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जौनसार बाबर का पहला महासू देवता मंदिर हनोल जहां हमारे प्राचीन काल से ही आस्था का देव स्थल रहा। उत्तर प्रदेश राज्य से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह हनोल तीर्थ स्थल पर्यटक की दृष्टि और भी अधिक प्रसिद्ध हुआ है। जहां पर देश के विभिन्न प्रदेशों से श्रद्धालु लोग देव दर्शन के लिए आते है। हनोल देव तीर्थ स्थल के पवित्र थान में श्रद्धालु लोग जो दूर से आते है, उन श्रद्धालुओं की कुछ श्रद्धा व मंनतें होती है कि मंदिर के द्वार में एक-दो दिन ठहरकर हम अपने जीवन के लिए स्वस्थ व खुशहाली की मनोकामनाएं की दुआ करते है। लेकिन देव स्थल के द्वार में श्रद्धालुओं से रात के विश्राम करने पर ओढ़ने के लिए एक कंबल का चार्ज पांच रूपये  है। जो मंदिर समिति के नियम से तहत है। रात को रूकने वाले श्रद्धालुओं से एक कंबल का चार्ज पांच रूपये की जगह 10 रूपये वसूला जा रहा है। 


अगर पर्ची में 5 रूपये चार्ज एक कंबल का दर्शाया गया है, फिर 10 रूपये चार्ज किस बात का वसूला जाता है। हां अगर मंदिर समिति के द्वारा यदि जो रात्रि। विश्राम के लिए श्रद्धालुओं से एक कंबल के पर्ची कटने का जो चार्ज 10 रूपये लिया जाता है। अगर यह 10 रूपये चार्ज पर्ची में भी दर्शाये या लिखे होते, जो श्रद्धालुओं के जेब से एक कबंल के पीछे 5 रूपये की पर्ची के जगह 10 रूपये लिए जाते है तो एक कंबल के पीछे वह 5 रूपये अधिक वसूले जाते है तो  वह 5 रूपये कहां जाते है?भगवान के द्वार में यदि दो साल से श्रद्धालुओं से इसी तरह की 5 रूपये की पर्ची से 10 रूपये हड़पे जाते है। इसका कारण है कि श्रद्धालुओं से कई ना कई अवैध रूप से वसूली की जाती है। 


बाहर से आये देव दर्शन के लिए तीर्थ यात्रियों के लिए जो शौचालय बना है उसमें भी पानी की व्यवस्था तक नहीं है, और शौचालय में यदि एक बार कोई व्यक्ति टॉयलेट करने जाता है और उस शौचालय में पानी की व्यवस्था तक नहीं है, और उसके बाद  दूसरा कोई व्यक्ति शौचालय में जायेंगा, जब उसमें पानी तक की व्यवस्था नहीं तो यात्रियों को कितनी परेशानियां होती होगी है। जोकि टॉयलेट, बाथरूम में उसकी स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। जिसके साफ-सफाई के लिए कोई कर्मचारी नहीं। टॉयलेट, बाथरूमों में अंदर तक कोई कुंडी लगने तक की व्यवस्था नहीं है, जहां तक कि यात्रिक महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा दिक्कतें हुआ करती होगी। 


जब अंदर टॉयलेट, बाथरूमों में कुंडी लगने तक की व्यवस्था नहीं है। उसके साफ-सफाई के लिए कोई कर्मचारी तक नहीं है कि वहां पर मंदिर में ठहरने वाले श्रद्धालुओं के लिए फिर क्या उचित व्यवस्था के इंतजाम है, कुछ भी नहीं है ? जो यात्रियों के मुताबिक पहले व्यवस्था के उचित इंतजाम होने चाहिए थे। जब टॉयलेट, बाथरूमों की हालत भी ठीक नहीं है। जो वहां पर सबसे पहले यात्रियों के लिए उचित व्यवस्था ठीक होनी चाहिए थी। ऐसे में जो पर्यटक लोग वहां पर ठहरने के उद्देश्य से भी आते है और उन्हें कोई खास सुविधा न मिलने पर उनसे मंदिर समिति के द्वारा तह मूल्य से अधिक यात्रियों के मुताबिक जरूरत वस्तुओं के दामों की अधिक वसूली कि जा रही है फिर वह किस बात की।


 मंदिर परिसर में यदि श्राद्धलुओं से इस तरह वसूली की जा रही है, तो लोग आज भी ईश्वर की आस्था के नाम पर भी कई ना कई छल कर रहे है। छल करने वाले लोगों को जिनको कि ईश्वर के आस्था के परिसर पर भी डर नाम का कोई ही भय नहीं। जहां लोग शांत, एकाग्र मन लेकर लोग ईश्वर के परिसर में सच्ची आस्था व अपनी मंनतें की मुराद पूरा करने के लिए जाते है। अगर वहाँ श्रद्धालुओं से मुनाफिक दाम वसूल रहे है, तो लोगों में आज ईश्वर के द्वार में भी डर नाम तक की कोई चीज नहीं है।

  

*मुकेश सिहं तोमर,खुन्ना(बहलाड़)

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