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मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार । आज आपसे ‘मन की बात’, एक ऐसे समय कर रहा हूँ जब कोरोना, हम सभी के धैर्य, हम सभी के दुःख बर्दाश्त करने की सीमा की परीक्षा ले रहा है । बहुत से अपने, हमें, असमय, छोड़ कर चले गए हैं । कोरोना की पहली वेव का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के बाद देश हौंसले से भरा हुआ था, आत्मविश्वास से भरा हुआ था, लेकिन इस तूफ़ान ने देश को झकझोर दिया है ।



साथियो, बीते दिनों इस संकट से निपटने के लिए, मेरी, अलग-अलग sectors  के expert के साथ, विशेषज्ञों के साथ लम्बी चर्चा हुई है । हमारी farma- industry के लोग हों, vaccine manufacturers हों oxygen के production से जुड़े लोग हों या फिर medical field के जानकार, उन्होंने, अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार को दिए हैं । इस समय, हमें इस लड़ाई को जीतने के लिए, experts और वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता देनी है । राज्य सरकार के प्रयत्नों को आगे बढ़ाने में भारत सरकार पूरी शक्ति से जुटी हुई है । राज्य सरकारें भी अपना दायित्व निभाने की पूरी कोशिश कर रही हैं ।      


   उन्होंने कहा, जैसे आज हमारे Medical Field  के लोग, Frontline Workers  दिन-रात सेवा कार्यों में लगे हैं । वैसे ही समाज के अन्य लोग भी, इस समय, पीछे नहीं हैं । देश एक बार फिर एकजुट होकर कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहा है । इन दिनों मैं देख रहा हूँ कोई Quarantine  में रह रहे परिवारों के लिए दवा पहुँचा रहा है, कोई, सब्जियाँ, दूध, फल आदि पहुँचा रहा है । कोई Ambulance की मुफ़्त सेवाएँ मरीजों को दे रहा है । देश के अलग-अलग कोने में इस चुनौतीपूर्ण समय में भी स्वयं सेवी संगठन आगे आकर दूसरों की मदद के लिए जो भी कर सकते हैं वो करने का प्रयास कर रहे हैं । इस बार, गाँवों में भी नई जागरूकता देखी जा रही है । कोविड नियमों का सख्ती से पालन करते हुए लोग अपने गाँव की कोरोना से रक्षा कर रहे हैं, जो लोग, बाहर से आ रहे हैं उनके लिए सही व्यवस्थायें भी बनाई जा रही हैं । शहरों में भी कई नौजवान सामने आये हैं, जो अपने क्षेत्र में, कोरोना के case न बढ़े, इसके लिए, स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर प्रयास कर रहे हैं, यानि एक तरफ देश, दिन-रात अस्पतालों, Ventilators और दवाईयों के लिए काम कर रहा है, तो दूसरी ओर, देशवासी भी, जी-जान से कोरोना की चुनौती का मुकाबला कर रहें हैं । ये भावना हमें कितनी ताकत देती है, कितना विश्वास देती है । ये जो भी प्रयास हो रहे हैं, समाज की बहुत बड़ी सेवा है । ये समाज की शक्ति बढ़ाते हैं ।


प्रधानमंत्री ने कोरोना रोगियों की सेवा में लगे डॉ शशांक, डॉक्टर नावीद और नर्स  सुरेखा , एंबुलेंस ड्राइवर प्रेमलाल से उनके अनुभव के विषय में बात की और साथ ही जो  कोविड-19 से वापस रिकवर हुए हैं उनके भी अनुभव साझा किए ।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की मन की बात कोरोना के प्रति लोगों के भय से उभरने को लेकर थी। जिसमें ने संदेश दिया गया कि वह पैनिक ना हो अस्पताल की तरफ नाभागे। संयम से काम ले और देश में बनाई वैक्सीन पर विश्वास करें। समाज में सहायता के अर्थ को समझें और एक दूसरे की मदद से कोरोना को हराएं।

 उन्होंने कहा ,"मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ की पूरी चर्चा को हमने कोरोना महामारी पर ही रखा, क्योंकि, आज, हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, इस बीमारी को हराना । आज भगवान महावीर जयंती भी है । इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों को शुभकामनायें देता हूँ । भगवान महावीर के सन्देश, हमें, तप और आत्म संयम की प्रेरणा देते हैं । अभी रमजान का पवित्र महीना भी चल रहा है । आगे बुद्ध पूर्णिमा भी है । गुरु तेगबहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व भी है । एक महत्वपूर्ण दिन पोचिशे बोइशाक - टैगोर जयंती का है । ये सभी हमें प्रेरणा देते हैं  अपने कर्तव्यों को निभाने की । एक नागरिक के तौर पर हम अपने जीवन में जितनी कुशलता से अपने कर्तव्यों को निभायेंगे । संकट से मुक्त होकर भविष्य के रास्ते पर उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेंगे । इसी कामना के साथ मैं आप सभी से एक बार फिर आग्रह करता हूँ कि Vaccine हम सब को लगवाना है और पूरी सावधानी भी रखनी है । ‘दवाई भी - कड़ाई भी’ । इस मंत्र को कभी भी नहीं भूलना है । हम जल्द ही साथ मिलकर इस आपदा से बाहर आयेंगे । इसी विश्वास के साथ आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद । नमस्कार ।


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