अभिजीत ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत राग पुरिया धनाश्री से की जिसमें जिन्हीने आलाप , मध्यलय अलाप , एवं द्रुतलय अलाप सुनाया । श्री अभिजीत सुखदाने ने अपनी द्रुपद शैली की रचना 'ऐसी छवि तेरी समझत नही ' का गायन भी किया जोकि सूल ताल में है।
श्री अभिजीत सुखदाने ने बैजू महाराज की रचना 'सुंदर अति नवीन प्रवीण महाचतुर मृगनयनी ' का गायन भी किया । अभिजीत के साथ सह गायन में साथ दिया अनुज प्रताप सिंह , सुश्री यखलेश बघेल , सुदीप भदौरिया , आदित्य शर्मा ने एवं तानपुरा पे साथ दिया आकांशा एवं योगिनी ने वही पखावज पे साथ दिया अंकित पारिख जी ने जो कि बनारस से हैं ।
पहली बार विरासत में शिरकत करने आई श्रीमती अनुप्रिया देवताले ने अपने
कार्यक्रम की शुरुआत की राग रागेश्री से की जिसमें अनुप्रिया ने
विलाम्बित झापताल में बंदिश , एवेम स्वरचित मध्यताल , द्रुतलय तीन ताल , भी
बजाया ।
तबले पे श्री अनुप्रिया का साथ दिया सौमित्रो पॉल ने जोकि उस्ताद रहमतुल्लाह खान के शिष्य हैं ।
तबले पे श्री अनुप्रिया का साथ दिया सौमित्रो पॉल ने जोकि उस्ताद रहमतुल्लाह खान के शिष्य हैं ।
.png)
एक टिप्पणी भेजें