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रूद्रप्रयाग :
 भूपेंद्र भंडारी


 भले ही हम एक और राज्य दिवस बड़े शानों-शौकत से मनाने जा रहे हैं लेकिन उत्तराखण्ड के गाँव जिस तेजी से वीरान और खण्डहर हो रहे हैं उससे इस राज्य की परिकल्पना और इसके मूल उद्देश्य ही रसातल की ओर चला गया है। ऐसा ही एक बाजार था पवन नगर जो आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव में वीरान खण्डहरों में तब्दील हो गया है।

 देखिए ये रिपोर्ट:-

रूद्रप्रयाग जनपद के सबसे बड़े गाँव बावई के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर स्थली में बसा पवन नगर आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी हनुमान मंदिर में जहाँ श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता था वहीं इस मंदिर के प्रांगण में बसा बाजार कभी क्षेत्र के लोगों के लिए चाय, पकोड़े, जलेबी सामोसे और सिलाई बुनाई के कुटीर उ़द्योगों के लिए प्रसिद्ध हुआ करता था। पवन नगर का यह बाजार न केवल बावई बल्कि आसपास के एक दर्जन गांवों का इकलौता बाजार हुआ करता था जहां ग्रामीणों की जरूरत की हर एक सामग्री उपलब्ध रहती थी, लेकिन सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में यहां से लोगों ने लगातार पलायन करना आरम्भ कर दिया और आज यह बाजार पूरी तरह से वीरान और खण्डहर में तब्दीन नजर आ रहा है।

- राज्य गठन से पूर्व पवन नगर का बाजार ग्रामीणों की चहल पहल से पूरी तरह से गुलजार हुआ करता था, आज पवन नगर में चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहता है। बाजार अब खण्डहरों मे तब्दील हो चुका है। हालांकि दो परिवार आज भी यहां रहते हैं जो लगातार हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं लेकिन सड़क और पानी की समस्या से भी इस कदर परेशान है कि कभी कभी पलायन कर सकते हैं। हालांकि 3 किमी सड़क जिला योजना में स्वीकृति तो रखी है लेकिन यह सड़क कब बनेगी कुछ कहा नहीं जा सकता है।

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