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देहरादून;


श्रमिक कार्ड पर विभागीय अधिकारियों ने कहा ,श्रमिक कार्ड बनाने में नहीं लगता है कोई भी धन दलालों के खिलाफ विभाग करेगा कार्रवाई

उत्तराखंड में संनिर्माण मजदूरों के लिए बनाए जाने वाले श्रमिक कार्ड में दलाली की चर्चा आजकल जोरों पर है श्रमिक कार्ड बनाने में गरीब मजदूरों से दलाल वसूली करके ₹1000 से ₹1500 तक प्राप्त कर रहे हैं ऐसे में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड उत्तराखंड के कार्यालय में जाकर संवाददाता द्वारा इसकी जानकारी चाही गई तो वहां पर सचिव  दमयंती रावत द्वारा कोई भी वक्तव्य देने से मना कर दिया गया उनका  वक्तव्य ना देना कहीं ना कहीं उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है और  मीडिया प्रभारी कोऑर्डिनेटर विजय चौहान ने बताया कि थोड़ा बहुत ऊपर नीचे चलता है।

 लेकिन हमारे यहां कोई भ्रष्टाचार नहीं किया जा रहा है यही बात उप श्रमायुक्त अनिल पटवाल  के द्वारा कही गई और यही बात लेबर इंस्पेक्टर बृजमोहन के द्वारा भी बताई गई ऐसे में प्रश्न उठता है कि वह कौन लोग हैं जो गांव-गांव में जाकर श्रमिकों से पैसा इकट्ठा कर रहे हैं और लिस्ट बनाकर श्रमिक विभाग को दे रहे हैं और श्रमिक विभाग उन्हीं लोगों के कार्ड जारी कर रहा है।
 जो दलालों के माध्यम से आ रहे हैं ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगता है कुछ दलालों ने बाकायदा ऑफिस खोलकर फार्म भरने का कार्य शुरू किया है ।
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह भी पता चला है कि कुछ विभागीय तथा कुछ कार्यदाई संस्था मार्ग तथा आईआईटी के लोग क्षेत्र में चोरी-छिपे आकर पैसा कलेक्शन का कार्य कर रहे हैं इसकी वास्तविक जानकारी एक भी दलाल देने के लिए तैयार नहीं है।

 इस प्रकरण को लेकर केदारावाला गांव में पिछले दिनों उपजिलाधिकारी विकासनगर को ज्ञापन देकर कुछ श्रमिकों द्वारा पैसे के लेनदेन की दलाली को उजागर किया था जिसमें दलालों द्वारा शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी दी गई और शिकायतकर्ता द्वारा इसकी शिकायत भी कई जगह की गई है सहसपुर थाने को भी अवगत कराया गया है ।लेकिन बेरोकटोक दलालों का कार्य जारी है और दलाल एक ही नंबर के कार्ड कई कई लोगों को दिलाने में कामयाब हो रहे हैं ।ऐसे कई प्रकरण सामने आ चुके हैं .
लेवर इंस्पेक्टर तथा विभागीय कर्मचारी अधिकारी इससे बचते नजर आ रहे हैं ।लेकिन सच्चाई यह है कि गरीब श्रमिकों का शोषण चरम पर है और उनसे पैसे लेकर कुछ दलाल अपना पेट भर रहे हैं और श्रमिकों मैं भी शपथ पत्र लेकर उन लोगों के कार्ड बनाए जा रहे हैं जो मजदूर हैं ही नहीं ऐसे में जांच एजेंसी कौन सी है। जो मजदूरों का सत्यापन कर रही है। उसका कोई अता-पता नहीं है ।

बहुत से लोगों ने बताया कि दलाल हम से पैसे लेकर गया और हमारे कार्ड नहीं बने हैं और हम से पैसे ले लिए हमारी टूल किट हमें नहीं दी गई और हमें राशन तक भी नहीं मिला है विभाग के कर्मचारियों को जब इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि लिस्ट बनाकर हमें दो जिससे पता चलता है कि विभाग के पास श्रमिकों की कोई जानकारी मौजूद नहीं है ऐसे में दलालों की पौबारा हो रखी है कई श्रमिक लिख कर देने के लिए तैयार हैं कि हम से अवैध रूप से वसूली की जाती है अन्यथा सामान देने के लिए मना कर दिया जाता है






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