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  • आजाद हिन्द फौज ने ‘भारतीय एकता’ का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज


 ऋषिकेश:



 परमार्थ निकेेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज आजाद हिंद सरकार के गठन की 77 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर संदेश दिया कि वर्ष 1943 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद (हुकुमत-ए-आजाद हिंद) के रूप में अस्थायी सरकार की स्थापना की घोषणा की थी। उनका दृढ़ विश्वास था कि सशस्त्र संघर्ष ही भारत की आजादी का एकमात्र तरीका है। 

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि उस समय भारत की आजादी ही सभी का लक्ष्य था, उसके लिये विचारधारायें अलग-अलग थी, माध्यम दूसरे थे परन्तु लक्ष्य तो आजादी ही था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी द्वारा गठन की गयी अस्थायी सरकार के अंतर्गत विदेशों में रहने वाले भारतीय एकजुट हो गए थे। आजाद हिन्द फौज द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन काफी विस्तृत था और उसका प्रभाव भी काफी गहरा था। आजाद हिन्द फौज ने ‘भारतीय एकता’ का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत किया था। पूज्य स्वामी जी नेे कहा कि उनके द्वारा दिया गया ’जय हिन्द’ का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा, बन गया है और ’तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का नारा, जिसने युवाओं के मानस को झकझोरने का कार्य किया।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत को ऐसे तेजस्वी और राष्ट्र को समर्पित युवाओं की आवश्यकता है जिनका हृदय राष्ट्र के लिये धड़कता हो। हम रंग, रूप, वेश-भूषा, धर्म और जाति से भले ही अलग-अलग हो परन्तु हम सब एक है और भारत माता की संतान हैं। हमारे देश का यह सौभाग्य है कि हमारा बहुत ही गौरवशाली इतिहास है, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे महापुरूषों की गौरवगाथा हमारे पास है। 

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि अब हमें जरूरत है अखंड भारत के साथ हमारा राष्ट्र आत्मनिर्भर भारत बनें, स्वच्छ, सुन्दर, समृद्ध और समुन्नत भारत बने। 

 मोदी जी ने आत्मनिर्भर भारत का संदेश दिया है और इसके लिये प्रत्येक भारतवासी को आगे आना होगा और राष्ट्र हित के लिये समर्पित होकर जीवन जीना होगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि हमारा राष्ट्र पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है। हम सभी नागरिक आपस में मिलकर रहेंगे, सभी के साथ समान व्यवहार करेंगे और आपसी प्रेम और भाईचारा बनाकर रखेंगे तो निश्चित रूप से भारत की अखंडता अक्षुण्ण रहेगी। 

उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय को पूर्ण निष्ठा के साथ भारत माता के लिये समर्पण भाव से कार्य करना होगा क्योंकि देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें। अब बारी हमारी है, आईये हम अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही को समझें तथा देश का मिलकर विकास करें, देश के विकास में ही हम सबका विकास है।

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