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सत्यवाणि  ब्यूरो ,हरिद्वार 



 एस.एम.जे.एन. पी.जी. काॅलेज में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस के अवसर दिवस पर प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा, डाॅ. सरस्वती पाठक, डाॅ. संजय कुमार माहेश्वरी, डॉ जे सी आर्य विनय थपलियाल आदि  ने काॅलेज में निर्मित शौर्य दीवार पर शहीदों को नमन किया।


इस अवसर पर काॅलेज प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष श्रीमहन्त रविन्द्र पुरी जी महाराज का संदेश प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा ने सुनाया। श्रीमहन्त ने राज्य स्थापना दिवस की बधाई देते हुए अपने बधाई संदेश में कहा कि सर्वप्रथम मैं राज्य आन्दोलनकारियों को प्रणाम करता हूं जिनके बलिदान और साहस के बिना उत्तराखण्ड राज्य के सपने को साकार करना सम्भव नहीं था। उन्होंने कहा कि  उत्तराखण्ड ने बहुत तीव्र गति से विकास किया है। श्री महन्त ने कहा कि प्रगति के पथ पर अग्रसर, प्राकृतिक सम्पदा और नैसर्गिक सौन्दर्य से भरपूर यह प्रदेश ऐसे ही विकास की नित नई ऊंचाईयों को छूता रहे। उन्होंने युवाओं से प्रदेश के विकास में सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि सभी प्रदेश के समग्र विकास और समृद्धि हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। 


काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा ने राज्य स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश का निर्माण कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात् भारत के 27वें गणराज्य के रूप में किया गया था। उन्होंने कहा इन 21 वर्षों के सफर में कई मुकाम हासिल किये, अनेक सफलतायें प्राप्त की तथा अनेक नई राह तलाश करने का दौर जारी है।


 डाॅ. बत्रा ने कहा कि युवाओं के सपनों का प्रदेश बनाने के लिए हम सभी राज्यवासियों को तन-मन-धन से राज्य हित में कार्य करना होगा। 

मुख्य अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है और यहाँ के स्वादिष्ट भोजन, बुंरास का पेय देश में तीव्र गति से लोकप्रिय हो रहें हैं। 



मुख्य अनुशासन अधिकारी डाॅ. सरस्वती पाठक ने अपने सम्बोधन में कहा कि राज्य स्थापना का आन्दोलन ही था जिसमें राज्य ने अपनी मातृशक्ति की ताकत का अहसास किया और युवाओं के उत्साह को भी स्वीकारा। उन्हांेने कहा कि उत्तराखण्ड देश के सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक है तथा ईश्वर और प्रकृति दोनों के करीब है। 



इस अवसर पर काॅलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न प्रस्तुति दी गयी जिसमें मुस्कान व ममता द्वारा माँ सरस्वती वंदना, ‘देश हमें देता है, मुकुल ने ‘देश मेरे तेरी शान पे सदके’, शीना भटनागर द्वारा ‘हुस्न पहाड़ों का क्या कहना मौसम’, मेहताब आलम ने ‘ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज दे’, अनन्या भटनागर ने ‘जैसे सूरज की गर्मी से’, पंकज भट्ट द्वारा ‘उत्तराखण्ड मेरी मातृभूमि’, आदि गढ़वाली व कुमाऊनी गीतों को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विनय थपलियाल द्वारा उत्तराखण्ड राज्य से सम्बन्धित क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें ममता, सोनी, उदित, रिचा कश्यप, अनन्या शाह, तनीषा कोटवाला, उदित को पुरस्कृत भी किया गया।  


कार्यक्रम में डाॅ. जगदीश चन्द्र आर्य, डाॅ. सुषमा नयाल, डाॅ. अमिता आदि उपस्तिथ थे।

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