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   ऋषिकेश:         




           


   अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। जिसमें योग साधकों ने विभिन्न यौगिक क्रियाओं का अभ्यास किया। इस अवसर पर कहा गया ​कि दीर्घ जीवन व निरोगी काया के लिए योग को आत्मसात करने की नितांत आवश्यकता है।                                              सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एम्स ऋषिकेश में आयुष विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष की थीम "स्वास्थ्य के लिए योग" के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें विशेषरूप से कोविड 19 संक्रमण से समुचित सुरक्षा के मद्देनजर मास्क लगाने के साथ साथ पर्याप्त सोशल डिस्टेंसिंग का खास खयाल रखा गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद नरेश बंसल जी एवं एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी विशेषरूप से मौजूद रहे।                                                                                                                                                   मुख्य अतिथि राज्य सभा सांसद नरेश बंसल जी ने कि कोरोनाकाल में भारत सरकार कोविड19 पर नियंत्रण के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, इसके लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में पर्याप्त बजट तथा संसाधनों को मुकम्मल तौर पर बढ़ाया गया है,जिससे लोगों का समय पर उपचार संभव हो पाया है।                                                                                                                                                                                                                                                   इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में किसी भी बीमारी का 25 प्रतिशत ही उपचार है, बाकी 75 प्रतिशत बीमारी का उपचार किसी भी अन्य पद्धति में नहीं मिलेगा। लिहाजा हमें इस 75 प्रतिशत बीमारी को योग जैसे बचाव व सुरक्षात्मक उपायों से रोकना होगा। उन्होंने कहा कि हमें एविडेंस बेस्ड मेडिसिन पर जोर देना होगा। निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि योग शरीर,मन और आत्मा को जोड़ने का विज्ञान है। उन्होंने योग को स्वस्थ तन, स्थिर मन व खुशहाल जीवन का आधार बताया।                                                डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनाेज गुप्ता जी ने बताया कि योग जैसी प्राचीन पद्धतियों को अपनाकर ही पुराने समय में लोग शतायु से अधिक जीवन जीते थे, उसी तरह से हमें स्वस्थ रहने के लिए योग जैसी प्राचीन पद्धतियों को अपनाना होगा।                                                                                                                                                                                                                                               डीएचए प्रो. यू.बी. मिश्रा जी ने कहा कि चिंता व चिता में सिर्फ एक बिंदु का फर्क है, चिता जो निर्जीव को भस्म कर देती है वहीं चिंता सजीव को समाप्त कर देती है, लिहाजा हमें वर्तमान दौड़धूप व तनाव से भरे जीवन में सुकून पाने के लिए योग को आत्मसात करना होगा।                                                                                                                                                       संस्थान की आयुष विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सेना जी ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में इस कोरोनाकाल में एलोपैथी के साथ साथ योग पद्धति से कोविड के उपचार पर भी कई अनुसंधान किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऋषि-मुनियों द्वारा मानव सभ्यता को दिया गया योग एक अनुपम उपहार है, लिहाजा हमें इस उपहार का अपने जीवन में अवश्य उपयोग में लाना चाहिए।                                 इस अवसर पर संस्थान के संकाय सदस्यों के अलावा विभाग के योग प्रशिक्षक दीप चंद जोशी, संदीप भंडारी, संदीप कंडारी, आयोजन समिति के सदस्य किरण बर्तवाल, रंजना, सीमा,अनीता,विकास, राहुल, आत्रेश आदि उपस्थित थे।

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