभी तो बच्चे की रिकवरी की जाएगी l 

परिजन को PGI के डाक्टरों ने   बताया कि पहले रिकवरी होगी फिर आप्रेशन  होगा l फिर  बच्चे को वापस देहरादून ले आए और उसको एम्स , ऋषिकेश ले गये  पर वहां पर उसको भर्ती करने से मना किया गया, फिर किसी तरह से उसको आपातकालीन में रखा गया, पर वहां पर भी बच्चे की  बीमारी का इलाज नहीं था। ये बात वंहा के इमरजेंसी स्टाफ ने कही  l परिजनों ने एम्स  डॉक्टरों से गुजारिश की , इसको किसी भी तरह वेनटीलेटर में रख दीजिए, ताकि हम एक अच्छे हॉस्पिटल में अरेंजमेंट कर सके क्योंकि बच्चा बहुत ही नाजुक स्थिति में था ।  उसको वेनटीलेटर की जरूरत थी , पर हॉस्पिटल वालों ने कहा की हमारे यहां जगह नहीं है और न ही वेनटीलेटर है , तो हमने देहरादून के कई हॉस्पिटल में भी पता किया की इस बच्चे का इलाज हो सकता है पर सभी ने माना कर दिया, आखिर में परिजन  बच्चे को लेकर मैक्स अस्पताल  देहरादून गए, रास्ते में बच्चे के मुंह में लगी नली थोड़ी सी निकल गई थी उसको सांस लेने में परेशानी हो रही थी । परिजन ने मैक्स अस्पताल   के डॉक्टरों से कहा की इसकी नली को ठीक कर दीजिये । परिजन  उनसे बार बार गुजारिश की पर उन्होंने मना कर दिया कहा की हम बच्चे को नही देख सकते । कहा हमारे अस्पताल बच्चों के हार्ट का डाक्टर नही है । जहां  रास्ते में ही उस 14 दिन के नवजात शिशू ने दम तोड दिया ।  परिजन  पवन लिगवाल ने मीडिया को बताया । कि एम्स ,ऋषिकेश, जौलीग्रांट अस्पताल ,मंहत इन्द्रेश अस्पताल, सनर्जी अस्पताल, मैक्स अस्पताल ने कहा  की हमारे यहां पर  शिशु हृदयरोग विशेषज्ञ नही है  । अब जहां उत्तराखंड मे खुले अस्पतालो की हकीकत यही बया कर रही है । आज भी ईलाज के लिये दिल्ली और चण्डीगढ़ जाना पडेगा । जहां अस्पतालो मे नौसिखिया डाक्टर की लापरवाही से बच्चे की जान गयी है ।

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