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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दी है। अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि किसी भी देश की मातृभाषा ही अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं से जोड़ने में मददगार होती है। आज वैश्विक स्तर पर भी हिन्दी भाषा की स्वीकार्यता बढ़ी है।

       उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा का और तेजी से प्रचार-प्रसार हो, इसके लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने सभी से अपने दैनिक जीवन में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने की भी अपेक्षा की है।


देशभर में आज हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने देवनागरी में लिखी गई हिंदी को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया। आज, हिंदी दुनिया में व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और 520 मिलियन से अधिक लोगों की पहली भाषा है।

सरकार ने राजभाषा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर हिंदी को अच्छी तरह से प्राप्त किया जा रहा है। भारत की संविधान सभा द्वारा, 14 सितंबर, 1949 की बैठक में देवनागरी लिपि में हिन्दी भाषा को भारत संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा, के सुझाव पर इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को याद रखने और हिन्दी के प्रसार के लिए सन् 1953 से 14 सितंबर को हिन्दी-दिवस मनाया जाता है। हिंदी को संघ की राजभाषा बनाने के संविधान सभा के निर्णय के पीछे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनमानस को जोड़ने में हिन्दी का महत्वपूर्ण योगदान था।


      महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस और आचार्य काका कालेलकर की अपनी भाषाएं गुजराती, बंगला और मराठी थीं। लेकिन उन महापुरुषों ने हिन्दी भाषा में देश को जोड़ने की ताकत को पहचाना था। स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान इन महापुरुषों के नेतृत्व में वर्धा में राष्ट्र भाषा प्रचार समिति की स्थापना की  गई थी।

      उनसे भी पहले स्वामी दयानन्द सरस्वती, ऐनी बेसेंट तथा केशव चंद्र सेन जैसी विभूतियों ने हिन्दी भाषा को जन-जागरण का माध्यम बनाने पर ज़ोर दिया था, जबकि उनकी मातृ-भाषा भी हिन्दी नहीं थी। आजादी के बाद, इस जन भाषा का सफल उपयोग मराठी भाषी आचार्य विनोबा भावे ने भूदान आंदोलन के दौरान किया था।
हिंदी भाषा के महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ हर भारतीय भाषा में उपलब्ध है और पढ़ी जाती है। हमारे संविधान की भाषा सूची में हिन्दी समेत 22 भारतीय भाषाएँ हैं। साथ ही संविधान में हिन्दी के प्रसार और विकास के लिए कुछ निर्देश दिये गये हैं। इन निर्देशों के अनुसार विकसित करने से हिन्दी भाषा भारत के कम्पोजिट कल्चर (सामासिक संस्कृति) को व्यक्त करने में अधिक समर्थ हो सकती है।

दूसरी भारतीय भाषाओँ को बोलने वाले हमारे देशवासी उत्साह के साथ हिंदी को अपनाएं इसके लिए हिंदी भाषी लोगों को पहल करनी होगी। जब हिंदी भाषी लोग दूसरी भारतीय भाषाओं को सीखेंगे तो दूसरे भी हिंदी सीखने के लिए उत्साहित होंगे।

पूरी दुनिया को एक परिवार समझने वाली 'वसुधैव कुटुंबकम' की उदार भावना हिन्दी भाषा के स्वरूप का हिस्सा है। देश-विदेश की अनेक भाषाओं और बोलियों से ग्रहण करने की क्षमता हिन्दी भाषा में है। इस क्षमता का हमें पूरा उपयोग करना चाहिए। हिन्दी अनुवाद की नहीं बल्कि संवाद की भाषा है। किसी भी भाषा की तरह हिन्दी भी मौलिक सोच की भाषा है।


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