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  ऋषिकेश :

   एम्स ऋषिकेश में भर्ती अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी नरेन्द्र गिरि जी महाराज के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। वह रूम एअर पर हैं और उन्हें अब बुखार की शिकायत भी नहीं है।  


गौरतलब है कि कोविड पाॅजिटिव पाए जाने के बाद स्वामी नरेन्द्र गिरि महाराज जी को बीती 12 अप्रैल की रात एम्स मे भर्ती किया गया था। शुगर की समस्या से ग्रसित महाराज जी को उस समय बुखार और खांसी की शिकायत थी। 

उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देते हुए एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल  ने बताया कि महामण्डलेश्वर स्वामी नरेन्द्र गिरि जी के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। महाराज के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे चिकित्सकों के अनुसार उन्हें अब बुखार की शिकायत नहीं है और उनकी खांसी में भी सुधार है। वह बिना किसी वेन्टिलेटर सपोर्ट के सामान्य रूम एअर पर हैं और पहले से स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एम्स के चिकित्सकों की टीम पूर्ण सघनता से उनके उपचार में जुटी है।


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में आयोजित स्वच्छता जनजागरुकता पखवाड़ा विधिवत संपन्न हो गया। पखवाड़े के दौरान सफाईकर्मियों को कूड़ा निस्तारण के उपाय और स्वच्छता से जनस्वास्थ्य की दृष्टि से होने वाले लाभ संबंधी विस्तृत जानकारियां दी गई। अभियान के अंतिम दिन विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने स्वच्छता जनजागरुकता कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया।

      गौरतलब है कि एम्स ऋषिकेश में निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी की देखरेख में ’स्वच्छता पखवाड़े’ की शुरुआत बीती 1 अप्रैल को की गई थी। इसके अंतर्गत दो सप्ताह तक आयोजित किए गए विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान संस्थान के अलग अलग विभागों की टीमों द्वारा स्वच्छता संबंधी कार्यक्रमों के माध्यम से मरीजों और उनके तीमारदारों को साफ सफाई को लेकर प्रेरित किया और इससे जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले अच्छे प्रभावों से रूबरू कराया।                                                                                                                                                                           आयोजित कार्यक्रमों के तहत ओपीडी एरिया, आईपीडी एरिया, कैंटीन एरिया, वेटिंग एरिया, किचन एरिया और संस्थान के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रदर्शनी, ट्राॅली रिले एक्टिविटी, ऑनलाइन वेबिनार, टीवी स्क्रीन पर डिस्पले प्रोग्राम आदि खासतौर से आयोजित किए गए। 


आयोजित एक कार्यक्रम में संस्थान के सफाई कर्मियों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया गया, साथ ही उन्हें अनुपयोगी ठोस अपशिष्ट पदाथों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को लेकर आगाह किया गया। बताया गया कि अपशिष्ट कचरे का प्रबंधन से मृदा संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छ पर्यावरण के लिए नितांत जरूरी है। लिहाजा अपशिष्ट कचरे का प्रबंधन व इसका समय रहते निस्तारण किया जाना आवश्यक है। उधर हाॅस्पिटल इन्फेक्शन टीम द्वारा संस्थान के नर्सिंग ऑफिसरों को हाथों को सही तरीके से धोने और स्वच्छ रखने का प्रशिक्षण दिया गया। 


इस अवसर पर अपने संदेश में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने कहा कि स्वच्छता ही स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है। लिहाजा इसे दैनिक जीवन में अपनाया जाना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ समाज से ही स्वस्थ समाज की परिकल्पना संभव हो सकती है। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति  स्वच्छता के प्रति संकल्पित रहे और स्वच्छ भारत की परिकल्पना को साकाररूप देने में अपना योगदान सुनिश्चित करे।  


डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता जी ने बीमारियों के नियंत्रण में स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वच्छता की शुरुआत स्वयं से की जाए तो हमारे आसपास का वातावरण खुद ब खुद स्वच्छ हो जाएगा। 


डीन हाॅस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा जी ने कहा कि स्वच्छता एक सतत प्रक्रिया है। साफ-सफाई रखने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। स्वच्छता के नियमों का पालन करने से हम सभी का जीवन भी निरोगी रहता है। 


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