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आज दिनांक 24 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद श्री शिवराम हरी राजगुरु जी की वर्षगांठ प्रदेश कांग्रेस सेवादल कार्यालय पर मनाई गई वह राजगुरु जी के संदर्भ में जानकारी देते हुए प्रदेश महासचिव नीरज त्यागी जी ने बताया भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी आहुति देने वाले अमर शहीद श्री शिवराम राजगुरु  कि आज 113 वर्षगांठ है



 श्री शिवराम राजगुरु जी का जन्म 24 अगस्त 1908 को हुआ था । राजगुरु कांग्रेस सेवा दल की भी स्वयंसेवक रहे, वाराणसी में पढ़ाई के दौरान राजगुरु की मुलाकात चंद्रशेखर आजाद से हुई, उनके विचारों से बहुत प्रभावित हुए और 1924 में उनके संगठन "हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन "के सदस्य बन गए, इन्होंने पंजाब लाहौर आगरा कानपुर आदि शहरों में घूम घूम कर अपने संगठन से लोगों को जोड़ा , संगठन में भगत सिंह सुखदेव और यतींद्र नाथ इनके काफी अच्छे मित्र थे।

 साल 1928 में अंग्रेजों ने भारत में राजनीतिक सुधारों के लिए साइमन कमीशन का गठन किया । लेकिन इसमें एक भी भारतीय नेता को शामिल नहीं किया इसलिए आयोग का बहिष्कार पूरे भारत में  लाला लाजपत राय के नेतृत्व में हो रहा था। तभी क्रूर पुलिस सुपरिटेंडेंट जेम्स ए स्कॉर्ट ने लाठीचार्ज का आदेश दे दिया खूब लाठियां चली और लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हो गए और 18 दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई। 

लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए राजगुरु और उनके साथियों ने 17 दिसंबर 1928 को लाहौर जिला #पुलिस मुख्यालय के बाहर जेम्स ए स्कॉर्ट को मारने का प्लान बनाया परंतु उनकी जगह एक आयुक्त जान पी साण्डर्स को मार दिया ।

 जब वे नागपुर से पुणे जा रहे थे । तभी अंग्रेज अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया उधर भगत सिंह और सुखदेव की गिरफ्तार हो चुके थे तीनों को जान पी साण्डर्स की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई , 23 मार्च 1931 को इंकलाब जिंदाबाद के नारों के साथ राजगुरु सुखदेव और भगत सिंह एक साथ फांसी पर चढ़ गए अंग्रेजों ने विद्रोह के डर से तीनों क्रांतिकारियों का अंतिम संस्कार कर अस्थियां सतलज नदी में बहा दी उत्तराखंड कांग्रेस सेवा दल के समस्त कार्यकर्ता और पदाधिकारी उनकी वर्षगांठ के अवसर पर उन्हें अपनी पुष्पांजलि श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।

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