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डोईवाला:


शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोईवाला में वनस्पति विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना महाविद्यालय इकाई के संयुक्त तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस पर एक ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । निबंध प्रतियोगिता के आयोजन समन्वयक डॉ एसके कुडियाल ने बताया कि निबंध का शीर्षक" कोविड-19 का पर्यावरण पर प्रभाव" था। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्राे०एस पी सती, प्रो०एम एस रावत, डॉक्टर अंजली वर्मा एवं डॉक्टर पूनम पांडे सम्मिलित थी।

इस निबंध प्रतियोगिता में 36 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसमें प्रथम स्थान कु० अंजली नेगी B.Sc. 6th सेमेस्टर  ,द्वितीय स्थान कु० अनामिका नौटियाल B.Sc.4th सेमेस्टर . एवं तृतीय स्थान कु० सोनाली खत्री B.Sc. 6th सेमेस्टर  को प्राप्त हुआ। निबंध में विभिन्न प्रतिभागियों ने अपने अपने विचार प्रकट किए ।अंजली नेगी बीएससी सिक्स सेमेस्टर ने लिखा कि पारिस्थितिकी प्रबंधन व संरक्षण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

अनामिका नौटियाल फोर्थ सेमेस्टर एवं नेहा नौटियाल बीएससी फोर्थ सेमेस्टर ने लिखा कि कोविड-19 से दिल्ली में यमुना तथा कानपुर एवं वाराणसी में गंगा के प्रदूषण स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। सोनाली खत्री बीएससी 6 सेम ने लिखा है कि वर्तमान लॉक डॉऊन से हवा एवं पानी की शुद्धता बढ़ी है। काजल ने लिखा है कि कोरोना से हमें यह अवसर दिया है स्थानीय एवं वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय राजनीति को पारिस्थितिकी सम्मान और न्याय के तर्ज पर परिभाषित किया जाए। लक्ष्मी कोठियाल ने लिखा है कि कोविड 19 के लॉक डाउन से  ओजोन परत के क्षरण में  सुधार हुआ है ।

अन्य प्रतिभागियों में आकांक्षा, अर्चित गौतम, रोहन, रोशनी अंगिता, सुरजीत कौर, इत्यादि थे। प्रतियोगिता के समन्वयक डा० एस० के० कुडियाल ने बताया कि हमारी पर्यावरण एवं जीव जंतुओं के दोहन की महत्वाकांक्षा ने कोविड-19 को जन्म दिया जिससे पूरी मानवता इस समय प्रभावित है। पूरे विश्व में 17 लाख 50 हजार ज्ञात प्रजातियों में मानव श्रेष्ठ है परंतु श्रेष्ठता के बावजूद हम अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पा रहे हैं। 2014 एवं 2019 के बीच पिछले 5 वर्षों में हमने लगभग एक करोड़ 90 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटा है ,यह बात पर्यावरण मंत्रालय की ओर से संसद को बताई गई जानकारी के आधार पर है।

इसके अलावा वनाग्नि से कितने पेड़ों का नुकसान हुआ एवं चोरी-छिपे कितने पेड़ों को काटा गया इसका डाटा सरकार के पास भी नहीं है। अधिकतर अध्ययन यह बताते हैं कि धूप की तुलना में पेड़ों की छाया में तापमान 5 डिग्री तक कम हो जाता है। बहुत सारी गर्मी पेड़ खुद ही सोख लेते हैं और उन्हें नीचे नहीं आने देते। ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण पेड़ों का कटना भी है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर डीसी नैनवाल ने पर्यावरण दिवस पर सभी विद्यार्थियों को बधाई दी एवं विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधरोपण के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा महाविद्यालय में कोलियस के पौधों को रोपा गया।इस अवसर पर डॉ एसके कुडियाल,श्री जी एस कंडारी, जितेंद्र नेगी, शोभा देवी ,सुनील नेगी,पंकज कुमार, अर्चित गौतम, रोहन,नवनीत प्रजापति,आसिफ हसन, आकांक्षा, एवं दिव्या उपस्थित थीं।

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