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ऋषिकेश;



अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स संस्थान में विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित कोविड पॉजिटिव 2 लोगों की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। उधर पिछले 24 घंटे में हुई कोविड सेंपल जांच में 15 लोगों की रिपोर्ट कोविड पाॅजिटिव आई है। जिसमें 11 स्थानीय लोग भी शामिल है। संस्थान की ओर से इस बाबत स्टेट सर्विलांस ऑ​फिसर को सूचित कर दिया गया है।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल जी ने बताया कि रामनगर, नैनीताल निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति को बीती 16 जुलाई को एम्स में भर्ती किया गया था, जो कि मधुमेह तथा ऑटोनॉमिक डिस्फंक्शन  से ग्रसित था। संस्थान में भर्ती के बाद उसका कोविड सेंपल लिया गया,जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। शु्क्रवार को तड़के उपचार के दौरान इस मरीज की मृत्यु हो गई। दूसरा व्यक्ति मुजफ्फरनगर के घेरकलां निवासी 47 वर्षीय व्यक्ति जो कि 23 जुलाई को एम्स इमरजेंसी में आया था। उक्त व्यक्ति पिछले दो साल से लीवर की बीमारी से ग्रसित था। कोविड टेस्ट में वह कोविड पॉजिटिव पाया गया। जिसकी शुक्रवार सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इसके अलावा संस्थान में की गई कोविड सेंपलिंग में 15 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।  उन्होंने बताया कि रानीपोखरी, देहरादून निवासी एक 18 वर्षीय युवती जो कि बीती 22 जुलाई को एम्स ओपीडी में आई थी। जहां चिकित्सकों ने उनका कोविड सेंपल लिया गया था, जिसके बाद उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। गौरतलब है कि युवती के पिता पूर्व में कोविड संक्रमित पाए गए हैं। दूसरा मामला शिवा इंक्लेव,ऋषिकेश निवासी एक 16 वर्षीय किशोर का है, जो कि बीते बृहस्पतिवार को एम्स ओपीडी में आया था। जहां उसका कोविड सेंपल लिया गया था,जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। गौरतलब है कि किशोर के पिता व बहिन पूर्व में कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं, उसका अपने संक्रमित परिजनों से प्राइमरी कांटेक्ट रहा है। ​शिवा इंक्लेव,ऋषिकेश निवासी 70 वर्षीय महिला जो कि बीती 23 को ओपीडी में आई थी। जो कि  टीबी से ग्रसित है। जहां इसका कोविड सेंपल लिया गया, जो कि पॉजिटिव पाया गया है। इसके बाद इसे एम्स कोविड वार्ड में भर्ती कर दिया गया। बापूग्राम गली नंबर तीन, ऋषिकेश निवासी 22 वर्षीय युवक जो ​कि एम्स में सिक्योरिटी विभाग में कार्यरत है, जो कि संस्थान के एक अन्य कोविड संक्रमित कर्मचारी के कांटेक्ट में था, बीती 17 जुलाई को एम्स ओपीडी में आया था। जिसका कोविड सेंपल लिया गया जो कि नेगेटिव पाया गया। इसके बाद उसे सीमा डेंटल कॉलेज में क्वारंटाइन कर दिया गया था। उक्त युवक को 21 जून को गले में खराश व खांसी की शिकायत होने पर 23 जुलाई को दूसरा कोविड सेंपल लिया गया जो कि पॉजिटिव पाया गया है। उसे नजदीकी सीसीसी सेंटर में भर्ती होने को कहा गया है। रेलवे रोड स्थित एक होटल में निवासरत एम्स के 25 वर्षीय नर्सिंग ऑफिसर जो कि पिछले दो दिनों से बुखार व खांसी व नाक बहने की शिकायत के साथ 23 जुलाई को  एम्स ओपीडी में आया था, जहां इसका कोविड सेंपल लेकर उसे सीमा डेंटल कॉलेज में क्वारंटाइन कर दिया गया था, उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। बताया गया कि वह एक अन्य कोविड पॉजिटिव पेशेंट के प्राइमरी कांटेक्ट में आया था। कालीकमली वाली धर्मशाला ऋषिकेश निवासी 7 वर्षीय बालक जो कि 13 जुलाई से पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भर्ती था। 13 जुलाई को लिया गया इसका पहला कोविड सेंपल नेगेटिव आया था, जबकि 20 जुलाई को लिया गया दूसरा सेंपल कोविड पॉजिटिव पाए जाने पर उसे सीसीसी सेंटर में भर्ती होने को कहा गया है। ऋषिकेश निवासी एक अन्य 23 वर्षीय व्यक्ति का बीते बृहस्पतिवार को कोविड सेंपल लिया गया जो कि पॉजिटिव पाया गया है। उक्त व्यक्ति को  कोविड वार्ड में भर्ती कर दिया गया है। गौरतलब है कि उक्त व्यक्ति की पत्नी पूर्व में कोविड पॉजिटिव आ चुकी है जो कि एम्स में भर्ती है। गंगानगर निवासी 32 वर्षीया जो कि एम्स ऋषिकेश में महिला नर्सिंग ऑफिसर है, जो कि 22 जुलाई को एम्स ऋषिकेश इमरजेंसी में आई थी, जहां इसका कोविड सेंपल लिया गया, उक्त ऑफिसर 21 जुलाई से होम क्वारंटाइन थी। उसके पति पूर्व में कोविड पॉजिटिव आ चुके हैं जिसका एम्स में उपचार चल रहा है। नर्सिंग ऑफिसर को कोविड वार्ड में भर्ती कर दिया गया है। रेलवे रोड ऋषिकेश निवासी 24 वर्षीय पुरुष जो कि  एम्स में सिक्यो​रिटी विभाग में कार्यरत है। जो कि 23 जुलाई को एम्स ऋषिकेश में कोविड सेंपल लिए आया था,जिसका सेंपल पॉजिटिव पाया गया है। उक्त व्यक्ति पूर्व में कोविड पॉजिटिव पाए गए संस्थान के दो अन्य सिक्योरिटी कर्मचारियों के संपर्क में आने से 16 जुलाई से सीमा डेंटल कॉलेज में क्वारंटाइन में थे। गंगानगर ऋषिकेश निवासी 10 माह की नवजात बालिका जो कि बीती 22 जुलाई को एम्स इमरजेंसी में आई थी। जिसका कोविड सेंपल लिया गया जो कि  पॉजिटिव पाया गया है। बच्ची एसिम्टमेटिक जिसमे रोग के लक्षण नहीं दिखाई पड़ते है। इसके पिता पूर्व में कोविड संक्रमित पाए गए हैं। बच्ची को एम्स के को​विड वार्ड में भर्ती कर दिया गया है। गंगानगर ऋषिकेश निवासी 54 वर्षीय महिला जो कि 22 जुलाई को एम्स में जांच के लिए आई जिसका सेंपल कोविड पॉजिटिव पाया गया है। महिला एसिम्टमेटिक है और उसका पुत्र व पौत्री पूर्व में कोविड संक्रमित पाए गए हैं। महिला को एम्स के कोविड वार्ड में भर्ती किया गया है। इसके अलावा रुड़की, हरिद्वार निवासी 24 वर्षीय पुरुष जिसके पिता कोविड संक्रमित हैं व एम्स में भर्ती हैं, उक्त व्यक्ति का बीती 23 जुलाई को कोविड सेंपल लिया गया जो कि पॉजिटव पाया गया है। उधमसिंहनगर निवासी 46 वर्षीय महिला जो कि ब्रेस्ट कैंसर से ग्रसित है, बीती 23 को एम्स ओपीडी में आई थी,जहां उसका कोविड सेंपल लिया गया, जो कि पॉजिटिव पाया गया है। महिला वर्तमान में देहरादून में रह रही है, इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून को सूचित कर दिया गया है। एक अन्य एमडीडीए कॉलोनी, देहरादून निवासी 44 वर्षीय पुरुष जो कि मूत्र संबंधी बीमारी के चलते बीती 23 जुलाई को एम्स इमरजेंसी में आया था, जहां इसका कोविड सेंपल लिया गया व उसे कोविड आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। जशोदरपुर, हरिद्वार निवासी 47 वर्षीय व्यक्ति जो कि 23 जुलाई को फेफड़े की बीमारी के फॉलोअप के लिए एम्स में आया था,जहां इसका कोविड सेंपल लिया गया, जो कि पॉजिटिव आया है। मरीज वर्तमान में अपने घर में है,लिहाजा उसे कोविड अस्पताल में भर्ती करने के लिए स्टेट सर्विलांस ऑफिसर को सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित मामलों के बाबत स्टेट सर्विलांस ऑफिसर को सूचित कर दिया गया है।



 मानव जाति की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है, जिसके खिलाफ संपूर्ण विश्व लड़ रहा है। हालांकि समाज में कोविड-19 से स्वस्थ हुए लोगों को "कोरोना वाॅरियर्स " के नाम से संबोधित किया जाने लगा है कर रहे हैं, मगर उनकी कोरोना वायरस के विरुद्ध यह लड़ाई अस्पताल से छुट्टी मिलने के साथ समाप्त नहीं होनी चाहिए। ऐसे में कोविड संक्रमण से उपचार के बाद मुक्त हुए लोग प्लाज्मा दान करके गंभीर रोगियों की बीमारी में मदद कर सकते हैं, जिसे "कॉनवेलेसेंट प्लाज्मा थेरेपी" के नाम से जाना जाता है।
शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के रक्तकोष विभाग के तत्वावधान में एक विशेष परामर्श सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें कोविड -19 बीमारी से उबर चुके  06 (छह) व्यक्तियों को खासतौर से शामिल किया गया। यह सभी लोग एम्स के हेल्थ केयर वर्कर हैं। जिसमें एक चिकित्सक व अन्य पांच नर्सिंग ऑफिसर हैं। परामर्श सत्र में एम्स संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उन्हें इस प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान कोविड संक्रमण से मुक्त हुए सभी 06 (छह) लोगों ने जरूरतमंद रोगियों के लिए प्लाज्मा दान करने पर अपनी सहमति जताई।                                                                                                           इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने कोविड19 संक्रमण से उबरने वाले लोगों से कहा कि जिन एंटीबॉडीज ने आपको कोविड -19 से जीतने में मदद की, अब दान किए गए प्लाज्मा से मिलने वाले एंटीबॉडी से गंभीर बीमारी वाले रोगियों की मदद की जाएगी। ​उन्होंने कहा कि  आप लोग सिर्फ प्लाज्मा डोनर ही नहीं हैं बल्कि "लाइफ डोनर" हैं।
एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने कहा कि कॉनवेलेसेंट प्लाज्मा एंटीबॉडी प्रदान करने का काम करता है, जो संक्रमित व्यक्तियों में वायरस को बेअसर करता है। उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति किसी भी सूक्ष्म जीव से संक्रमित हो जाता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इसके खिलाफ लड़ने के लिए एंटीबॉडी का उत्पादन करने का काम करती है। यह एंटीबॉडीज बीमारी से उबरने की दिशा में अपनी संख्याओं में वृद्धि करती  हैं और वांछनीय स्तरों तक वायरस के गायब होने तक अपनी संख्या में सतत वृद्धि जारी रखती हैं। निदेशक प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि पहले से संक्रमित होकर स्वस्थ हुए व्यक्ति में निर्मित एंटीबॉडी, एक रोगी में सक्रिय वायरस को बेअसर कर देगा, साथ ही उसकी रिकवरी में तेजी लाने में मदद करेगा।
इस अवसर पर ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एंड ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डा. गीता नेगी ने कहा कि कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति जो नेगेटिव आ चुका हो, वह नेगेटिव आने के28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। जिसके लिए एक एंटीबॉडी टेस्ट किया जाएगा तथा रक्त में एंटीबॉडी का लेवल देखा जाएगा। यह एंटीबॉडी प्लाज़्माफेरेसिस नामक एक प्रक्रिया द्वारा प्लाज्मा के साथ एकत्र किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में, पहले से संक्रमित होकर स्वस्थ हुए व्यक्ति का पूरा रक्त प्लाज्मा तथा अन्य घटक एफेरेसिस मशीन द्वारा अलग किया जाता है। प्लाज़्मा (एंटीबॉडी युक्त) को कॉनवेलेसेंट प्लाज़्मा के रूप में एकत्र किया जाता है और अन्य लाल रक्त कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स जैसे अन्य घटक प्रक्रिया के दौरान रक्तदाता में वापस आ जाते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा प्लाज्मा दान करना दाता के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है, उन्होंने बताया कि इससे उसके स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता है।
इस सत्र में संकायाध्यक्ष शैक्षणिक प्रो. मनोज गुप्ता, डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी. मिश्रा, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुभा अग्रवाल, डॉ. दलजीत कौर, डॉ. आशीष जैन, नोडल ऑफिसर डॉ. पीके पांडा, डा. एके सेंगर,अखिल, डॉ. पनदीप कौर, डॉ.  ईश्वर प्रसाद, डॉ. सारिका अग्रवाल, सुश्री अंजू ढौंडियाल आदि ने प्रतिभाग लिया ।

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