प्रतीक बहुगुणा का जन्म एक मध्यमवर्गीय और सैनिक परिवार में हुआ उनके पिता जी श्री गणेश शंकर बहुगुणा उत्तराखंड पुलिस में 38 वर्ष सेवाएं दे चुके है ।
और उनके एक चाचा श्री अजय बहुगुणा सीमा सुरक्षा बल में अभी सेवाए दे रहे है दूसरे चाचा असम राइफल में अपनी सेवाएं दे चुके है.प्रतीक बहुगुणा ने सरस्वती विद्या मंदिर उधम सिंह नगर से अपनी शिक्षा ली. उसके बाद वो अपने गांव रामनगर डांडा वापस आए.ओर उन्होंने फिर हिमालयन इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट से अपनी 3 वर्ष की डिग्री ली और देश के विभिन्न हिस्सों में काम किया. प्रतीक शुरू से ही अपने दादा जी स्वर्गीय श्री रविन्द्र दत्त बहुगुणा गुरु जी के विचारो से प्रेरित थे और समाज हित के लिए कुछ करना चाहते थे.प्रतीक की शिक्षा हिंदी मीडियम स्कूल से हुई और जब प्रतीक नोकरी कर रहे थे तब उन्हे ये प्रतीत हुआ की क्या केवल अंग्रेजी बोलने वाले और उच्च घर के बच्चे ही अच्छे पद पर हो सकते है.
तभी से उन्होंने ये ठाना की पहले वो स्वयं कुछ अच्छा करेंगे और फिर अपने पहाड़ के भाईयो और बहनों को भी आगे बड़ने के लिए प्रेरित करेंगे.मात्र 33 वर्ष की आयु में होटल में प्रबंधक बने.थानों के सीरियो गांव में होम स्टे डिंड्याल्ली भी संचालित करते है और अपने गांव के युवकों के साथ साथ उत्तराखंड के पहाड़ी छेत्र के और भाईयो को भी सुझाव देकर स्वावलंबी बनाने का प्रयास करते है.
हसमुख मिलनसार और सदेव समाज हित के लिए काम करने वाले प्रतीक का मानना है की हमारे पहाड़ ने बहुत बड़े बड़े दिग्गज भारत वर्ष को दिए है.प्रतीक बहुगुणा स्वर्गीय श्री सुंदर लाल बहुगुणा के जीवनी पड़ते और उनका प्यार प्रयावरण ओर पशु पक्षियों से लगातार बढ़ता रहा और इसी प्यार ने उन्हे जोली ग्रांट एयरपोर्ट पर सरकार द्वारा काटे जा रहे ।
हजारों पेड़ो को बचाने के लिए बड़ा व्यापक चिपको आंदोलन किया जिसका समर्थन हजारों लोगों ने वहा आकर और पूरे देश ने सोशल मीडिया के माध्यम से किया और इस आंदोलन को सफल बनाया और पेड़ो को कटने से रोका.पर्यटन छेत्र से जुड़ा होने के कारण प्रतीक चाहते है कि उत्तराखंड में अगर पर्यटन बड़ेगा तो पलायन भी रुकेगा और हर पहाड़ी स्वावलंबी बनेंगा.
इसी विचारधारा को रखकर प्रतीक बहुगुणा इस बार डोईवाला विधानसभा सीट से उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से चुनाव लड़ रहे है और समाज में और कुछ अच्छा करने लिए सभी को प्रेरित करते रहेंगे अब जनता के हाथ में है की वो सत्तधारी और बहुत संपति वाले नेता जी को वोट देंगे या एक अच्छी विचारधारा वाले मध्यम वर्गीय युवक को फैसला जनता जनार्दन का है.
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