बा और बापू की धरती पंहुचे स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज
ऋषिकेश/अहमदाबाद:
साबरमती आश्रम अहमदाबाद में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज पहुंचेे उन्होने साबरमती आश्रम की गतिविधियों का अवलोकन किया साथ ही वहां के विद्यालय का भ्रमण किया। विद्यालय के बच्चों और अन्य सदस्यों के साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया। साबरमती आश्रम द्वारा संचालित गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा वहां की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।
हम महात्मा गांधी जी की 150 वीं जन्म जयंती मना रहे है इसी परिपेक्ष्य में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज गांधी आश्रम साबरमती पहुंचे और पूज्य बापू को नमन करते हुये उन्होने बापू के विचारों को हर युग के लिये प्रासंगिक और व्यवहारिक बताया।
उन्होने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि आज हम जिस आजाद भारत में सांस ले रहे है उसे आजाद करने में महात्मा गांधी जी का बहुत बड़ा योगदान था। अब सब मिलकर अपने इस राष्ट्र को स्वच्छ और सुरक्षित रखने हेतु अपना योगदान प्रदान करे। सामाजिक मूल्यों के साथ अनुशासनात्मक जीवन पद्धति अपनाये। उन्होने कहा कि मनुष्य जीवन अपने लिये नहीं बल्कि सब के लिये होता है। जीवन में श्रेष्ठ मूल्यों का होना नितांत आवश्यक है साथ ही सबसे बड़ा मूल्य होता है चरित्र, चरित्र जिसका महान है उसी का जीवन मूल्यवान है और महान है इसलिये अपने चरित्र पर, अपनी ईमानदारी पर ध्यान देते हुये बापू और बा के आदर्शो को आत्मसात करते हुये आगे बढ़े।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह धरती साधना, सत्य और करूणा की धरती है। यह धरती जीवन में सत्य, पेे्रम और करूणा का संचार कराती है। यह धरती बापू और बा की धरती है इस भारत की धरती ने बापू की यादों को आज भी अपने आगोश में समेट रखा है।
स्वामी जी ने कहा कि ’’महात्मा गांधी जी ने मन की शुद्धता और पर्यावरण की स्वच्छता को ही पूजा माना। सफाई, सच्चाई और ऊंचाई के रास्ते पर आगे ब़ढ़ते रहे यही हमारे प्यारे बापू को हमारी ओर से सच्चा उपहार होगा। वे मन और पर्यावरण दोनों की स्वच्छता पर जोर देते थे।’’ बापू का कथन ’’स्वच्छता, स्वतंत्रता से भी ज्यादा जरूरी है’’ को दोहराते हुये स्वामी जी ने कहा कि ’’स्वच्छता, हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और उसके लिये हर व्यक्ति को प्रयत्नशील रहना होगा।’’
जहां पर महात्मा गांधी जी बैठकर ध्यान करते थे उस मिट्टी को स्वामी जी ने अपने साथ लिया और कहा कि गंगा और गांधी का संगम इस देश की पहचान बने इसके लिये प्रयास किया जायेगा।
स्वामी जी महाराज ने साबरमती गांधी आश्रम में सेवा दे रहे कार्यकर्ताओं को गंगा के तट पर आमंत्रित करते हुये कहा कि यहां आकर चिंतन करे और गांधी के विचारों में जो गंगा जल की तरह पवित्रता है उसे पूरे विश्व तक पहुंचायें। साबरमती आश्रम द्वारा संचालित सभी संस्थाओं और वहा के कार्यकर्ताओं से भेंट कर मिलकर स्वामी जी ने कहा कि इन्ही संस्थाओं के संस्कार है जो आने वाली पीढ़ियों को श्रेष्ठ संस्कार दे सकेंगे।
इस अवसर पर श्री जयेश भाई, श्रीमती अनार बेन, श्री देवेन्द्र भाई, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी जी, आचार्य दीपक जी, गांधी साबरमती आश्रम के अनेक कार्यकर्ता बहन-भाई जिन्होने अपना जीवन सफाई विद्यालय और सफाई की शिक्षा के लिये समर्पित किया, विद्यालय के अध्यापक और अन्य गणमान्य अतिथिगण उपस्थित थे सभी का स्वामी जी महाराज ने अभिनन्दन किया।
ऋषिकेश/अहमदाबाद:
साबरमती आश्रम अहमदाबाद में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज पहुंचेे उन्होने साबरमती आश्रम की गतिविधियों का अवलोकन किया साथ ही वहां के विद्यालय का भ्रमण किया। विद्यालय के बच्चों और अन्य सदस्यों के साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया। साबरमती आश्रम द्वारा संचालित गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा वहां की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की।
हम महात्मा गांधी जी की 150 वीं जन्म जयंती मना रहे है इसी परिपेक्ष्य में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज गांधी आश्रम साबरमती पहुंचे और पूज्य बापू को नमन करते हुये उन्होने बापू के विचारों को हर युग के लिये प्रासंगिक और व्यवहारिक बताया।
उन्होने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि आज हम जिस आजाद भारत में सांस ले रहे है उसे आजाद करने में महात्मा गांधी जी का बहुत बड़ा योगदान था। अब सब मिलकर अपने इस राष्ट्र को स्वच्छ और सुरक्षित रखने हेतु अपना योगदान प्रदान करे। सामाजिक मूल्यों के साथ अनुशासनात्मक जीवन पद्धति अपनाये। उन्होने कहा कि मनुष्य जीवन अपने लिये नहीं बल्कि सब के लिये होता है। जीवन में श्रेष्ठ मूल्यों का होना नितांत आवश्यक है साथ ही सबसे बड़ा मूल्य होता है चरित्र, चरित्र जिसका महान है उसी का जीवन मूल्यवान है और महान है इसलिये अपने चरित्र पर, अपनी ईमानदारी पर ध्यान देते हुये बापू और बा के आदर्शो को आत्मसात करते हुये आगे बढ़े।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह धरती साधना, सत्य और करूणा की धरती है। यह धरती जीवन में सत्य, पेे्रम और करूणा का संचार कराती है। यह धरती बापू और बा की धरती है इस भारत की धरती ने बापू की यादों को आज भी अपने आगोश में समेट रखा है।
स्वामी जी ने कहा कि ’’महात्मा गांधी जी ने मन की शुद्धता और पर्यावरण की स्वच्छता को ही पूजा माना। सफाई, सच्चाई और ऊंचाई के रास्ते पर आगे ब़ढ़ते रहे यही हमारे प्यारे बापू को हमारी ओर से सच्चा उपहार होगा। वे मन और पर्यावरण दोनों की स्वच्छता पर जोर देते थे।’’ बापू का कथन ’’स्वच्छता, स्वतंत्रता से भी ज्यादा जरूरी है’’ को दोहराते हुये स्वामी जी ने कहा कि ’’स्वच्छता, हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और उसके लिये हर व्यक्ति को प्रयत्नशील रहना होगा।’’
जहां पर महात्मा गांधी जी बैठकर ध्यान करते थे उस मिट्टी को स्वामी जी ने अपने साथ लिया और कहा कि गंगा और गांधी का संगम इस देश की पहचान बने इसके लिये प्रयास किया जायेगा।
स्वामी जी महाराज ने साबरमती गांधी आश्रम में सेवा दे रहे कार्यकर्ताओं को गंगा के तट पर आमंत्रित करते हुये कहा कि यहां आकर चिंतन करे और गांधी के विचारों में जो गंगा जल की तरह पवित्रता है उसे पूरे विश्व तक पहुंचायें। साबरमती आश्रम द्वारा संचालित सभी संस्थाओं और वहा के कार्यकर्ताओं से भेंट कर मिलकर स्वामी जी ने कहा कि इन्ही संस्थाओं के संस्कार है जो आने वाली पीढ़ियों को श्रेष्ठ संस्कार दे सकेंगे।
इस अवसर पर श्री जयेश भाई, श्रीमती अनार बेन, श्री देवेन्द्र भाई, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी जी, आचार्य दीपक जी, गांधी साबरमती आश्रम के अनेक कार्यकर्ता बहन-भाई जिन्होने अपना जीवन सफाई विद्यालय और सफाई की शिक्षा के लिये समर्पित किया, विद्यालय के अध्यापक और अन्य गणमान्य अतिथिगण उपस्थित थे सभी का स्वामी जी महाराज ने अभिनन्दन किया।
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