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जैसा कि आजकल सब कोरोना काल की वजह से घर पर ही है और अपना अधिकतर समय इंटरनेट के माध्यम से गुजार रहे है और करीब करीब हर कोई इस समय किसी न किसी रूप से इंटरनेट और सोशल साईट से जुड़ा हुआ है.आज हर कार्य करीब करीब इंटरनेट के माध्यम से हो रहा है चाहे ऑफिस का वर्क हो या बैंक से लेंन दें और चाहे ऑफिस की मीटिंग इस दोर में कई लोन ने इंटरनेट को पहली बार उपयोग किया है.

 ऐसे में कई लोग इसका गलत उपयोग कर लोगो को ठगने का कार्य भी कर रहे हैI आज कल में अगर देखा जाय तो सोशल क्राइम में काफी बढ़ोतरी हुई है.

 इसलिए सोशल क्राइम को समझना जरुरी है जिसके लिए हाईकोर्ट नैनीताल के अधिवक्ता ललित मिगलानी से एक विशेष चर्चा कर  साइबर क्राइम को क़ानूनी रुप से समझने की कोशिश की गई जो आज के समय में हर किसी को जानना जरुरी है.




प्रश्न - साइबर क्राइम क्या है? 

उत्तर - साइबर क्राइम एक प्रकार का क्राइम होता है, जो अक्सर कंप्यूटर, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से किया जाता है। इसमें कंप्यूटर के माध्यम सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता जय जिससे कई प्रकार के अपराध कर लिए जाते हैं। यह अपराध कई प्रकार के होते हैं जैसे- स्पैम ईमेल, हैकिंग, वायरस डालना, किसी की व्यक्तिगत या ऑफिशियल जानकारी को प्राप्त करना, किसी के अकाउंट पर नजर रखना। यह सारे क्राइम के अंतर्गत आते हैं। साइबर क्राइम करने वाले अपना काम चालाकी से करते हैं और उनके बारे में कुछ पता भी नहीं चलता है।

प्रश्न -  साइबर क्राइम के कितने प्रकार होते है ? 

इंटरनेट के माध्यम से बहुत सारे अपराध कर लिए जाते हैं जिनका पता हमें बाद में चलता है

साइबर अपराध के प्रकार

स्पैम ईमेल- ये एक ऐसा अपराध है हो सीधे तोर पर आपके कोम्पुटर पर हमला करता है आपने के कंप्यूटर पर अनेक प्रकार के ईमेल आते है जिसमें एसे ईमेल भी होते है जो सिर्फ कंप्यूटर को नुकसान पहुचाते है। उन ईमेल से सरे कंप्यूटर में खराबी आ जाती हैं।

हैकिंग- इस अपराध के माध्यम से कीसी की भी निजी जानकारी को उसके कोम्पुटर, मोबाइल से अपने नियन्त्रण में कर उसका दुरपयोग किया जाता है, जेसे की उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड और फिर उसमे फेर बदल करना।

साइबरफिशिंग-  इस अपराध के माध्यम से अपराधी लोगो को ईमेल के मध्य से प्रलोभन देंते है और आपसे आपकी निजी जानकारी उपलब्ध कर उसका दुरपयोग करते है, इस अपराध में किसी के पास स्पैम ईमेल भेजना ताकी वो अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से उसका नुकसान हो सके। यह इमेल आकार्षित होते है।

वायरस फैलाना – इस अपराध में साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर आपके कम्प्युटर पर भेजते हैं जिसमें वायरस छिपे हो सकते हैं, इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स आदि वायरस शामिल हैं, यह आपके कंप्‍यूटर को काफी हानि पहुॅचा सकते हैं। और आपकी महत्वपूर्ण जानकारी और डाटा को ख़तम कर देते हैI 

सॉफ्टवेयर पाइरेसी - इस अपराध में साइबर अपराधी सॉफ्टवेयर की नकल तैयार कर सस्‍ते दामों में बेचना भी साइबर क्राइम के अन्‍तर्गत आता है, इससे साफ्टवेयर कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है साथ ही साथ आपके कीमती उपकरण भी ठीक से काम नहीं करते हैं। 

फर्जी बैंक कॉल-  यह अपराध काफी चलन मे है इस अपराध में साइबर अपराधी आपको जाली ईमेल, मैसेज या फोन कॉल प्राप्‍त हो जो आपकी बैंक जैसा लगे जिसमें आपसे पूछा जाये कि आपके एटीएम नंबर और पासवर्ड की आवश्यकता है और यदि आपके द्वारा यह जानकारी नहीं दी गयी तो आपको खाता बन्‍द कर दिया जायेगा या इस लिंक पर सूचना दें। याद रखें किसी भी बैंक द्वारा ऐसी जानकारी कभी भी इस तरह से नहीं मॉगी जाती है और भूलकर भी अपनी किसी भी इस प्रकार की जानकारी को इन्‍टरनेट या फोनकॉल या मैसेज के माध्‍यम से नहीं बताये। 

सोशल नेटवर्किग साइटों पर अफवाह फैलाना - बहुत से लोग सोशल नेटवर्किग साइटों पर सामाजिक, वैचारिक, धार्मिक और राजनैतिक अफवाह फैलाने का काम करते हैं, लेकिन यूजर्स उनके इरादें समझ नहीं पाते हैं और जाने-अनजाने में ऐसे लिंक्‍स को शेयर करते रहते हैं, लेकिन यह भी साइबर अपराध और साइबर-आतंकवाद की श्रेणी में आता है। 

साइबर बुलिंग - फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग पर अशोभनीय कमेंट करना, इंटरनेट पर धमकियॉ देना किसी का इस स्‍तर तक मजाक बनाना कि तंग हो जाये, इंटरनेट पर दूसरों के सामने शर्मिंदा करना, इसे साइबर बुलिंग कहते हैं। अक्‍सर बच्‍चे इसका शिकार हाेते हैं। इससे इनके सेहत पर भी असर पडता है

कंप्यूटर पर आने वाले स्पैम ईमेल मे कोई न कोई वर्तनी में गलती मिल जाएगी। मूल ईमेल में ऐसी गलती कभी नहीं मिलेगी।

प्रश्न - अगर कोई अपराधी इस प्रकार का अपराध करता है तो कानून उसे क्या सजा देता है या कानून में सजा का क्या प्रावधान है?

उत्तर :- कानून ऐसे मामलो में काफी सख्त है कानून में इस प्रकार के अपराधो को रोकने के लिए कड़े नियमो का उल्लेख है अगर कोई व्यक्ति हैकिंग करता है तो कानून में आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (ए), धारा 66 - आईपीसी की धारा 379 और 406 के तहत कार्रवाई मुमकिन सजा: अपराध साबित होने पर तीन साल तक की जेल और/या पांच लाख रुपये तक जुर्माना।

कोई व्यक्ति डेटा चोरी करता है तो आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 43 (बी), धारा 66 (ई), 67 (सी) - आईपीसी की धारा 379, 405, 420 - कॉपीराइट कानून सजा: अपराध की गंभीरता के हिसाब से तीन साल तक की जेल और/या दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान हैI 

कोई व्यक्ति वायरस स्पाईवेयर फैलता है तो आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (सी), धारा 66 एम् आईपीसी की धारा 268 के अंतर्गत अपराधी होगी I 

देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए फैलाए गए वायरसों पर साइबर

आतंकवाद से जुड़ी धारा 66 (एफ) भी लागू (गैर-जमानती)। सजा : साइबर-वॉर और साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्र कैद। दूसरे मामलों में तीन साल तक की जेल और/या जुर्माना।


प्रश्न :- पोनोग्राफी क्या होती है और इसके लिए कानून में क्या प्रावधान है?

उत्तर :-  पोर्नोग्राफी के दायरे में ऐसे फोटो, विडियो, टेक्स्ट, ऑडियो और सामग्री आती है, जिसकी प्रकृति यौन हो और जो यौन कृत्यों और नग्नता पर आधारित हो। ऐसी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से प्रकाशित करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिS प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है। जो लोग दूसरों के नग्न या अश्लील विडियो तैयार कर लेते हैं या एमएमएस बना लेते हैं और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से दूसरों तक पहुंचाते हैं, किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश भेजते हैं, वे भी इसके दायरे में आते हैं। अपवाद: पोर्नोग्राफी प्रकाशित करना और इलेक्ट्रॉनिक जरियों से दूसरों तक पहुंचाना अवैध है, लेकिन उसे देखना, पढ़ना या सुनना अवैध नहीं है, लेकिन चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना भी अवैध है। कला, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, धर्म आदि से जुड़े कामों के लिए जनहित में तैयार की गई उचित सामग्री अवैध नहीं मानी जाती।इन सभी तरीकों के साइबर अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं, जिसके सरकार ने भी कठोर कदम उठाए हैं।

प्रश्न:- साइबर क्राइम की शिकायत कैसे करे?

उत्तर :- साइबर क्राइम की शिकायत आप अपने निकटतम पुलिस स्टेशन पर जाकर लिखित रूप से कर सकते हैI आप अपनी शिकायत मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन साइबर क्राइम से संबंधित शिकायत की जा सकती है उसके बाद शिकायत को लेकर पुलिस के पास भेजा जाता है। शिकायत किसी भी राज्य से की जा सकती है इसके लिए अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, कंप्यूटर का आईपी का डिटेल होना जरूरी है।


प्रश्न :- क्या साइबर क्राइम की विवेचना सामान्य पुलिस करती है या इसके लिए विशेष प्रकार की पुलिस होती है?

उत्तर :- पुलिस तो पुलिस होती है हा साइबर क्राइम की विवेचना करने हेतु जो अधिकारी नियुक्त होते है उनको विशेष प्रकार का परीक्षण दिया जाता हैI 

प्रश्न:- साइबर थाना क्या होता है? क्या साइबर क्राइम की रिपोर्ट वही ही लिखी जाती है? 

उत्तर :- साइबर थाना वो थाना होता है जहा पर साइबर संबधित सभी सुविधाए उपलब्ध होती है और वहा के अधिकारी साइबर सम्बंधित परीक्षण से निपूर्ण होते हैI ऐसा नहीं है की साइबर क्राइम की रिपोर्ट सिर्फ साइबर थाने मे ही दी जाती है आम आदमी को क्या पता साइबर थाना क्या है?  आप अपनी रिपोर्ट अपने नजदीकी थाने में दे वो उस रिपोर्ट को साइबर थाने में भेजदेगी  

प्रश्न :- अगर किसी के साथ साइबर क्राइम हो जाता है तो उसे साबुत के तोर पर क्या क्या देना पड़ेगा ?

शिकायत की रिपोर्ट करने के लिए, आपको निम्नलिखित जानकारी के साथ सबूत देने होगें यदि आपको एस एम् एस पर सीपी / आरजीआर संबधित सामग्री प्राप्त हुई है तो -

एसएमएस का स्क्रीनशॉट लें जिसमे आपत्तिजनक सामग्री को दर्शाती हो, और भेजने वाले का विवरण जैसे – नाम, आईडी पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा।

जब आप पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें, तो उस समय और समय पर ध्यान दें जब आपको एसएमएस प्राप्त हुआ हो आपको वाही डेट टाइम पोर्टल पर भरना होगा।


यदि आपलो ईमेल प्राप्त हुआ है तो -

प्राप्त ई-मेल को पीडीऍफ़ में सेव करें। या प्राप्त ई-मेल का स्क्रीनशॉट लें। और उसी को प्रमाण के रूप में पोर्टल में अपलोड करना होगा।

यदि प्राप्त ई-मेल में कोई डॉक्यूमेंट जुड़ा था, तो पोर्टल पर सबूत के रूप में अपलोड करने के लिए अपने डेस्कटॉप / डिवाइस पर डॉक्यूमेंट को तैयार रखें।


अगर आपके पास WHATSAPP हाईक ट्विटर आदि पर प्राप्त हुआ है तो -

पोर्टल पर साक्ष्य के रूप में अपलोड करने के लिए दिनांक और समय के साथ भेजने वाले का मोबाइल नंबर के साथ आपत्तिजनक सामग्री को दर्शाते हुए चैट का स्क्रीनशॉट लें।


अगर आपको सोशल मिडिया प्लेटफार्म पर प्राप्त हुआ है तो -

उस URL को नोट करें (अपने डिवाइस / डेस्कटॉप पर) जहां आपने ऐसी सामग्री देखी है।

उस पेज का स्क्रीनशॉट लें लें या पोर्टल पर सबूत के रूप में अपलोड करने के लिए अपने डिवाइस / डेस्कटॉप पर अपमानजनक सामग्री दिखाने वाले पेज को .pdf) फॉर्मेट में सेव कर लें।

जब भी कभी साइबर क्राइम होता है, तो पहले हमें इस बारे में पता ही नहीं चलता। जब तक पता चलता है, तो थोड़ी देर हो चुकी होती है। साइबर क्राइम की शिकायत के लिए अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। साइबर क्राइम को दूर करने के लिए शिकायत ऑनलाइन भी की जा सकती है।

प्रश्न :- क्या साइबर क्राइम करना भारी पड़ सकता है ?

 उत्तर :- जी हा साइबर क्राइम एक प्रकार का गंभीर अपराध है इस में कंप्यूटर, इंटरनेट, डिजिटल डिवाइसेज, वर्ल्ड वाइड वेब आदि के जरिए किए जाने वाले अपराधों के लिए छोटे-मोटे जुर्माने से लेकर उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है। दुनिया भर में रक्षा और जांच एजेंसियां साइबर अपराधों को बहुत गंभीरता से ले रही हैं। ऐसे मामलों में सूचना तकनीक कानून 2000 और सूचना तकनीक (संशोधन) कानून 2008 तो लागू होते ही हैं, मामले के दूसरे पहलुओं को न में रखते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), कॉपीराइट कानून 1957, कंपनी कानून, सरकारी पनीयता कानून और यहां तक कि बिरले मामलों में आतंकवाद निरोधक कानून भी लागू किए जा सकते हैं। कुछ मामलों पर भारत सरकार के आईटी डिपार्टमेंट की तरफ से अलग से जारी किए गए आईटी नियम 2011 भी लागू होते हैं। कानून निर्दोष लोगों को साजिशन की गई शिकायतों से सुरक्षित रखने की भी मुनासिब व्यवस्था है, लेकिन कंप्यूटर, दूरसंचार और इंटरनेट यूजर को हमेशा सतर्क रहना चाहिए कि उनसे जाने-अनजाने में कोई साइबर क्राइम तो नहीं हो रहा है। तकनीकी जरियों का सुरक्षित इस्तेमाल करने के लिए हमेशा याद रखें कि इलाज से परहेज बेहतर है।

प्रश्न :- साइबर क्राइम में समाज का कौन सा वर्ग ज्यादा सक्रीय है और इसका क्या कारण है?

उत्तर :- वैसे तो अपराध की कोई उम्र या कोई वर्ग नहीं होता यह एक व्यक्ति की प्रवृति होती हैI लेकिन अगर हम कुछ समय का डाटा उठा कर देखते है तो सामाज में युवा वर्ग साइबर क्राइम में ज्यादा सक्रीय है उसका एक कारण उनका अपना लाइफ स्टाइल है युवा वर्ग साइबर का ज्ञान अर्जित कर रहा है और अपने शोक को पूरा करने के लिए उस ज्ञान का दुरुपयोग कर रहा हैI 

प्रश्न :- क्या भारतीय दण्ड सहित में साइबर अपराधो से संबधित प्रावधान है?

उत्तर :- जी हा जैसे मैंने उपर विस्तारपूर्वक बताया है लेकिन संशिप्त में इस प्रकार है :- 

ईमेल के माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजना-आईपीसी की धारा 503

ईमेल के माध्यम से ऐसे संदेश भेजना, जिससे मानहानि होती हो-आईपीसी की धारा 499

फर्ज़ी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉड्‌र्स का इस्तेमाल-आईपीसी की धारा 463

फर्ज़ी वेबसाइट्‌स या साइबर फ्रॉड-आईपीसी की धारा 420

चोरी-छुपे किसी के ईमेल पर नज़र रखना-आईपीसी की धारा 463

वेब जैकिंग-आईपीसी की धारा 383

ईमेल का गलत इस्तेमाल-आईपीसी की धारा 500

दवाओं को ऑनलाइन बेचना-एनडीपीएस एक्ट

हथियारों की ऑनलाइन ख़रीद-बिक्री-आर्म्स एक्ट


प्रश्न :- आप समाज या युवा वर्ग को क्या सन्देश देना चाहोगे ? 

उत्तर :- समाज के हर वर्ग को यही सन्देश देना चाहता हूँ  की अपराध तो अपराध होता है जब भी अपराध होता है, अपराधी कितना भी होशियार क्यों न हो फिर भी कोई न कोई सबूत छोड देता है और कानून के शिकंजे में फस ही जाता है जिससे  अपना और अपनों का दोनों का भविष्य ख़राब होता हैI कानून मे अपराध से बचने का एक ही मूल मन्त्र है “पराध न करना” सुरक्षित रहे स्वास्थ्य रहे .... और  अभी के लिए घर पर रहेI  


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