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ऋषिकेश, 22 नवम्बर। परमार्थ निकेतन में भागवत कथाकार श्री श्याम सुन्दर पाराशर जी पधारे। उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट की।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री श्याम सुन्दर पाराशर जी से वृन्दावन में यमुना जी की विशाल आरती का आयोजन, वृन्दावन को प्लास्टिक मुक्त बनाने, कथा स्थलों पर एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने, भक्तों को वृक्षारोपण के लिये प्रेरित करने जैसे अनेक पर्यावरणीय विषयों पर चर्चा की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि विगत वर्ष ब्रह्माण्ड घाट रमणरेती, गोकुल मथुरा में यमुना आरती शुरू की गयी है उसी तर्ज पर वृन्दावन में भी विशाल यमुना आरती का शुभारम्भ होना चाहिये क्योकि वृन्दावन में लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। उन्होने कहा कि वृन्दावन में तो भक्तिभाव से राधे-राधे जपने वाले अनेक श्रद्धालु है वे माँ यमुने की ओर भी ध्यान देंगे तो बहुत बड़ा कार्य हो सकता है। स्वामी जी ने कहा कि जन जागरण के साथ वृन्दावन के एक-एक कथाकार अगर पांच पांच दिन यमुना जी की आरती की जिम्मेदारी ले तो पूरे वर्ष विशाल यमुना जी आरती का आयोजन किया जा सकता है। आरती के माध्यम से हम यमुना जी की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण यमुना में गिरते नालों के लिये लोगों को जागरूक कर सकते है तथा इस ओर सरकार का भी ध्यान आकर्षित किया जा सकता है।
स्वामी जी ने कहा कि कथाकार सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत हम प्रत्येक कथा के मंच से पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संदेश प्रसारित कर सकते है तथा अपने भक्तों को जन्मदिन और विवाह दिवस जैसे उवसरों पर वृक्षारोपण के लिये प्रेरित किया जा सकता है। उन्होने कहा कि एक कार्य और भी किया जा सकता है कि अपने और अपने भक्तों के परिवार वालों के जन्म दिवस के अवसर पर एक दिन की यमुना जी की आरती का संकल्प भी लिया जा सकता है। वास्तव में इन छोटे-छोटे संकल्पों से हम अपनी जीवन दायिनी नदियों को जीवन प्रदान कर सकते है। मुझे तो लगता है अब कथाकारों को यमुना मैय्या के पैरोकार बनाना होगा।
स्वामी जी ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जिस प्रकार गंगा जी की स्वच्छता और अविरलता की ओर ध्यान दिया है हालाकि यमुना जी भी गंगा जी में ही जाकर मिलती है इसलिये यमुना जी को भी स्वस्च्छ रखना जरूरी है। उन्होने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें माँ यमुने की ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। सभी कथाकारों और वहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी यमुना मिशन और यमुना परिवार पर कार्य करने की जरूरत है। स्वामी जी ने बताया की यमनोत्री से निकलने वाली दिव्य और शुद्ध यमुना जी में अत्यधिक प्रदूषण डाला जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से गुजरते हुये यमुना नदी लगभग 22 किलोमीटर सफर तय करती है और इस सफर में लगभग 18 नाले यमुना में गिरते है। अपने एक हजार उन्नतीस किलोमीटर के सफर में यमुना जी दिल्ली से होते हुये आगरा-मथुरा मेेें सबसे अधिक प्रदूषित हो जाती है। स्वामी जी ने कहा कि नदियों को स्वच्छ रखने के लिये अविरलता के साथ जन जागरूकता नितांत आवश्यक है।

स्वामी जी ने कहा कि अगर नदियां स्वभावगत प्रवाहित होते रही तो वह अविरल और निर्मल रहेगी। परन्तु उनके प्रवाह को रोका गया; उसमें गंदे नाले, मल, सीवर और बिना उपचारित जल प्रवाहित किया गया तब नदियों को स्वच्छ करने की आवश्यकता पड़ती है। जीवनदायिनी नदियों को बचाने के लिये उनके प्रति जन समुदाय का जागरूक होना आवश्यक है। यमुना जी की आरती के माध्यम से स्वच्छता का संकल्प और जागरूकता का अभियान दोनों को सार्थक किया जा सकता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आह्वान किया की जितने भी वैष्णव है वे सब यमुना जी को स्वच्छ और अविरल बनाने के लिये आगे आयें। उन्होने कहा कि कुछ भी असम्भव नहीं है अगर कथाकार चाहें तो गंगा आरती की तरह विश्व को अब यमुना आरती के दर्शन भी हो सकते हैं।
श्री श्याम सुन्दर पाराशर जी ने कहा कि वे इस सप्ताह वृन्दावन जाकर वृन्दावन में यमुना जी की आरती के आयोजन के विषय में अन्य कथाकारों और पूज्य संतों से चर्चा कर इस कार्य को आगे बढ़ायेंगे।
स्वामी जी ने श्री श्याम सुन्दर पाराशर जी को रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये कहा कि अब हम सभी को माँ यमुना के लिये एकमुखी होना चहिये।

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