विरासत साधना का समापन, विरासत के छठवें दिन हुआ। जिसमें सभी स्कूल से आए प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़ कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतिभागियों के नाम:
दिविजा अग्रवाल - मोहन वीणा - विन्टेज हॉल गर्ल्स रेजिडेंशियल स्कूल
रौमिता वाधवा - कथक - एशियन स्कूल
प्रज्ञा राजपूत - हिंदुस्तानी संगीत - दूंन प्रेजीडेंसी स्कूल
उत्कर्ष सेमालती - हिंदुस्तानी संगीत - जसवंत मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल
अदिति राणा कोटि - नृत्य - जसवंत मॉडर्न सीनियर सेकंडरी स्कूल
स्वर्णिक मारकंडे - तबला एवं वायलिन
Ghoomar from Rajasthan
घूमर राजस्थान का एक पारंपरिक लोक नृत्य है। उत्साह से भरपूर यह नृत्य मूल रूप से भील जनजाति द्वारा विकसित किया गया था बाद में यह नृत्य अन्य राजस्थानी समुदायों द्वारा अपनाया गया । घूमर नृत्य मुख्य रूप से महिला प्रधान नृत्य है । यह नृत्य मुख्य रूप से त्योहारों पर किया जाता है।
Kahani Gazal Ki by Raza Murad, Chandan Das and Radhika Chopra
आज का प्रोग्राम 'कहानी ग़ज़ल की' 'कॉस्मिक आर्ट फाउंडेशन ' द्वारा आयोजित है। यह कार्यक्रम प्रसिद्ध तबला वादक एवं संगीत निर्माता अमज़द खान जी की संकल्पना है। यह कार्यक्रम दानिश इक़बाल द्वारा लिखित है जोकि रज़ा मुराद जी , चंदन दास और राधिका चोपड़ा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इनके साथ तबले पर अमीर सलीम , गिटार पे रतन प्रसन्ना , हारमोनियम पे नसीर अहमद और इसराज पे अरशद खान रहे।
रज़ा मुराद जी 250 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुके हैं, और साथ ही कई भोजपुरी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी फिल्मे और टी वी के कार्यक्रम किए हैं। वह पंजाबी, हिंदी और तेलुगु की फिल्मों में कई तरह के अभिनय कर चुके हैं।
राजा मुराद जी ने अपने फ़िल्म करियर की शुरुवात 1960 के मध्य में की। उन्होंने अपनी तालीम फ़िल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीटूय ऑफ इंडिया, पुणे से की।
वह कई पंजाबी फिल्मों में अपने अभिनय का जादू चला चुके हैं और पंजाबी सिनेमा में योगदान देने के लिए उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है।
आज की प्रस्तुति में वह ग़ज़ल की कहानी के सूत्रधार के रूप में, चंदन दास और राधिका चोपड़ा के साथ अपनी प्रस्तुति देंगे ।
राधिका जी ने बचपन से ही पंड़ित जे.आर.शर्मा जी से संगीत सीखना एवं आल इंडिया रेडियो जम्मू के लिए स्टेज शो करना शुरू कर दिया था । राजकीय महिला विद्यालय जम्मू से स्नातक करने के बाद राधिका जी ने दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षण शुरू किया एवं साथ ही साथ संगीत में अपनी एम.फिल. और पी.एच्डी की डिग्री भी पूरी की। राधिका जी ने ठुमरी ,दादरा और ग़ज़ल की शिक्षा प्रसिद्ध गुरु श्रीमती शांति हीरानंद जी से ली जो कि बेगम अख्तर जी की शिष्या हैं। राधिका जी अपनी राग से परिपूर्ण , पारंपरिक गायकी के लिए जनी जाती है।
चंदन दास जी मशहूर ग़ज़ल गायक उस्ताद मूसा खान जी के शिष्य हैं। इन्होंने शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता पंडित मणि प्रसाद जी से भी प्रशिक्षण लिया है। चंदन दास जी मेहँदी हसन जी के प्रशंसक रहे हैं और आज की पीढ़ी को ग़ज़ल में दिलचस्पी लेने की जरूरत महसूस करते हैं। दर्शकों को अच्छा संगीत सुनाना ही चंदन जी का प्रयास रहता है। इन्होंने 80 के दशक में दूरदर्शन के एक नाटक सुगम संगीत में भी अपनी उपस्थिति दी है। चंदन दास जी ने भारत ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी पहचान बनाई है ।
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