Halloween party ideas 2015

 




   शाही स्नान कुम्भ की शान होते है आध्यत्मिकता के रंग में रगे अल्हड़  मस्त मलंग नागा सन्यासियों के दर्शन को लाखों की संख्या में जनसमूह गंगा घाट को उमड़ पड़ता है अनेको बार इतने बड़े जनसमूह में भगदड़ होने से श्रद्धालुओं के घायल होने की घटनाएं भी आती रही है वर्ष 1998 के खूनी इतिहास  से सबक लेते हुए देश मे  जहाँ भी कुम्भ का आयोजन किया गया वहां  पुलिस प्रशासन  इस बात का प्राथमिकता में रखता है कि  अखाड़ों के शाही स्नान की तय व्यवस्था को लागू करने में लेशमात्र कोताही न होने पाए। 

         हरिद्वार में वर्तमान में चल रहे कुम्भ मेला 2021 में 11 मार्च को शिवरात्रि शाही स्नान में परम्पराओं के अनुसार सिर्फ 07 सन्यासी अखाड़ों के द्वारा शाही स्नान किया जाना था। सभी अखाड़ों के जुलूस का अपनी छावनी से हर की पैड़ी तक पहुंचने और स्नान कर अपनी छावनी में वापस आने तक का मार्ग हरिद्वार शहर के बीचों बीच स्थित अपर रोड निर्धारित था। अखाड़ों के स्नान का क्रम, स्नान का समय और आने जाने का मार्ग हर तरह से निश्चित हो चुका था। 

       शिवरात्रि प्रथम शाही स्नान के दिन सभी कार्यक्रम पूर्व निर्धारित समय और व्यवस्थाओं के अनुसार प्रारंभ होकर सुव्यवस्थित तरीके से चलने लगे। जुना अखाड़ा का शाही स्नान का जुलूस अपने पूर्व निर्धारित क्रम और समय पर पूरी भव्यता के साथ मायादेवी प्रांगण स्थित छावनी से निकल हर की पैड़ी की ओर चल पड़ा। जुना द्वारा अपने निर्धारित समय पर हर की पैड़ी पहुँच कर स्नान प्रारंभ कर दिया गया परन्तुं जुना अखाड़े के जुलूस का हिस्सा किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर और अन्य पदाधिकारीगण विलंब से छावनी से निकले। 


विलंब से निकलने के कारण किन्नर अखाड़े के पदाधिकारी अपने अनुयायियों सहित हर की पैड़ी पर स्नान हेतु उस समय पहुंचे जिस समय निरंजनी अखाड़ा अपने निर्धारित समय पर छावनी से निकल कर हर की पैड़ी की और बढ़ चुका था। समय के इस अतिक्रमण के कारण दोनो अखाड़ों  का मार्ग में  एक दूसरे के आमने सामने आना तय था। 


शाही स्नान के दौरान बनी इस परिस्थिति की जानकारी जैसे ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारीगण को हुई  तत्काल ही  आईजी कुम्भ संजय गुंज्याल अपने कुछ अनुभवी और कुशल पुलिस अधिकारियों को लेकर तुलसी चौक पहुंचे जहाँ से निरंजनी अखाड़े को मुड़कर अपर रोड पर पहुंचना था और जुना से आमना सामना होने की सम्भावना थी


 सुपर कॉप के नाम से चर्चित बहुमुखी प्रतिभा के धनी  महानिरीक्षक कुम्भ   संजय गुंज्याल ने बेहद संवेदनशीलता  और गम्भीरता से मोके की नजाकत को समझा और बेहतरीन उपाय बताया,

 दरअसल नवनियुक्त माननीय मुख्य मंत्री उत्तराखंड श्री तीरथ सिंह रावत के द्वारा शाही स्नान के दौरान सभी अखाड़ों के जुलूस के ऊपर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा का आदेश दिया गया था। माननीय मुख्यमंत्री के आदेश पर हेलीकॉप्टर पुलिस द्वारा दिये गए दिशा-निर्देशों और कॉर्डिनेट्स का आधार पर शाही स्नान के लिए निकल रहे अखाड़ों के जुलूस 03 बार पुष्पवर्षा कर रहा था। 


आईजी कुम्भ के द्वारा हर की पैड़ी की और अग्रसर निरंजनी अखाड़े के पदाधिकारियों से आग्रह किया गया कि माननीय मुख्यमंत्री के आदेश पर आपके शाही स्नान के जुलूस पर पुष्पवर्षा किया जाना है जिस हेतु तुलसी चौक का चयन किया गया है इसलिए आप अपने जुलूस की तुलसी चौक पर ले जाकर थोड़ी देर के लिए रोक दें ताकि हेलीकॉप्टर आपके जुलूस पर पुष्पवर्षा करके उत्तराखंड सरकार की ओर से आपका स्वागत सम्मान कर सके। 


आईजी कुम्भ के इस आग्रह को अखाड़े के पदाधिकारियों द्वारा सहर्ष स्वीकार कर लिया गया। इसी दौरान आईजी कुम्भ के द्वारा किन्नर अखाड़े के साथ जुलूस ड्यूटी पर लगे पुलिसबल को निर्देशित किया गया कि जितना जल्दी हो सके किन्नर अखाड़े को वापस अपनी छावनी में पहुंचा दिया जाए। निरंजनी अखाड़े का जुलूस आग्रह के अनुसार तुलसी चौक पर पहुंच कर रुक गया और इधर जुलूस में लगा पुलिसबल किन्नर अखाड़े को जल्द से जल्द उनकी छावनी में पहुंचाने की मशक्कत पर लग गया। लेकिन किन्नर अखाड़े को छावनी में पहुंचाने में समय लगना तय था और ज्यादा देर तक निरंजनी अखाड़े को तुलसी चौक पर रोके रखना भी टेढ़ी खीर था। 


मौके की नजाकत को भांपते हुए आईजी कुम्भ के द्वारा हेलीकॉप्टर के पायलट से बात की गई और उसको बताया गया कि तुलसी चौक के ऊपर चक्कर लगाता रहे परन्तुं पुष्पवर्षा तभी करे जब उसे कहा जाए। इस पर हेलीकॉप्टर के पायलट द्वारा तुलसी चौक पर आकर निरंजनी अखाड़े के जुलूस के ऊपर कभी नीचे, कभी ऊपर जाकर चक्कर लगाना शुरू कर दिया गया। इधर पुलिस बल किन्नर अखाड़े को लेकर छावनी में प्रवेश कराने के नजदीक पहुंच गया। तुलसी चौक पर निरंजनी अखाड़े के जुलूस के ऊपर चल रही हेलीकॉप्टर की कलाबाजियों के दौरान थोड़ी देर में ही मैसेज आया कि किन्नर अखाड़ा अपनी छावनी में सकुशल प्रवेश कर गया है। 

     इस संदेश के प्राप्त होने के साथ ही सबने राहत की सांस ली और आईजी कुम्भ के निर्देश पर हेलीकॉप्टर ने निरंजनी अखाड़े के जुलूस पर  पुष्पवर्षा आरम्भ कर दी। आकाश से बरसते गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों से पूरा रास्ता गुलाबी रंग से रंग गया लेकिन कुम्भ पुलिस के अधिकारियों के दिल को सबसे बड़ा सुकून यही था कि शुक्र है कि ये रास्ता गुलाबी रंग से रंगा है न कि किसी और रंग से....


*क्या है हरिद्वार कुम्भ 1998 का खूनी इतिहास*


        वर्ष 1998 में हरिद्वार कुम्भ अपने चरम पर था  कुम्भ की शान शाही स्नान को देखने  लाखो की संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे थे शाही स्नान का कार्यक्रम हमेशा की तरह तय किया गया था, किन्तु होनी प्रबल होती है निरंजनी अखाड़े के हजारों नागाओं को स्नान में देरी हो गई। स्नान के अगले क्रम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़ों के तमाम नागा बिफर उठे। भारी पुलिस फोर्स द्वारा उन्हें रोकने की भरसक कोशिश की गई लेकिन नागाओं के क्रोध के आने वो भी नाकाम रहे। 


जूना अखाड़े के घुड़सवार नागा अपने घोड़ों को पुल से दौड़ाते हुए हरकी पैड़ी आ गए। पीछे-पीछे इन तीनों अखाड़ों के हजारों बाबा भी पहुंच गए, फिर क्या था, हर की पैड़ी पर जबरदस्त संग्राम और मारकाट शुरू हो गई। विलंब से क्रोधित तीनो अखाड़ों के नागा और बाबाओं ने निरंजनी अखाड़े से लौटते साधुओं पर रास्ते में भी हमला कर दिया। 


रास्ते में पड़ने वाले जगद्गुरु शंकराचार्य माधवाश्रम के आश्रम में नागा और बाबा घुस गए। तोड़फोड़ और पथराव करते हुए शंकराचार्य सहित अन्य पदाधिकारियों के साथ अभद्रता की। यह सब इतने पर ही नही रुका इसके बाद अखाड़े से गोलियां चलनी शुरू हो गई और की बड़ी घटना को होने से रोकने के लिए पुलिस और पीएसी को भी हवाई फायर कर दोनों तरफ के नागा और साधुओं को खदेड़ना पड़ा। इस खूनी संघर्ष में अनेक साधु और पुलिसकर्मी घायल हुए।

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